मैनचेस्टर ब्लास्ट अप्रत्याशित नहीं, चिन्तनीय

ब्रिटेन के उत्तरी शहर मैनचेस्टर स्थित एक म्यूज़िक कंसर्ट में हुआ बम धमाका अप्रत्याशित जैसा प्रतीत नहीं हो रहा है है, क्योंकि दिसम्बर 2016 में ही यूरोपीय पुलिस एजेंसी यूरोपोल ने यह संकेत दे दिया था कि इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने में अपनी टीम बना ली है, जो यूरोपीय शहरों में हमले करने को तैयार है। उसी वक्त कहा गया था कि आईएस का गुट लोगों में दहशत फैलाने के लिए सार्वजनिक जगहों को निशाना बना सकता है।

इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि ब्रिटेन के मैनचेस्टर शहर में हुए धमाके में 22 लोगों के मारे जाने की घटना अप्रत्याशित नहीं है। इस तरह की आशंका पहले जता दी गई थी। हां, इस घटना की जितनी भी निन्दा की जाए, वो कम होगी। साथ ही दुनिया के इस विकसित यूरोपीय देश ब्रिटेन में हुई घटना का एक गंभीर संदेश भी है, जो से त्रस्त भारत समेत अन्य दक्षिण एशियाई देशों को समझना चाहिए। यूं कहें कि आतंकी संगठन जब ब्रिटेन जैसे देश को अपने निशाने पर ले सकता है तो दुनिया के अन्य विकासशील देशों की क्या बिसात है। यह अलग बात है कि आतंकवाद से निपटने के लिए दुनियाभर में बहस छिड़ी हुई है, पर उसका खात्मा होने के बजाय वह और बढ़ता ही जा रहा है, जो दुखद और चिन्तनीय है।
गौरतलब है कि ब्रिटेन के मैनचेस्टर शहर में 22 मई की रात पॉप सिंगर आरियाना ग्रांडे के कंसर्ट के दौरान एक आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें 22 लोगों की मौत हो गई और 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए। स्थानीय पुलिस ने भी इसकी पुष्टि करते हुए इसे आतंकवादी हमला बताया है। कहा जा रहा है कि यह ब्लास्ट किसी आत्मघाती हमलावर ने किया है। जिस वक्त यह ब्लास्ट हुआ, उस समय अरियाना परफॉर्म कर रही थीं।

बताया जा रहा है कि धमाके की आवाज के बाद लोगों ने भागना शुरू कर दिया। घटना के बाद सामने आए कुछ वीडियो में लोगों को चीखते-चिल्लाते हुए देखा-सुना जा सकता है। यह बहुत बड़ा ब्लास्ट था जिसे सीने में महसूस किया जा सकता था। हर कोई यहां-वहां भाग रहा था और बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था। जानकारी के मुताबिक, कंसर्ट में बच्चे भी थे। अब पूरे ब्रिटेन में अलर्ट जारी कर दिया गया है।

पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे मैनचेस्टर अरीना के आसपास के इलाके में बिलकुल न जाएं। पुलिस ने अरीना के पास के स्टेशन, विक्टोरिया स्टेशन को खाली करवा लिया है और सभी ट्रेनों को कैंसल कर दिया गया है। ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टरीसा मे ने इस हमले की निंदा की है। अपने बयान में उन्होंने कहा कि हम यह पता लगाने की कोशिश में हैं कि यह घटना क्यों हुई और घटना से पहले खुफिया को इसकी भनक क्यों नहीं लगी।

आपको बता दें कि दिसम्बर 2016 में जारी एक रिपोर्ट में यूरोपोल ने कहा था कि इस्लामिक स्टेट निकट भविष्य में यूरोपीय संघ के भीतर हमला कर सकता है। सुन्नी आतंकवादी गुट आईएस के पास यूरोप में हमला करने की इच्छा और क्षमता, दोनों हैं। खासतौर से उन देशों में हमले हो सकते हैं जो इस्लामिक स्टेट के खिलाफ बने गठबंधन में शामिल हैं। सबसे ज्यादा हमले का खतरा फ्रांस, बेल्जियम, जर्मनी, नीदरलैंड्स और ब्रिटेन में बताया गया था।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि चूंकि सीरिया और इराक में सैन्य अभियानों के चलते इस्लामिक स्टेट कमजोर पड़ रहा है, इसलिए उसके विदेशी लड़ाके वापस यूरोप में अपने परिवारों के पास आ सकते हैं और इससे सुरक्षा को एक बड़ा खतरा पैदा होगा। अन्य आईएस लड़ाके लीबिया जा सकते हैं, जो विदेशी लड़ाकों की मंजिल बन गया है। लीबिया को उत्तरी अफ्रीका और यूरोप में हमले के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यूरोपोल के मुताबिक, यूरोप से बड़ी मात्रा में कट्टरपंथी लोग इस्लामिक स्टेट में भर्ती हुए हैं। ऐसे लोगों की संख्या हजारों में है। इन लोगों की बड़ी संख्या में अपने घरों को वापसी एक बड़ा सुरक्षा खतरा है।

