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रूठे-रूठे पिया मनाऊँ कैसे?
प्यार से मनाएँ रूठे पिया को
गायत्री शर्मा
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पति-पत्नी का रिश्ता एक पवित्र रिश्ता होता है। दोनों के बीच प्यार समझदारी से दांपत्य जीवन की गाड़ी चलती है। जहाँ प्यार हो वहाँ टकरार भी होना स्वाभाविक है। पति-पत्नी में थोड़ी-बहुत नोक-झोंक न हो तो दोनों में कितना प्रेम है इसका भला कैसे पता चलेगा?

रूठना तो महिलाओं की फिदरत ही होती है परंतु जब कभी उनके पियाजी रूठ जाएँ तो उन्हें मनाना भी महिलाओं को बखूबी आता है। पति-पत्नी एक-दूसरे का सहारा होते हैं।

पुरुष सामान्यत: अंतर्मुखी होते हैं लेकिन तनाव जब हद से ज्यादा बढ़ जाता है तब वे चिढ़चिढ़े होकर अपना क्रोध प‍त्नी व बच्चों पर निकालते हैं।

इंकार को इकरार में और गुस्से को प्यार में बदलना भी तो एक कला होती है, जिसमें महिलाएँ पूर्णत: पारंगत होती हैं। उन्हें पता होता है कि परेशानी का हल क्या है। स्वभाव से नम्र और प्यार की मूरत महिलाएँ मुश्किल से मुश्किल परेशानियों का भी चुटकी में हल खोज निकालती हैं।

  इंकार को इकरार में और गुस्से को प्यार में बदलना भी तो एक कला होती है, जिसमें महिलाएँ पूर्णत: पारंगत होती हैं। उन्हें पता होता है कि परेशानी का हल क्या है।      
प्रकृति ने महिलाओं को कई सारी खूबियाँ प्रदान की हैं, जिनमें से एक प्यार है जिससे वे हर किसी का दिल जीत लेती हैं। यही खूबी उनके दांपत्य जीवन को मधुर बनाती है। प्यार एक ऐसा मल्हम है जो वक्त के हर घाव को भर देता है।

* पति की पसंद का ख्‍याल रखें :-
कई बार पुरुष छोटी-छोटी चीजों के लिए रूठ जाते हैं। कई बार खाना उनकी पसंद का नहीं होता, तो कई बार उनके जरूरी कागजात व सामान अव्यवस्थित होते हैं।
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