कवि की कल्पना नारी

नारी एक ऐसा पात्र है जो हर युग में साहित्य सृजन की प्रेरणा बनी है। नारी केवल कोमल और सुडोल काया का ही नाम नहीं बल्कि नारी कोमल कल्पनाओं का भी नाम है। नारी अगर प्रेरणा है तो जीने का सहारा भी।जब भी कभी सौंदर्य वर्णन की बात आती है तो बेशक वह नारी के सौंदर्य के रूप में ही अभिव्यक्त होती है। प्रकृति की सुंदरता को जिस तरह दरकिनार नहीं किया जा सकता है उसी तरह नारी की सुंदरता को भी नकारा नहीं जा सकता। तन और मन की अद्वितीय सुंदरता के कारण ही नारी कभी चित्रकार की कूची में, कभी कवि की लेखनी में, कभी मूर्तिकार के शिल्प में उकेरी/ढलती नजर आती है।नारी में एक ऐसी काबिलियत है जिससे वह हर किसी का दिल जीत लेती है। उसके कोमल हाथों का स्पर्श पाकर हर जड़ चीज भी चेतन हो जाती है। जिंदगी के रंगमंच पर नारी हर किरदार को बखूबी अदा कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाती है। नारी एक ऐसी कविता है जो कवियों को भाव देकर शब्दों को रूप देने का सामर्थ्य रखती है। प्रेम, धैर्य, त्याग, सर्मपण और लज्जा की प्रतिमूर्ति नारी कभी अपनी कोमलता के कारण तो कभी अपने शक्तिस्वरूपा रूप के कारण कवियों की कल्पनाओं में शामिल होती रही है। नारी में वह समझ व सूझबूझ है जिससे वह घर-परिवार के अलावा बाहर भी अपनी एक अलग पहचान कायम करती है। घर-परिवार का मैनेजमेंट हो या ऑफिस मैनेजमेंट कहीं भी नारी का कोई सानी नहीं है। अपनी जिम्मेदारियों के प्रति ईमानदारी नारी की पहचान है। प्रेरणास्रोत के रूप में नारी की भूमिका को सदैव ही स्वीकार किया जाता है। नारी निराशा में आशा का संचार करती है। वह कभी श्रद्धा बनकर जीवन से निराश मनु के मन में नवचेतना भरती है, कभी विद्योत्तमा बनकर मूर्ख कालिदास की प्रेरणा बनती है तो कभी मदर टेरेसा बनकर जन-जन की सेवा का बेड़ा उठाती है। इस तरह के अनगिनत उदाहरण हमारे सामने हैं जब महिला ने पुरुष को जीने का नया ढंग सिखाया। सच में नारी के बगैर पुरुष अधूरा ही है। शिव भी स्त्रीसूचक 'ई' के अभाव में 'शव' बनकर रह जाता है। कठोरता के साथ कोमलता का सामंजस्य ही जिंदगी को खूबसूरत बनाता है। हर युग में नारियों ने नया इतिहास रचकर लोगों को यह सबक दिया है कि हम केवल कमजोर काया का नहीं बल्कि बुलंद हौसलों का नाम है। क्योंकि नारी खूबसूरती में लिपटा लिबास नहीं बल्कि मन की सुंदरता का नाम है। संबंधित जानकारी खोजें
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