महाभारत का युद्ध समाप्त होने के बाद की 14 रोमांचक घटनाएं

के बाद का इतिहास सभी जानना चाहते हैं। कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद पांडव, कृष्ण और बचे हुए योद्धाओं का क्या हुआ? धृतराष्ट्र, गांधारी, विदुर, संजय, युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव, भीम और भगवान कृष्ण की मृत्यु कैसे हुई? भारत का इतिहास और समाज उस काल में किस हाल में था। क्या यदुवंश का नाश हो गया था? तो आओ इसी संबंध में जानते हैं 14 प्रमुख रोमांचक घटनाएं।

1) युद्ध के 18वें अर्थात अंतिम दिन दुर्योधन ने रात्रि में उल्लू और कौवे की सलाह पर अश्वत्थामा को सेनापति बनाया था। उस एक रात्रि में ही अश्वत्थामा ने पांडवों की बची लाखों सेनाओं, पुत्रों और गर्भ में पल रहे पांडवों के पुत्रों तक को मौत के घाट उतार दिया था। द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्‍थामा के द्वारा किए गए नरसंहार के बाद युद्ध समाप्त हो गया था।


2) युद्ध के बाद दुर्योधन कहीं जाकर छुप गया था। पांडवों ने उसे खोज लिया तब भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध हुआ। इस युद्ध को देखने के लिए बलराम भी उपस्थित थे। भीम कई प्रकार के यत्न करने पर भी दुर्योधन का वध नहीं कर पा रहे थे, क्योंकि दुर्योधन का शरीर वज्र के समान कठोर था। ऐसे समय श्रीकृष्ण ने अपनी जंघा ठोककर भीम को संकेत दिया जिसे भीम ने समझ लिया। तब भीम ने दुर्योधन की जंघा पर प्रहार किया और अंत में उसकी जंघा उखाड़कर फेंक दी। बाद में दुर्योधन की मृत्यु हो गई।
3) अश्‍वत्थामा ने जब द्रौपदी के पुत्रों का उनकी निद्रावस्था में वध कर दिया तो द्रौपदी खूब विलाप करने लगी। यह देख भीम से रहा नहीं गया और वे अश्‍वत्‍थामा को पकड़ने के लिए रथ पर सवार होकर चल देते हैं। भीम के पीछे श्रीकृष्ण भी अर्जुन के साथ अपने रथ पर सवार होकर चल पड़े। सभी ने गंगा के तट पर अश्वत्‍थामा को ढूंढ लिया। द्रोणपुत्र अश्वत्‍थामा यह देखकर डर गया और उसने तुरंत ही अपने दिव्य अस्त्र ब्रह्मास्त्र का संकल्प किया और उस प्रचंड अस्त्र को पांडवों की वध की इच्‍छा से छोड़ दिया। यह देख अर्जुन ने भी संकल्प लिया कि इस ब्रह्मास्त्र से शत्रु का ब्रह्मास्त्र शांत हो जाए, ऐसा कहकर अर्जुन ने भी ब्रह्मास्त्र छोड़ दिया। दोनों के अस्त्रों से प्रचंड अग्नि का जन्म हुआ। यह देख वहां वेद व्यास और देवर्षि नारद प्रकट हुए और उन्होंने कहा कि इन दोनों अस्त्रों से धरती का विनाश हो जाएगा। आप इन्हें वापस ले लें। ऐसे में अर्जुन ने तो अपना अस्त्र वापस ले लिया लेकिन अश्‍वत्थामा इसे वापस लेने में सक्षम नहीं था। ऐसे में वह उस अस्त्र को उत्तरा के गर्भ पर उतार देता है।


4) अश्वत्थामा द्वारा उत्तरा के गर्भ पर अस्त्र छोड़ देने के बाद श्रीकृष्ण उत्तरा के बच्चे को बाद में पुन: जीवित कर देते हैं। इस बीच अश्‍वत्थामा के इस अपराध के लिए श्रीकृष्ण उसे 3,000 वर्षों तक कोढ़ी के रूप में रहकर भटकने का शाप दे देते हैं। उनके इस शाप का वेद व्यासजी ने अनुमोदन किया था। शिव महापुराण (शतरुद्रसंहिता-37) के अनुसार अश्वत्थामा आज भी जीवित हैं और वे गंगा किनारे निवास करते हैं किंतु उनका निवास कहां है, यह नहीं बताया गया है। तब अश्वत्‍थामा पांडवों को अपनी मणि देकर वन में चला जाता है। वह मणि भीमसेना युधिष्ठिर की आज्ञा से द्रौपदी को दे देते हैं। द्रौपदी वह मणि युधिष्ठिर को देकर अश्‍वत्‍थामा को क्षमा कर देती है।


5) युद्ध के बाद युधिष्ठिर ने युद्धभूमि पर ही सभी मृत योद्धाओं का विधिवत रूप से दाह-संस्कार किया। महाभारत के स्त्री पर्व के अनुसार युद्ध समाप्त होने के बाद युधिष्ठिर के कहने पर पांडवों ने ही दोनों पक्षों के मरे हुए योद्धाओं का अंतिम संस्कार किया था।

