1. न कटी हम से शब जुदाई की कितनी ही ताक़त आज़माई की
रश्क-ए-दुश्मन बहाना था सच है मैं ने ही तुम से बेवफ़ाई की
क्यों बुरा कहते हो भला नासेह मैंने हज़रत से क्या बुराई की
गर न बिगड़ो तो क्या बिगड़ता है मुझ में ताक़त नहीं लड़ाई की
मर गए पर है बेख़बर सय्याद अब तवक़्क़ो नही रिहई की
दिल हुआ ख़ूँ ख़्याल-ए-नाख़ुन-ए-यार तूने अच्छी गिरह कुशाई की
मोमिन आओ तुम्हें भी दिखला दूँ सैर बुतख़ाने में ख़ुदाई की
कठिन शब्दों के अर्थ रश्क-ए-दुश्मन ----दुशमन से जलन नासेह -------नसीहत करने वाला सय्याद -----शिकारी, क़ैद करने वाला तवक़्क़ो-----आशा, उम्मीद ख़्याल-ए-नाख़ुन-ए-यार ---दोस्त के नाख़ुन का ख़्याल
2. ये हालत है तो क्या हासिल बयाँ से कहूँ कुछ और कुछ निकले ज़ुबाँ से
मेरा बचना बुरा है आप ने क्यों अयादत की लब-ए-मोजिज़ बयाँ से
वो आए हैं पशेमाँ लाश पर आप तुझे ऎ ज़िन्दगी लाऊँ कहाँ से
न बिजली जलवा फ़रमा है न सय्याद निकल कर क्या करें हम आशयाँ से
जहाँ से तंगतर जन्नत न होजाए बहुत हसरत भरा जाता हूँ याँ से
ख़ुदा की बेनियाज़ी हाय मोमिन हम ईमाँ लाए थे नाज़-ए-बुताँ से
कठिन शब्दों के अर्थ अयादत करना---बीमार के हाल-चाल पूछना मोज़िज़----इज़्ज़तदार, इज़्ज़तवाला पशेमाँ------शर्मिनदा तंगतर ----ज़्यादा तंग ईमाँ -----ईमान नाज़ेबुताँ -----हसीनों के नाज़-नख़रे |