बूढ़े को मां की गाली

गालिब को उनके हासिद अक्सर फहश ख़त लिखा करते थे- किसी ने एक ख़त मे गालिब को मां की गाली लिखी। पढ़कर गालिब मुस्कुराए और कहने लगे- उल्लू को गाली देना भी नही आती। बूढ़े या अधेड उम्र के लोगों को बेटी की गाली देते हैं ताकि उसको गैरत आए।

Widgets Magazine

ग़ालिब का ख़त-43

तुम्हारा ख़त रामपुर पहुँचा और रामपुर से दिल्ली आया। मैं 23 शाबान को रामपुर से चला और 30 शाबान को दिल्ली पहुँचा। उसी दिन चाँद हुआ। यक शंबा ...

ग़ालिब का ख़त-42

मेरा हाल सिवाय मेरे ख़ुदा और ख़ुदाबंद के कोई नहीं जानता। आदमी कसरत-ए-ग़म से सौदाई हो जाते हैं, अक़्‍ल जाती रहती है। अगर इस हजूम-ए-ग़म में मेरी ...

ग़ालिब का ख़त-41

पाँच लश्कर का हमला पै दर पै इस शहर पर हुआ। पहला बाग़ियों का लश्कर, उसमें पहले शहर का एतबार लुटा। दूसरा लश्कर ख़ाकियों का, उसमें जान-ओ-माल-नामूस ...

ग़ालिब का ख़त-40

पेंशनदारों का इजराए पेंशन, और अहल-ए-शहर की आबादी मसकन, यहाँ उस सूरत पर नहीं है, जैसी और कहीं है। और जगह सियासत है कि मिंजुमला ज़रूरियात-ए-रियासत ...

ग़ालिब का ख़त-33

मुझ पर इताब क्यों है? न मैं तुम तक आ सकता हूँ, न तुम तशरीफ़ ला सकते हो। सिर्फ़ नामा व पयाम। सो आप ही याद कीजिए कि कितने दिन से आपने अपनी और ...

ग़ालिब का ख़त-39

बहुत दिनों में आपने मुझको याद किया। साल-ए-गुज़श्ता इन दिनों में मैं रामपुर था। मार्च सन् 1860 में यहाँ आ गया हूँ, अब यहीं मैंने आपका ख़त पाया ...

ग़ालिब का ख़त-38

बरखुरदार मुंशी जवाहरसिंह को बाद दुआ़-ए-दवाम उम्र-ओ-दौलत मालूम हो। ख़त तुम्हारा पहुँचा। ख़ैर-ओ-आ़फि़यत तुम्हारी मालूम हुई। क़तए जो तुमको मतलब थे ...

ग़ालिब का ख़त-18

रूठे ही रहोगा या की मनोगे भी? और अगर किसी तरह नहीं मनते हो तो रूठने की वजह तो लिखो। मैं इस तनहाई में सिर्फ़ ख़तों के भरोसे जीता हूँ, यानी जिसका ...

ग़ालिब का ख़त-37

बरख़ुरदार, कामगार, सआ़दत-इक़बाल निशान मुंशी जवाहरसिंह जौहर को बल्लभगढ़ की तहसीलदारी मुबारक हो। 'पीपली' से 'नूह' आए। 'नूह' से 'बल्लभगढ़ गए? अब ...

गालिब का ख़त-36

शुक्र है ख़ुदा का कि तुम्हारी ख़ैर-ओ-आ़फ़ियत मालूम हुई। तुम भी ख़ुदा का शुक्र बजा लाओ कि मेरे यहाँ भी इस वक़्त तक ख़ैरियत है। दोनों लड़के खुश ...

ग़ालिब का ख़त-35

मेंह का यह आलम है कि जिधर देखिए, उधर दरिया है। आफ़ताब का नज़र आना बर्क़ का चमकना है, यानी गाहे दिखाई दे जाता है। शहर में मकान बहुत गिरते हैं। इस ...

ग़ालिब का ख़त-34

लो साहिब! और तमाशा सुनो। आप मुझको समझाते हैं कि तफ़्ता को आजुर्दा न करो। मैं तो उनके ख़त के न आने से डरा था कि कहीं मुझसे आजुर्दा न हों। बारे जब ...

ग़ालिब का ख़त-32

हाय-हाय वह नेक बख़्त न बची। वाक़ई यह कि तुम पर और उसकी सास पर क्या गुज़री होगी। लड़की तो जानती ही न होगी कि मुझ पर क्या गुज़री। लड़का शायद याद ...

ग़ालिब का ख़त-31

जी चाहता है बातें करने को। हक़ तआ़ला अब्दुल सलाम की माँ को श़िफ़ा दे और उसके बच्चों पर रहम करे। यह जो तप और खाँसी मुज़मिन हो जाती है, तो यह ...

ग़ालिब का ख़त-30

परसों शाम को मिर्जा़ यूसुफ़ अली ख़ाँ शहर में पहुँचे और कल मेरे पास आए। बेगम की पर्दानशीन और घर में बहुत लोगों की बीमारी और फिर तुम्हारी उनके हाल ...

ग़ालिब का ख़त- 29

भाई साहिब मैं भी तुम्हारा हमदर्द हो गया, यानी मंगल के दिन 18 रबीअ़ उल अव्वल को शाम के वक़्त वह फूफी की मैंने बचपने से आज तक उसको माँ समझा था और ...

ग़ालिब का ख़त- 28

ग़ुलाम की क्या ताक़त कि आपसे ख़फ़ा हो। आपको मालूम है कि जहाँ आपका ख़त न आया, मैंने शिकवा लिखना शुरू किया। हाँ, यह पूछना चाहिए कि अब के गिला की ...

ग़ालिब का ख़त-27

भाई साहब का इनायतनामा पहुँचा। आपका हाथरस से कोल आ जाना हमको मालूम हो गया था। हमार एक वक़ाए -निगार उस जिले में रहता है। हक़ तआ़ला उसको जीता रखे।

Widgets Magazine

लाइफ स्‍टाइल

भारतीय अमेरिकी चिकित्सक स्वास्थ्य सेवा घोटाले में आरोपी

न्यूयॉर्क। एक भारतीय अमेरिकी चिकित्सक पर गलत दावे भरकर स्वास्थ्य सेवा में कुल 8 लाख अमेरिकी डॉलर का ...

यहां सोने से डरते हैं लोग, पता नहीं कब खुलेगी नींद

अगर कोई काम ना हो तो सबसे मजेदार काम होता है सोना। लोग ऐसा मजाक में भी बोल देते हैं कि सोना इस ...

Widgets Magazine

जरुर पढ़ें

मीठे सेब के 10 चमत्कारी गुण

सेबफल को सीधे ही खाया जा सकता है या फ्रूट सलाद का हिस्सा भी बनाया जा सकता है। इसे नियमित तौर पर ...

अगर आपके बाल तैलीय हैं तो इसे जरूर पढ़ें..

अगर आपके बाल साधारण तौर पर घने हैं पर फिर भी चिपके से लगते हैं तो आपके बाल निश्चित तौर पर ऑइली हैं। ...

हिन्दी साहित्य : कैलाश से सत्य तक

आइए मैं ले चलूं, आपको कैलाश से सत्य तक की यात्रा में, सत्यार्थीजी के साथ। सत्य के शोधार्थी हैं आप, ...