6) भीष्म यद्यपि शरशैया पर पड़े हुए थे फिर भी उन्होंने श्रीकृष्ण के कहने से युद्ध के बाद युधिष्ठिर का शोक दूर करने के लिए राजधर्म, मोक्षधर्म और आपद्धर्म आदि का मूल्यवान उपदेश बड़े विस्तार के साथ दिया। प्रतिदिन दिए गए इस उपदेश को सुनने से युधिष्ठिर के मन से ग्लानि और पश्‍चाताप दूर हो जाता है।

7) बाद में सूर्य के उत्तरायण होने पर युधिष्ठिर आदि सगे-संबंधी, पुरोहित और अन्यान्य लोग भीष्म के पास पहुंचते हैं। उन सबसे भीष्म पितामह ने कहा कि इस शरशैया पर मुझे 58 दिन हो गए हैं। मेरे भाग्य से माघ महीने का शुक्ल पक्ष आ गया। अब मैं शरीर त्यागना चाहता हूं। इसके पश्चात उन्होंने सब लोगों से प्रेमपूर्वक विदा मांगकर शरीर त्याग दिया। सभी लोग भीष्म को याद कर रोने लगे। युधिष्ठिर तथा पांडवों ने पितामह के शरबिद्ध शव को चंदन की चिता पर रखा तथा दाह-संस्कार किया।


8) भीष्म पितामह के अंतिम संस्कार के बाद युधिष्ठिर के राज्याभिषेक की तैयारी होती है। महाभारत शांति पर्व के 'राजधर्मानुशासन पर्व' में इस राज्याभिषेक का वर्णन मिलता है। इस राज्याभिषेक में पांडु पुत्र भीम, अर्जुन, नकुल सहदेव के अलावा श्री‍कृष्ण, विदुर, धृतराष्ट्र, गांधारी, द्रौपदी, कुंती आदि सभी सम्मिलित होते हैं। इस राज्याभिषेक में देश और विदेश के कई राजाओं को आमंत्रित किया जाता है और भव्य आयोजन के बीच युधिष्ठिर का राज्याभिषेक होता है।



9) युद्ध के 15 वर्ष बाद धृतराष्ट्र, गांधारी, संजय और कुंती वन में चले जाते हैं। एक दिन धृतराष्ट्र गंगा में स्नान करने के लिए जाते हैं और उनके जाते ही जंगल में आग लग जाती है। वे सभी धृतराष्ट्र के पास आते हैं। संजय उन सभी को जंगल से चलने के लिए कहते हैं, लेकिन धृतराष्ट्र वहां से नहीं जाते हैं, गांधारी और कुंती भी नहीं जाती है। जब संजय अकेले ही उन्हें जंगल में छोड़ चले जाते हैं, तब तीनों लोग आग में झुलसकर मर जाते हैं। संजय उन्हें छोड़कर हिमालय की ओर प्रस्थान करते हैं, जहां वे एक संन्यासी की तरह रहते हैं। एक साल बार नारद मुनि युधिष्ठिर को यह दुखद समाचार देते हैं। युधिष्ठिर वहां जाकर उनकी आत्मशांति के लिए धार्मिक कार्य करते हैं।



10) एक दिन पांचों पांडव विदुर से मिलने आए। विदुर ने युधिष्ठिर को देखते ही अपने प्राण छोड़ दिए और वे युधिष्ठिर में समा गए। यह देखकर युधिष्ठिर को समझ में नहीं आया कि यह क्या हुआ? ऐसे में उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान किया। श्रीकृष्ण प्रकट हुए और उन्होंने कहा कि विदुर भी धर्मराज के अंश थे अत: वे तुम में समा गए, लेकिन अब मैं विदुर की इच्‍छानुसार दिया गया अपना वचन पूरा करूंगा। यह कहकर श्रीकृष्ण ने विदुर की इच्छानुसार उनके शरीर को सुदर्शन चक्र में बदलकर उस सुदर्शन चक्र को वहीं स्थापित कर दिया।

11) महाभारत युद्ध के बाद जब 36वां वर्ष प्रारंभ हुआ तो श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब के कारण मोसुल का युद्ध हुआ जिसमें सभी यदुवंशी आपस में ही लड़कर मारे गए। साम्‍ब, चारुदेष्‍ण, प्रद्युम्‍न और अनिरुद्ध की मृत्‍यु हो गई। बस श्रीकृष्ण का एक पौत्र बचा था जिसका नाम वज्र था। बलराम ने द्वारिका के समुद्र के किनारे जाकर समाधि ले ली थी।

12) मोसुल के युद्ध के बाद प्रभाष क्षेत्र में एक वृक्ष के नीचे श्रीकृष्ण लेटे हुए थे तभी एक भील ने उन्हें हिरण समझकर बाण मार दिया। यह बाण उनके पैरों में आकर लगा। इस बाण से उनकी मृत्यु हो गई। अर्जुन को जब यह समाचार मिला तो वे द्वारिका पहुंचे और शोक व्यक्त किया।

