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कविता सोलंकी

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हे गौरी के लाल,
देवलोक के तुम सरताज!
सुन ले गणेश मेरी पुकार,
प्रभु कर दे मेरी नैया पार!

रिद्धि-सिद्धि के तुम हो दाता,
दीन दुखियों के भाग्य विधाता!
तुझमें ज्ञान-सागर अपार,
प्रभु कर दे मेरी नैया पार!

सब देवन में प्रथम देव तुम,
मूषक तुम्हारे पास विराजे!
करते पूजन आरती उतार,
प्रभु कर दे मेरी नैया पार!
सौजन्य से - देवपुत्र
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