आतंकी मनान का बाप शिक्षक और भाई इं‍जीनियर

जम्मू। एएमयू अर्थात अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में ज्योलॉजी में पीएचडी करते हुए आतंकवाद की राह पकड़ने वाले मनान बशीर ने हालांकि सोशल मीडिया पर हथियारों संग अपनी तस्वीर वायरल कर, जिहादी बनने का ऐलान कर दिया है, लेकिन पुलिस अभी भी इस मामले में खुलकर बोलने से कतरा रही है। फिलहाल, उसके बारे में पता लगाने के लिए उसके परिजनों व कुछ दोस्तों से पूछताछ की गई है।

गौरतलब है कि उत्तरी कश्मीर में एलओसी के साथ सटे जिला कुपवाड़ा में टकीपोरा गांव के रहने वाले मनान बशीर वानी पुत्र बशीर अहमद वानी का हाथों में एके 47 राइफल लिए एक फोटो बीते तीन दिनों से लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। फोटो में उसके नाम और योग्यता व घर के पते के साथ ही आतंकी संगठन द्वारा प्रदान किया गया उसका कोड नाम हमजा भाई भी लिखा है।
करीब एक साल पहले वर्ष 2016 में भोपाल स्थित आईसैक्ट विश्वविद्यालय में जल, पर्यावरण, ऊर्जा एवं समाज अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीडब्लयूईईएस) में सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र प्रस्तुती का सम्मान अर्जित करने वाला मनान बशीर बीते पांच सालों से अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी में अध्ययनरत था।

एमफिल करने के बाद ज्योलॉजी में पीएचडी कर रहा मनान कुपवाड़ा के एक संभ्रांत परिवार से संबंध रखता है। उसके पिता राज्य स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत लेक्चरार हैं। उसका एक भाई जूनियर इंजीनियर है। उसने दसवीं तक की पढ़ाई लोलाब, कुपवाड़ा में स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय से ही की है।
उसके पिता बशीर अहमद ने बताया कि उसे दिसंबर के अंत में घर आना था। वह अलीगढ़ से जब घर के लिए रवाना हुआ तो उसने सूचित भी किया, लेकिन वह घर नहीं पहुंचा और पांच जनवरी को सोशल मीडिया पर उसकी एक तस्वीर वायरल हुई। हमने पुलिस में उसके लापता होने की शिकायत भी दर्ज कराई है।

उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि मेरा बेटा कब आतंकी बना। वह तो पढ़ने लिखने वाला नौजवान था। पिछले साल भोपाल में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में उसे उसके शोधपत्र के लिए भी सम्मानित किया गया था। उसने लोलाब घाटी में बाढ़ संकट अनुमान पर शोध पत्र तैयार किया था।
एसएसपी कुपवाड़ा शमशेर हुसैन का कहना था कि मनान बशीर के लापता होने की रिपोर्ट उसके परिजनों ने दर्ज कराई है। हमने सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीर का भी संज्ञान लिया है। उसके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स की भी जांच की जा रही है। उसके कुछ दोस्तों और परिजनों से भी हमारी बातचीत हुई है। अलीगढ़ स्थित उसके सहपाठियों व दोस्तों से भी संपर्क किया जा रहा है।

मनान के भाई मुबाशिर अहमद ने कहा कि हमने भी मनान की तस्वीर सोशल नेटवर्किंग साइट पर देखी हैं, लेकिन हमें इस बात की जानकारी नहीं है कि वह आतंकवादी समूह में शामिल हुआ है कि नहीं। मनान से हमारा संपर्क गत 4 जनवरी से नहीं हो सका है क्योंकि उसका फोन बंद है।


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