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विजयशंकर की कविताएँ
विजयशंकर की कविताएँ
05
सितंबर
2008
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आती थीं ऐसी चिट्ठियाँ
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सिर्फ एक बार
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प्रेम हमारा
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किसके नाम है वसीयत
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जन्मस्थान
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देवता हैं तैंतीस करोड़
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माँ की नींद
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बीड़ी सुलगाते पिता
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एलबम
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बाबा की खिड़की से
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संबंधीजन
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खिड़की
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पृथ्वी के लिए तो रूको...
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