शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए आप जिम जाते हैं, तो दिमाग को तेज करने के लिए क्यों नहीं? जरूर जाइए लेकिन इसके लिए कोई आम जिम नहीं चलेगा। दिमाग को चाहिए अपना खास जिम। आखिर दिमाग की जरूरतें भी तो अलग हैं! इसी को देखते हुए पश्चिम में करीब 40 वर्ष पहले 'ब्रेन जिम' का चलन शुरू हुआ। जिम का आगमन अब भारत में भी हो चुका है।
ब्रेन जिम का फंडा यह है कि अपने शरीर के विभिन्न अंगों को हिलाओ-डुलाओ लेकिन इस अंदाज में कि इससे मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ जाए। इस फंडे के मुरीदों का दावा है कि इससे न केवल याददाश्त अच्छी होती है बल्कि विभिन्न प्रकार के भय (फोबिया) से छुटकारा मिलता है और तनाव से भी मुक्ति मिल सकती है। अनेक माता-पिता अपने बच्चों की याददाश्त बढ़ाने तथा उन्हें परीक्षाओं का तनाव झेलने की शक्ति देने के इरादे से ब्रेन जिम भेजने लगे हैं। यही नहीं, सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स भी अपनी मानसिक क्षमताओं को बढ़ाने तथा तनाव भगाने के लिए ब्रेन जिम जाने लगे हैं। कॉर्पोरेट जगत में ब़ढ़ती चुनौतियों व तनावों को देखते हुए ब्रेन जिम का आकर्षण बढ़ता जा रहा है।
वैसे विश्व के अनेक मनोविज्ञान विशेषज्ञ तथा न्यूरोलॉजी से जुड़े विद्वान ब्रेन जिम की अवधारणा से असहमति भी जताते आए हैं। इनका कहना है कि इस बात की पुष्टि करने के लिए कोई वैज्ञानिक तथ्य उपलब्ध नहीं है कि ब्रेन जिम में की गई कसरत से दिमागी शक्ति बढ़ती है। ये बताते हैं कि रूटीन से हटकर कोई भी काम करने से मस्तिष्क तरोताजा होता है और उसमें पैनापन भी बढ़ जाता है। कारण यह कि रूटीन काम में हमारे मस्तिष्क का बायाँ हिस्सा सक्रिय होता है जबकि रूटीन से हटकर कुछ करने में दायाँ हिस्सा। कम सक्रिय रहने वाला हिस्सा जब सक्रिय होता है तो तंत्रिका कोशिकाएँ नए सिरे से आपस में जुड़ती हैं और मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ती है। अतः रूटीन से हटकर यदि आप डांस क्लास या कराटे क्लास भी जॉइन कर लें तो आपके मस्तिष्क को लाभ होगा।
|