Widgets Magazine

भारतीय सेना के ज्यादातर हथियार पुराने, पर्याप्त पैसा भी नहीं

पुनः संशोधित मंगलवार, 13 मार्च 2018 (18:36 IST)
नई दिल्ली। हथियारों का सबसे बड़ा आयातक होने के बावजूद भारतीय सेना के पास दो-तिहाई से अधिक यानी 68 प्रतिशत हथियार और उपकरण पुराने हैं और केवल 8 प्रतिशत ही अत्याधुनिक हैं। हालत यह है कि सेना के पास जरूरत पड़ने पर हथियारों की आपात खरीद और दस दिन के भीषण युद्ध के लिए जरूरी हथियार तथा साजो-सामान तथा आधुनिकीकरण की 125 योजनाओं के लिए भी पर्याप्त पैसा नहीं है।

दो मोर्चों पर एक साथ युद्ध की तैयारी के नजरिए से भी सेना के पास हथियारों की कमी है और उसके ज्यादातर हथियार पुराने हैं। से संबद्ध संसद की स्थाई समिति का मानना है कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए शुरू की गई 'मेक इन इंडिया योजना' के तहत सेना की 25 परियोजनाएं भी पैसे की कमी के कारण ठंडे बस्ते में जा सकती हैं।

स्थाई समिति ने वर्ष 2018-19 के लिए रक्षा मंत्रालय की अनुदान मांगों से संबंधित रिपोर्ट आज लोकसभा में पेश की। खुद सेना ने समिति के समक्ष हथियारों तथा उपकरणों के जखीरे के बारे में खुलासा किया है। सेना उप प्रमुख ने समिति को बताया कि सेना के 68 प्रतिशत हथियार और उपकरण पुराने हैं, 24 प्रतिशत ऐसे हैं जो मौजूदा समय में प्रचलन में हैं तथा केवल 8 प्रतिशत ही अत्याधुनिक हैं।

समिति को यह बताया गया कि किसी भी आधुनिक सेना के पास एक तिहाई हथियार पुराने, एक तिहाई मौजूदा प्रचलन के और एक तिहाई अत्याधुनिक होने चाहिए। (वार्ता)

वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।

और भी पढ़ें :