दलितों पर अत्याचार और प्रशासनिक असंवेदनशीलता


- राकेश दीक्षित की रिपोर्ट

मध्यप्रदेश की राजधानी से सटे के एक गांव में परिवार के एक बुजुर्ग को जमीन के मसले पर जिंदा जलाने की घटना से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अनेक सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और व्यक्तियों ने जरूरी समझा कि घटना की वास्तविकता और उसका जायजा लिए जाने के साथ घटना से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाए। 30 जून 2018 को 8 सदस्यीय एक स्वतंत्र जांच दल ने घाटखेड़ी और बैरसिया का दौरा किया तथा पीड़ित परिवार के सदस्यों, ग्रामीणों और प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात और बातचीत की। प्रस्तुत है वरिष्ठ पत्रकार राकेश दीक्षित की ओर से प्राप्त रिपोर्ट।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से 70 किलोमीटर दूर घाटखेड़ी 30 जाटव परिवारों का एक छोटा-सा टोला है, जहां का एक बूढ़ा किसान 22 जून को खुद की जमीन जोतने के अधूरे सपने के साथ मौत के मुंह में समा गया। उसे नजदीक के ही परसोरिया गांव के तोरण यादव ने अपने बेटे और 2 भतीजों के साथ मिलकर जिंदा जलाकर मार डाला। 70 साल के किशोरीलाल जाटव अपनी पत्नी के साथ सुबह करीब 9 बजे अपने खेत पर गए तो देखा कि खेत पर तोरण यादव ट्रैक्टर से सोयाबीन की बुवाई कर रहा था जबकि इस पर किशोरीलाल का बाकायदा मालिकाना हक था।
मध्यप्रदेश की पिछली दिग्विजय सिंह सरकार ने अपने दलित एजेंडा के तहत चरनोई की जमीन का बड़ा हिस्सा दलितों को बांटा था। इस योजना से किशोरीलाल को करीब 3.5 एकड़ सरकारी जमीन मिली। घाटखेड़ी टोला में सरकारी जमीन पाने वाले वे अकेले दलित थे बाकी जाटव परिवारों के पास थोड़ी-बहुत जमीन पहले से थी। पर जो जमीन किशोरीलाल को मिली, उस पर तोरण यादव पहले से गैरकानूनी कब्जा जमाए था। वह आसपास की कुछ और सरकारी जमीन पर भी काबिज था। ये सरकारी जमीन उसके मालिकाना हक वाली 18 एकड़ जमीन से लगी हुई थी।
अपनी जमीन पर तोरण को बुवाई करते देख किशोरीलाल भड़क उठे। उन्होंने तोरण को खेत पर ट्रैक्टर चलाने से मना किया। दोनों में तकरार बढ़ी और इतनी बढ़ी कि तोरण ने किशोरीलाल पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। तोरण के बेटे और 2 भतीजों ने किशोरीलाल को हाथों से जकड़ रखा था। उसकी पत्नी ने बीच-बचाव की कोशिश की तो हत्यारों ने उसे बलपूर्वक झटक दिया। सिर्फ 2 मिनट में सारा खेल खत्म हो गया।

किशोरीलाल और तोरण में झगड़ा पहली बार नहीं हुआ था। ये तभी से चल रहा था, जब 2002 में दलित किसान को जमीन का पट्टा मिला था। तोरण धौंस-डपट करके किशोरीलाल को उस जमीन के पास फटकने भी नहीं देता था। हत्या का आरोपी एक प्रभावशाली किसान तो है ही, सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के पिछड़ा वर्ग भोपाल जिला प्रकोष्ठ का पदाधिकारी भी है। अपने प्रभाव के चलते तोरण ने किशोरीलाल की जमीन पर कब्जा बनाए रखा। बीच-बीच में कभी किशोरीलाल अपने खेत में कुछ बोता भी तो फसल पकने पर तोरण का परिवार जबरन उसे काट लेता था। दलित परिवार यादवों की जातिसूचक गाली-गलौज, धमकियों का लगभग आदी-सा हो चला था। ये सिलसिला पिछले 16 साल से चल रहा था।
किशोरीलाल की पत्नी ने हमें बताया कि पिछले 2 सालों से यादवों द्वारा उत्पीड़न बढ़ गया था। तोरण हर हाल में किशोरीलाल की जमीन हथियाना चाहता था। इसकी एक बड़ी वजह यह थी कि इस जमीन से लगी सड़क प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत पक्की बन गई थी। इससे जमीन की कीमत में काफी बढ़ोतरी हुई।