13) श्रीकृष्ण के स्वर्गवास के बाद द्वारिका नगरी समुद्र में डूबने लगी। यह देख अर्जुन ने सभी यदुवंशी नारियों और कृष्ण के पौत्र को लेकर हस्तिनापुर के लिए कूच कर दिया। हजारों महिलाओं और द्वारिकावासियों के साथ उन्होंने पंचनद देश में पड़ाव डाला, जहां लुटेरों ने खूब लूटपाट की और सुंदर महिलाओं का अपहरण कर लिया। बहुत मुश्किल से अर्जुन, व्रज और कुछ नगरवासी इन्द्रप्रस्थ पहुंचे। अर्जुन ने व्रज को इन्द्रप्रस्थ का राजा बना दिया।

14) अर्जुन हस्तिनापुर जाकर महाराज युधिष्ठिर को सारा वृत्तांत सुनाते हैं। बाद में पांचों पांडव सशरीर स्वर्ग जाने की इच्छा से परीक्षित को राजपाट सौंपकर द्रौपदी के साथ स्वर्ग की यात्रा पर निकल पड़ते हैं। यात्रा के कठिन मार्ग में सबसे पहले द्रौपदी की, फिर नकुल और सहदेव की मृत्यु हो जाती है। बाद में अर्जुन भी गिर पड़ते हैं। अर्जुन के बाद भीम भी साथ छोड़ देते हैं। मार्ग में एक जगह इन्द्र खुद युधिष्ठिर को स्वर्ग ले जाने के लिए उपस्थित होते हैं। इन्द्र युधिष्ठिर को लेकर स्वर्ग चले जाते हैं।

संदर्भ : महाभारत



और भी पढ़ें :

मां पार्वती का पावन चालीसा...

मां पार्वती का पावन चालीसा...
पढ़ें आदिशक्ति मां पार्वतीजी की प्रिय चालीसा। हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार दुर्गा, ...

कृष्ण, द्रौपदी और कर्ण के शरीर में थी ये समानता, जानिए ...

कृष्ण, द्रौपदी और कर्ण के शरीर में थी ये समानता, जानिए तीनों के बीच का रहस्य
महाभारत में कुं‍ती पुत्र युधिष्ठिर, अर्जुन और भीम एवं माद्री पुत्र नकुल और सहदेव की पत्नी ...

श्रावण मास में जपें 3 कृष्ण मंत्र और 3 शिव मंत्र, हर तरह के ...

श्रावण मास में जपें 3 कृष्ण मंत्र और 3 शिव मंत्र, हर तरह के संकट का होगा अंत
आप श्रावण माह में निम्न मंत्र की श्रावण शुक्ल पक्ष अष्टमी से श्रावण की पूर्णिमा तक 1 माला ...

एकलव्य का पुत्र लड़ा था महाभारत में और इनके हाथों मारा गया

एकलव्य का पुत्र लड़ा था महाभारत में और इनके हाथों मारा गया
एकलव्य को कुछ लोग शिकारी का पुत्र कहते हैं और कुछ लोग भील का पुत्र। कुछ लोग यह कहकर ...

कालसर्प योग से पीड़ित हैं तो नागपंचमी के दिन करें श्री ...

कालसर्प योग से पीड़ित हैं तो नागपंचमी के दिन करें श्री सर्पसूक्त का पाठ, मिलेगी परेशानियों से मुक्ति...
जिस जातक की कुंडली में कालसर्प योग, पितृ दोष होता है उसका जीवन अत्यंत कष्टदायी होता है। ...

घर की कौनसी दिशा बदल सकती है आपकी दशा, जानिए वास्तु के ...

घर की कौनसी दिशा बदल सकती है आपकी दशा, जानिए वास्तु के अनुसार
चारों दिशाओं से सुख-संपत्ति और सम्मान पाना है तो जानें वास्तु के अनुसार कैसी हो भवन की ...

समस्त पापों से मुक्ति देता है शिव महिम्न स्तोत्र, श्रावण ...

समस्त पापों से मुक्ति देता है शिव महिम्न स्तोत्र, श्रावण में अवश्य पढ़ें... (हिन्दी अर्थसहित)
श्रावण मास के विशेष संयोग पर भगवान शिव को पुष्पदंत द्वारा रचित शिव महिम्न स्तोत्र से ...

15 अगस्त 2018 का राशिफल और उपाय...

15 अगस्त 2018 का राशिफल और उपाय...
संपत्ति के कार्य लाभ देंगे। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। ...

15 अगस्त 2018 : आपका जन्मदिन

15 अगस्त 2018 : आपका जन्मदिन
दिनांक 15 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 6 होगा। इस अंक से प्रभावित व्यक्ति आकर्षक, विनोदी, ...

15 अगस्त 2018 के शुभ मुहूर्त

15 अगस्त 2018 के शुभ मुहूर्त
शुभ विक्रम संवत- 2075, अयन- दक्षिणायन, मास- श्रावण, पक्ष- शुक्ल, हिजरी सन्- 1439, मु. ...

राशिफल