मुख्य पृष्ठ > खबर-संसार > करियर > गुरु-मंत्र
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
दो पाटन के बीच में साबुत बचा है कोय
मनीष शर्मा
एक नवविवाहित युवक अपनी माँ और पत्नी के बीच बढ़ते मनमुटाव से बेचैन था। 'बेटा, बहू को समझा लेना।' 'देखिए, माँ को समझा दीजिए।' ये संवाद रह-रहकर उसके कानों में गूँजते रहते थे। वह दोनों के बीच सेंडविच बन चुका था। वह किसी एक के पक्ष में बोलकर स्थिति को बदतर नहीं करना चाहता था।

एक दिन उसे एक उपाय सूझा। उसने उस पर अमल करना शुरू कर दिया। जब भी उसकी माँ उसके सामने पत्नी की शिकायत करती तो वह कहता- माँ, आप बेकार ही बहू के पीछे पड़ी हैं। वह तो आपकी तारीफ करते हुए कहती है कि मुझे तो माँ जैसी सास मिली है। और जब रात को पत्नी की रामायण शुरू होती तो उससे कहता- पता नहीं तुम्हें क्या गलतफहमी है।

जब भी उसकी माँ उसके सामने पत्नी की शिकायत करती तो वह कहता- माँ, आप बेकार ही बहू के पीछे पड़ी हैं। वह तो आपकी तारीफ करते हुए कहती है कि मुझे तो माँ जैसी सास मिली है। और जब रात को पत्नी की रामायण शुरू होती तो उससे कहता- पता नहीं तुम्हें क्या गलतफहमी है।
माँ तो तुम्हें अपनी बेटी से भी बढ़कर मानती है और कहती है कि मैं कितनी भाग्यशाली हूँ जो ऐसी बहू मिली। इस तरह वह एक के सामने दूसरे पक्ष की तारीफ करने लगा। इससे धीरे-धीरे सास-बहू के मन में एक-दूसरे के प्रति प्यार उमड़ने लगा। अब तो वह पत्नी को कुछ कहता तो माँ डाँट देती और माँ से कुछ कहता तो पत्नी टोक देती।

दोस्तो, कहते हैं 'दो पाटन के बीच में साबुत बचा न कोय।' लेकिन उस युवक ने अपनी सूझबूझ से साबित कर दिखाया कि दो पाटन के बीच में साबुत बचा जा सकता है, यदि आपका दृष्टिकोण सकारात्मक हो और आप किसी एक पक्ष की सुनकर उसके बहकावे में न आते हों।

दरअसल बात तब बिगड़ती है जब आप किसी एक पक्ष की सुनवाई करते हैं। ऐसी सुनवाई आधी होती है और आपकी जानकारियाँ भी आधी-अधूरी। तब उनके सहारे यदि कोई फैसला करेंगे तो दो पाटों के बीच में पिसेंगे ही। यह तो आप जानते ही हैं कि चक्की में पिसाई तभी हो सकती है जब उसका एक पाट स्थिर रहे और दूसरा गतिशील।

आपके फैसले से एक पक्ष शांत यानी स्थिर पाट और दूसरा पक्ष नाराज यानी गतिशील पाट बन जाएगा और ऐसे में आपकी पिसाई तो होना ही है। इसलिए यदि आप भी ऐसी ही किसी दुविधा में हैं और पिसाई से बचना चाहते हैं तो वही करें जो उस युवक ने किया। यानी दोनों पक्षों में संतुलन या बैलेंस बनाने की कोशिश करें।
1 | 2  >>  
और भी
यदि चलाना है दुकान तो बिखेरो मुस्कान
आदमी को है खाता लंबा खिंचता खाता
जब नहीं है ईमान तो क्यों रखते हो ईमान
जीवन को देना है नए आयाम तो करो व्यायाम
बाहर हो शेर तो घर में भीगी बिल्ली क्यों
बेवजह न आने दें संबंधों में खटास