मुंबई में मातम : इस बार आतंकियों ने मानो हर किसी को चुनौती देते हुई एक साथ मुंबई के कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर हमला बोल कत्लेआम मचा दिया। इस आतंकी हमले में करीब 200 लोगों की जान गई। सुरक्षित समझे जाने वाले पाँच सितारा होटल भी इस बार इन आतंकियों के कहर से बच नहीं सके। मीडिया द्वारा इस घटना के लाइव कवरेज को लेकर भी बहुत विवाद हुआ। 60 घंटे तक चली लड़ाई के बाद आतंकियों से होटल ताज को मुक्त्त कराया जा सका। इस ऑपरेशन में कई सुरक्षाकर्मी भी शहीद हुए।
निशाने पर नेता : आतंकवादी हमलों को रोकने में विफलता, नेताओं की लगातार खराब होती छवि तथा गैरजिम्मेदाराना रुख से जनता के सब्र का बाँध टूट गया। हर ओर उपजे गुस्से और असंतोष के चलते शीर्ष पदों पर आसीन केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख, महाराष्ट्र के गृहमंत्री आरआर पाटिल को अपने पद छोड़ना पड़े।
ओलिंपिक में लाल चीन का दबदबा : इस वर्ष बीजिंग में हुए खेलों के महाकुंभ ओलिंपिक में अमेरिकी दबदबे का पटाक्षेप हो गया। चीन ने अब तक के सबसे भव्य ओलिंपिक का आयोजन कर अमेरिका को खेलों और ओलिंपिक आयोजन में कड़ी टक्कर दी। भारत के राष्ट्रीय खेल हॉकी की दुर्दशा का आलम इस बार यह रहा कि पुरुष टीम इस बार ओलिंपिक खेलों के लिए क्वालिफाई तक नहीं कर सकी।
हॉकी से चोट खाए भारत के लिए यह ओलिंपिक सुनहरी शुरुआत लेकर आया। अभिनव बिंद्रा ने पहले व्यक्तिगत स्वर्ण पदक पर निशाना साधकर भारत के लिए स्वर्ण का खाता खोला। इसके बाद विजेन्दर और सुशील कुमार ने भी काँस्य पदक लेकर भारत को पदक तालिका में पहले के मुकाबले थोड़ा सम्मानजनक स्थान दिलवाया।
धोनी की धूम : भारत के अघोषित राष्ट्रीय खेल क्रिकेट में इस साल भारतीय टीम ने सफलता की नई ऊँचाइयाँ हासिल की हैं। ललित मोदी के सिर पर इंडियन प्रीमियर लीग के सफल आयोजन का सेहरा बँधा और महेन्द्रसिंह धोनी की कप्तानी में 'बॉयज इन ब्लूस' ने विश्व विजेता ऑस्ट्रेलिया को टेस्ट में 2-0 से हराकर नम्बर एक के तख्त की ओर अपने कदम बढ़ा दिए। सचिन तेंडुलकर का सबसे ज्यादा रन बनाकर टेस्ट क्रिकेट का रिकॉर्ड तोड़ना, सौरव गांगुली और अनिल कुंबले का क्रिकेट से संन्यास इस वर्ष की महत्वपूर्ण घटनाएँ रहीं। चाँद पर चमका तिरंगा : इस वर्ष भारत का बहुप्रतीक्षित चंद्रयान मिशन सफल रहा। चंद्रयान को चाँद पर भेजकर अब भारत 6 विकसित देशों के समकक्ष आ खड़ा हुआ है। चाँद पर पहुँचना हर भारतीय के लिए गर्व की बात है, पर सबसे हैरानी और खुशी इस बात की रही कि इस पूरे मिशन में भारत का ब्रेन माने जाने वाले संस्थान आईआईटी का कोई भी विद्यार्थी शामिल नहीं था। स्वदेशी तकनीक से चंद्रदेव की परिक्रमा कर और उस पर उतरकर भारत का झंडा फहराकर इसरो ने भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक गंभीर प्रतिस्पर्धी के तौर पर स्थापित कर दिया है। लोकतंत्र पर कालिख : भारत में यह साल आतंकवाद, कोसी की बाढ़, भुखमरी और संसद में नोटों के बंडल लहराने की घटना को नेताओं के नैतिक पतन के रूप में भी याद किया जाएगा। मुंबई, दिल्ली, जयपुर, बेंगलुरु, अहमदाबाद आदि सभी जगह सालभर धमाके होते रहे और केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल अपनी साज-सज्जा को लेकर ज्यादा संजीदा रहे।
लालफीताशाही के चलते बिहार में कोसी के कहर से लाखों लोग प्रभावित हुए, नेताओं, अधिकारियों और जिला प्रमुखों के आपसी तालमेल के अभाव के चलते नेपाल से अतिरिक्त पानी बहने पर कोई कदम नही उठाया गया और नतीजतन बिहार को कई दशकों की सबसे भयानक बाढ़ का सामना करना पड़ा। बिहार में आई बाढ़ को इसकी भयावहता के कारण राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया गया। उड़ीसा और बुंदेलखंड में हजारों लोगों को अन्न का एक भी दाना नसीब नहीं हुआ और भुखमरी जैसे हालात से कई मौतें हुईं।
सुलगता रहा सिंगूर : देश में इस वर्ष कानून-व्यवस्था बिगड़ी रही। आतंकी हमलों से लेकर नक्सली हिंसा में बढ़ोतरी दर्ज की गई। पश्चिम बंगाल में सिंगूर सुलगता रहा तो उड़ीसा के कंधमाल में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हुई हिंसा में 48 से ज्यादा लोग मारे गए और हजारों लोगों को पलायन करना पड़ा। मध्यम श्रेणी के शहरों में भी साम्प्रदायिक हिंसा और दंगे-फसाद हुए।
क्षेत्रवाद का घिनौना चेहरा : आमची मुंबई को अपनी बपौती मानने वाले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे के इशारे पर महाराष्ट्र में एमएनएस के कार्यकर्ताओं ने उत्तर भारतीयों पर जमकर अत्याचार मचाया, जिसके चलते 2 लोगों की मौत हुई। इस घटना का सबसे दुःखद पहलू तब दिखा जब पटना निवासी एक छात्र राहुल राज ने इसके विरोध में एक बस अगवा की। इसके बाद हुए दुःखद घटनाक्रम में राहुल राज पुलिस की गोली का शिकार हो गया। इस मामले को लेकर उप्र तथा बिहार के नेताओं ने प्रधानमंत्री से मिलकर विरोध दर्ज कराया। इस पूरे मामले पर महाराष्ट्र सरकार दुविधा में दिखी और कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई। नैतिकता पर छिड़ी बहस : आरुषि-हेमराज हत्याकांड की गुत्थी ने एक बार फिर भारतीय शहरी समाज में नैतिकता को लेकर नई बहस छेड़ दी। सीबीआई भी अब तक इस मामले में कोई निष्कर्ष नहीं निकाल पाई है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा टीआरपी बढ़ाने के लिए इस केस में क्या-क्या कहानियाँ नहीं सुनाई गईं, जो सच्चाई से कोसों दूर रहीं और कामकाजी परिवारों में बच्चों पर ध्यान न दे पाने वाला एक मूल मुद्दा पीछे रह गया। |