किशोरीलाल ने पिछले साल अपनी जमीन पाने के लिए बैरसिया पुलिस थाने में तोरण के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी, पर उस पर कुछ अमल नहीं हुआ। बाद में उन्होंने भोपाल के अनुसूचित जाति/जनजाति थाने में भी शिकायत की, पर वह भी बेअसर रही। किशोरीलाल के मामले में भी उनकी दर्दनाक मौत के बाद उन्हें मिली जमीन के सीमांकन की प्रक्रिया शुरू हुई है। बैरसिया के उपजिला दंडाधिकारी राजीव नंदन श्रीवास्तव ने हमें बताया कि इस संबंध में एक प्रस्ताव तैयार कर संबंधित अधिकारी को त्वरित अमल के लिए भेज दिया गया है।
अगर एक दलित को जिंदा जलाने जैसी सनसनीखेज वारदात नहीं होती, अगर ये घटना मीडिया में बड़ी सुर्खी नहीं बनती और अगर ये मध्यप्रदेश में चुनावी साल नहीं होता, तो दलितों को मिली जमीन के आधे-अधूरे सीमांकन के मामले रोशनी में नहीं आते। मध्यप्रदेश में चुनाव नजदीक होने की ही वजह से किशोरीलाल की दर्दनाक मौत बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनी है। हत्या के मुख्य आरोपी के सत्ताधारी दल से जुड़े होने के बावजूद शिवराज सिंह सरकार उसे बचाने की कोशिश करते नहीं दिखना चाहती। हत्या के चारों आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। घटना की जांच के लिए एक खास जांच दल गठित किया गया है।
सरकार ने भले ही आरोपियों को कड़ा दंड दिलाने की बात कही हो, भारतीय जनता पार्टी की स्थानीय इकाई के नेता तर्क दे रहे हैं कि तोरण यादव की किशोरीलाल से तकरार जरूर हुई थी, पर दलित बूढ़े ने ही खुद को मिट्टी का तेल डालकर जलाया था। हालांकि मृतक की पत्नी अपने दावे पर पूरी ताकत से कायम है कि आग तोरण ने ही लगाई थी और वो इसकी चश्मदीद गवाह है। उन्होंने ये दावा हमारी टीम के सामने अपने घाटखेड़ी स्थित घर पर वीडियो रिकॉर्डिंग में भी दोहराया।
इसके बाद भी मृतक का परिवार प्रशासन से न्याय मिलने को लेकर सशंकित है। किशोरीलाल के 4 बेटे और 2 बेटियां हैं। चारों बेटे बाहर मजदूरी करते हैं। एक बेटा महेश जबलपुर में मजदूरी करता है। घर में उनकी बहुएं रहती हैं। किशोरीलाल के परिवार की महिलाओं ने हमारी टीम के साथ बातचीत में बार-बार कहा कि हम गरीब हैं और हमें सताने वाले बड़े लोग हैं। सरकार तो बड़े लोगों का साथ देती है। हमारे साथ सरकार होती तो ये दिन ही नहीं देखना पड़ता।
घाटखेड़ी का दौरा करने और अधिकारियों से बात करने के बाद हमारी टीम ने भी महसूस किया कि बैरसिया का प्रशासन इस जघन्य अपराध को लेकर पर्याप्त संवेदनशील नहीं है। प्रशासन ने हत्या के बाद पीड़ित परिवार को पुलिस सुरक्षा देने का आश्वासन दिया था। लेकिन हमें न तो उस खेत पर, जहां हत्या हुई थी, न ही किशोरीलाल के गांव में कोई पुलिस वाला ही दिखाई दिया। जब इस ओर एसडीएम का ध्यान दिलाया गया तो उन्होंने तुरंत पुलिस बल तैनाती का भरोसा दिया। वहां जाकर पता चला कि बिजली के तार भी एक दिन पहले दुरुस्त किए गए थे।
घाटखेड़ी टोला में रहने वाले सारे 30 परिवार जाटवों के हैं। वहां से कुछ दूर परसोरिया गांव है, जहां यादवों का बाहुल्य है। इस टोले में सिर्फ गरीबी दिखती है। स्कूल नहीं है, कोई और सुविधा तो दूर की बात है। टोला का सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा बच्चा राजेन्द्र जाटव है, जो भोपाल में एक हॉस्टल में रहकर 12वीं की पढ़ाई कर रहा है। टोले की लड़कियां लगभग सारी अनपढ़ हैं।

इस स्वतंत्र जांच दल में प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी (दिल्ली), वरिष्ठ पत्रकार राकेश दीक्षित (भोपाल), अखिल भारतीय किसान सभा के राज्य महासचिव प्रहलाद सिंह बैरागी (सीहोर), अखिल भारतीय महिला फेडरेशन मध्यप्रदेश की राज्य सचिव सारिका श्रीवास्तव (इंदौर), आंबेडकर सामाजिक न्याय केंद्र के अजय सहारे (भोपाल), साझा मंच के रघुराज (दिल्ली), छात्र युवा संघर्ष समिति (भोपाल) के मुन्नालाल सिंह चौहान एवं अर्पित शर्मा सम्मिलित थे। (सप्रेस)


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