रातभर चली सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, येदियुरप्पा बने कर्नाटक के मुख्यमंत्री

Last Updated: गुरुवार, 17 मई 2018 (09:27 IST)
नई दिल्ली। के राज्यपाल वजुभाई वाला के भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता देने से आक्रोशित कांग्रेस ने इस फैसले के खिलाफ बुधवार रात उच्चतम न्यायालय का रुख किया और प्रधान न्यायाधीश से तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया। रातभर चली सुनवाई के बाद ने शपथ ग्रहण समारोह पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
येदियुरप्पा ने आज सुबह 9 बजे कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। वह तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि हम राज्यपाल के आदेश पर रोक नहीं लगा सकते। उन्होंने भाजपा से वह चिट्ठी भी मांगी जो राज्यपाल को सौंपी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपने-अपने विधायकों की लिस्ट सौंपने को कहा है। शुक्रवार सुबह साढ़े 10 बजे अदालत फिर इस मामले में सुनवाई करेगी।मुंबई बम धमाके के आरोपी याकूब के मामले में आधी रात सुप्रीम कोर्ट खुलने के बाद यह दूसरा मौका था जब सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष देर रात हाई प्रोफाइल राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला।


देर रात दो बजकर 11 मिनट से आज सुबह पांच बजकर 58 मिनट तक चली सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि राज्य में शपथ ग्रहण और सरकार के गठन की प्रक्रिया न्यायालय के समक्ष इस मामले के अंतिम फैसले का विषय होगा।

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति ए के सीकरी, न्यायमूर्ति एस के बोबडे और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की एक विशेष पीठ ने केंद्र को येद्दियुरप्पा द्वारा प्रदेश के राज्यपाल वजुभाई वाला के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए भेजे गए दो पत्र अदालत में पेश करने के लिए कहा है क्योंकि मामले का फैसला करने के लिए उसका अवलोकन करना आवश्यक है।

शीर्ष न्यायालय ने कांग्रेस और जद (एस) की याचिका पर कनार्टक सरकार तथा येद्दियुरप्पा को नोटिस जारी करते हुए इस पर जवाब मांगा है और मामले की सुनवाई के लिए कल की तारीख तय की है।
इससे पहले
कांग्रेस ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा से अनुरोध किया कि वे आज रात ही इस मामले पर अविलंब सुनवाई करें क्योंकि येदियुरप्पा कल सुबह नौ बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं।

इस मामले पर उनकी याचिका स्वीकार कर ली और रात के 1:45 मिनट पर सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई शुरू की। इस बेंच में जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस सीकरी और जस्टिस बोबडे शामिल थे।
मामले में केंद्र सरकार की ओर से अडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, भाजपा की ओर से पूर्व अटर्नी जनरल मुकुल रोहतगी और कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी कोर्ट में पेश हुए।

इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पार्टी ने राज्यपाल के फैसले को चुनौती देने वाली अपनी याचिका पर रात में ही सुनवाई का अनुरोध किया है।
कांग्रेस ने राज्यपाल के फैसले को ‘लोकतंत्र की हत्या और संविधान को कुचलना’ करार दिया। इससे पहले देर शाम में राज्यपाल वाला ने येदियुरप्पा को सरकार बनाने और कल मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का न्योता दिया। उन्होंने येदियुरप्पा से पद संभालने के 15 दिन के भीतर विश्वास मत हासिल करने को कहा।

सिंघवी को वाला के फैसले के खिलाफ कांग्रेस की कानूनी चुनौती का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने ‘अविलंब याचिका’पर सुनवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिये उच्चतम न्यायालय के रजिस्ट्रार से मुलाकात की।
कांग्रेस ने कर्नाटक में भाजपा की सरकार बनाने के कदम को ‘अवैध और कानून और संविधान के खिलाफ’बताया है।

कांग्रेस ने येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का वक्त दिए जाने को खरीद-फरोख्त को बढ़ावा देने वाला बताया। पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा, कांग्रेस और जद (एस) के विधायकों को तोड़ने की कोशिश करेगी।


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