रिपोर्ट में आशंका जताई गई थी कि यूरोप में ऐसे दर्जनों लोग हो सकते हैं जिनके पास आतंकवादी हमले करने की क्षमता है। यूरोपोल के अनुसार, यूरोप में हमला करने के लिए कार बम धमाके जैसे तरीके इस्तेमाल किए जा सकते हैं जो सीरिया और इराक में बहुत आम हैं। हमले में ऑटोमेटिक राइफल, धारदार हथियार या वाहनों को इस्तेमाल किया जा सकता है। यूरोपोल की रिपोर्ट कहती है कि इस्लामिक स्टेट जैविक या रासायनिक हमला भी कर सकता है। बताया जाता है कि आईएस सीरिया और इराक में मस्टर्ड गैस तैयार करने में सक्षम है।

यूरोपोल का कहना है कि इस्लामिक स्टेट अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए पुलिस, सेना या सुरक्षा वाले अन्य ठिकानों की बजाय आसान सार्वजनिक जगहों को निशाना बना सकता है। मैनचेस्टर में ब्लास्ट के बाद बताया गया कि अरीना एक आसान टारगेट था। अरीना के कंसर्ट हाल में युवा लोग थे, जो म्यूज़िक में डूबे हुए थे, किसी ने ऐसे हमले के बारे में सोचा भी नहीं होगा। हमले से पूरा शहर सदमे में है, हादसे के शिकार लोगों में कई तो बहुत कम उम्र के थे।

बता दें कि मैनचेस्टर अरीना यूरोप का सबसे बड़ा इंडोर सभागार है जो 1995 में खुला था। यहां कई बड़े कॉन्सर्ट और खेलों का आयोजन होता रहता है। इसकी क्षमता 18,000 दर्शकों की है। अरीना में नियमित रूप से कंसर्ट हुआ करते हैं जहां अरियाना ग्रांडे जैसे बड़े कलाकार आते हैं। 23 वर्षीय अरियाना अमेरिका की एक टीवी अभिनेत्री और पॉप स्टार हैं। वे ख़ासतौर से युवाओं में लोकप्रिय रही हैं, जिनका गाना 'प्रॉब्लम' 2014 में ब्रिटेन में चार्ट में नंबर वन पर रहा था। अरियाना फ़िलहाल यूरोपीय देशों का दौरा कर रही हैं। उन्होंने बर्मिंघम और डब्लिन में कंसर्ट किए हैं और इस सप्ताह लंदन में उनके दो कार्यक्रम होने वाले थे। अब लगता है कि इस ब्लास्ट के बाद उन कार्यक्रमों को रद्द कर दिया जाए।

उधर, इस घटना के बाद इंटरनेट पर इस्लामिक स्टेट के समर्थकों ने खुशी जाहिर की और आपस में बधाई संदेश भेजे। हालांकि इस्लामिक स्टेट समेत किसी भी आतंकी संगठन ने अब तक इस धमाके की जिम्मेदारी नहीं ली है। फिर भी इस्लामिक स्टेट से जुड़े टि्वटर अकाउंट से धमाके से जुड़े हैशटैग का इस्तेमाल करके बधाई संदेश भेजे गए और दूसरी जगहों पर ऐसे ही हमलों के लिए हौसलाअफजाई की गई।

टि्वटर पर आईएस से जुड़े कुछ यूजर्स ने मैनचेस्टर धमाके को इराक़ और सीरिया में हुए हवाई हमलों का बदला बताया है। आईएस समर्थक एक यूजर्स ने मैनचेस्टर हैशटैग के साथ ट्वीट किया है कि ऐसा लगता है कि ब्रिटिश एयरफोर्स द्वारा मोसुल और रक़्क़ा के बच्चों पर गिराए गए बम वापस आ गए हैं। इराक में आईएस आतंकियों के खिलाफ अभियान चला रही अमेरिका के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना में ब्रिटेन भी शामिल है। धमाके के बाद अमेरिका ने देश में संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। आईएस समर्थकों ने टि्वटर पर एक-दूसरे को यूरोप और अमेरिका में और 'लोन वूल्फ' अटैक (एकल हमला) करने के लिए प्रोत्साहित किया है।

एक टि्वटर यूजर ने लिखा है कि उसे उम्मीद है इस हमले के पीछे आईएस होगा। आतंकी संगठन आईएस के सोशल मीडिया चैनल पर अभी तक इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली गई है। सोशल मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर आईएस से जुड़े ग्रुप में उसके एक समर्थक ने लिखा है कि हमें उम्मीद है कि हमलावर खिलाफत का एक सिपाही होगा। कुछ अन्य लोगों ने मैसेज किया कि ब्रुसेल्स, पैरिस और लंदन में हम स्टेट बनाएंगे। इस यूजर्स का इशारा इस बात की तरफ था कि बेल्जियम के ब्रुसेल्स, फ्रांस के पेरिस और ब्रिटेन के लंदन में इससे पहले आईएस के आतंकी हमले हो चुके हैं। बहरहाल, तमाम विकसित देशों के प्रयासों के बावजूद आईएस का पैर फैलाते जाना चिन्तनीय है। इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

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