तद्‍भव

अंक 18,जुलाई 2008

WDWD
संपादक : अखिलेश
संपर्क : 18 /201,इंदिरा नगर, लखनऊ- 226016
उत्तर प्रदेश ,फोन : 0522- 2345301


इतिहास
सुधीर चंद्र : और अहिंसा की असहायता

शताब्दी
शकील सिद्‍दीकी : मोहब्बत के अवामी सरोकार


चारु गुप्ता : औपनिवेशिक उत्तर भारत में घरेलू क्षेत्र, हिन्दू पहचान और स्त्री यौनिकता

कहानियाँ
गीतांजलि श्री : चकरघिन्नी
योगेंद्र आहूजा : खाना
कुणाल सिंह : इतवार नहीं
मनोज कुमार पाण्डेय : सोने का सुअर

विशेष
नामवर सिंह और राजेंद्र यादव के बीच बातचीत
जिसे तुम सपना कहते हो उसे मैं विकल्प कहता हूँ

लंबी कविता
राजेंद्र कुमार : आईना द्रोह

कविताएँ
बद्री नारायण : चार कविताएँ
अनामिका : तीन कविताएँ
सविता सिंह : पाँच कविताएँ
कुमार अनुपम : पाँच कविताएँ
जाकिर खान : दो कविताएँ

बहस
सुरेंद्र मोहन : सहयात्री की टिप्पणी
राधे दुबे : तौलिए उपयोगिता के तराजू पर
रामशरण जोशी : 'यादों से रची यात्रा' के साथ सहयात्रा

आत्मकथा
डॉ. तुलसी राम : मुर्दहिया

वृत्तांत
राजेश जोशी : किस्से ऊपर किस्सा

लंबी कहानी
नीलाक्षी सिंह : ऐसा ही... कुछ भी

समीक्षाएँ
विश्वनाथ प्रसाद तिवारी : जीवन के नैरंतर्य का साक्षात्कार
ए.अरविन्दाक्षन : शब्दों के बीच एक सूखा अश्रु
अजय वर्मा : संकटग्रस्त समय का प्रतिरोध
परमानंद श्रीवास्तव : स्मृति, इतिहास और आख्यान
शम्भु गुप्त : यथार्थ के आगे बेबस लेखक
विजय बहादुर सिंह : आत्मा की शल्यक्रिया
प्रीति चौधरी : घर के मायने
प्रियम अंकित : कहानी के नए देश में
राजकुमार : कबीर और आधुनिकता की भारतीय परिकल्पना
अरुणेश शुक्ल : इतिहास की साझा समझ की जरूरत

WD|
मूल्य : 50 रुपए

Widgets Magazine
वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।



और भी पढ़ें :