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न्यूजर्सी में अवैध भारतीय प्रवासियों की बढ़ोतरी

Last Updated: सोमवार, 5 जून 2017 (15:09 IST)
न्यूजर्सी। न्यूजर्सी में अवैध भारतीय प्रवासियों की बहुत अधिक बढ़ोतरी हो रही है। विदित हो कि अमेरिका में सबसे अधिक संख्या में अवैध प्रवासी अमेरिका के न्यूजर्सी में हैं। विदित हो कि सबसे ज्यादा अवैध भारतीय प्रवासियों की संख्या कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क, जॉर्जिया और टेक्सास से भी अधिक है।
राज्य के लेखाकारों के मुताबिक अमेरिका में सभी अवैध प्रवासियों का एक तिहाई हिस्सा करीब डेढ़ लाख भारतीयों की वीजा स्थिति संदिग्ध है। न्यूजर्सी, मिडिलसेक्स, समरसेट, हडसन, मर्सर और कामडेन काउंटीज अवैध प्रवासियों की संख्या सबसे अधिक है।

उल्लेखनीय है कि नवंबर 2014 में जारी किए गए प्यू रिसर्च के अनुमानों के अनुसार समूचे अमेरिका में अवैध भारतीय प्रवासियों की संख्या करीब 4.50 लाख है और यह अनुमान 2012 में लगाया था। लेकिन अमेरिका में अवैध प्रवासियों की कम गिनती के इतिहास को देखते हुए इस बात की संभावना अधिक है कि अवैध प्रवासियों की वास्तविक संख्या अधिक हो सकती है।

पर इसके चलते यह सवाल उठता है कि ऐसा न्यूजर्सी में क्यों हो रहा है? न्यूजर्सी में अवैध भारतीयों की मौजूदगी 4 कारणों से संभव है। पहला कारण है कि वैध भारतीयों के मजबूत सहायता नेटवर्क का इन्हें समर्थन मिलता है। दूसरा कारण है कि 3 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्‍डों (नेवार्क इंटरनेशनल, जेएफके और फिलाडेल्फिया इंटरनेशनल) का करीब होना, तीसरा कारण है कि न्यूजर्सी में कैलिफोर्निया के मुकाबले कम लागत में आवासीय सुविधा और भारत में रोजगार के अवसरों की कमी के कारण ऐसा होता है।

न्यूजर्सी में 3 लाख भारतीय नागरिक, प्रवासी रहते हैं, जो कि या तो अमेरिकी नागरिक हैं या ग्रीनकार्ड होल्डर्स और एच1बी वीजा रखने वाले लोग रहते हैं। मित्रों, परिवार और परिचितों का एक बड़ा सपोर्ट स्ट्रक्चर वैध प्रवासी भारतीयों से जुड़ा होता है, इस कारण से न्यूजर्सी में नए-नए प्रवासियों को आसानी से नौकरी मिल जाती है और आवास मुहैया हो जाता है और इस कारण से वे अपने को यहां स्थापित कर लेते हैं।

न्यूजर्सी की से करीबी और सुविधाजनक यात्रा के नेटवर्क के चलते भी अवैध प्रवासी भारतीयों का राज्य में अपने लंगर यहां डालने में सहायता मिलने के चलते अवैध भारतीय प्रवासी यहीं पहुंचते हैं। इन लोगों की लैटिन अमेरिकी देशों के नागरिकों के लिए दक्षिणी सीमा को पैदल पार करने में सुविधाजनक है, वहीं भारत से आने टूरिस्ट वीजा पर आते हैं और निर्धारित समय से अधिक समय तक टिके रहते हैं।

कुछ लोग यहां छात्रों के वीजा लेकर आते हैं और कभी भी किसी स्कूल या कॉलेज में दाखिला नहीं लेते हैं। अवैध भारतीय प्रवासियों में यहां बसने की तेजी का कारण यह भी है कि देसी मॉटल, डोनट (अंगूठी के आकार की फ्राई की गई केक) दुकानों, कन्वेनिएंस स्टोरों में कार्मिकों, रेस्तरांओं और गैस स्टेशनों पर ऐसे लोगों को आसानी से काम मिलता है।

सौभाग्य की बात है कि न्यूजर्सी के अवैध देशी प्रवासी और बहुत से भारतीय नियोक्ता इस बात का पता लगाने के लिए ई-वेरीफाई सिस्टम का उपयोग नहीं करते हैं जिससे प्रवासियों की वैधानिक काम की स्टेटस की जांच नहीं करते हैं।
कौन लोग आ रहे हैं? : न्यूजर्सी में भारतीय अवैध प्रवासियों की पहली लहर के तहत आने वाले ज्यादातर श्रमिक उत्तर भारतीय प्रवासी पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और गुजरात से आए थे। लेकिन इस बार न्यूजर्सी में आने वाले प्रवासियों के तौर पर आए बहुसंख्यक लोग दक्षिण भारत से आ रहे हैं। दक्षिण भारत से आने वाले अवैध प्रवासी कला और इंजीनियरों की नौकरी के लिए आए हैं जबकि उत्तर भारतीय देशी राज्य में अपने पारिवारिक कारोबार में मदद करने के लिए आते हैं।
दक्षिण भारतीय राज्यों में 2,300 इंजीनियरिंग कॉलेज और कम से कम 10 हजार कला, साइंस और कॉमर्स कॉलेजों के होते ऐसा लगता है कि सरकार का मेक इन इंडिया सफल नहीं हो सका है। दक्षिण भारत के राज्यों में हाल में ग्रेजुएट के लिए नौकरियां बहुत कम हैं। इस कारण से वे विदेशों में वैध, अवैध तरीकों से नौकरियां पाने की कोशिश करते हैं।

ऐसे कई उदाहरणों में देखा गया कि एच1बी वीजा पाने के लिए हैदराबाद, मुंबई और चेन्नई के दलालों को 80 हजार से लेकर 1 लाख डॉलर खर्च करके यहां पहुंचते हैं लेकिन अमेरिका में आने के बाद बेकारों की श्रेणी में आते हैं और खराब हालातों में काम करने के लिए विवश हो जाते हैं।

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