छवियों को गढ़ने का काम करते हैं पत्रकार : कर्णिक

उज्जैन| पुनः संशोधित रविवार, 21 मई 2017 (20:38 IST)
उज्जैन। 'पत्रकार छवियों को गढ़ने का काम करते हैं। समाज में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पक्ष सामने आते हैं। जरूरत इस बात की है कि समाज को किससे क्या मिल सकता है..? उसी दिशा में पत्रकार के कदम चलें तो परिणाम
सकारात्मक आते हैं।' यह बात विश्व के पहले हिन्दी न्यूज वेब पोर्टल वेबदुनिया डॉट कॉम के संपादक ने रविवार
को स्थित बाबा साहब नातू ध्यान एवं योग केंद्र में महर्षि नारद जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित एक समारोह में कही।

सोसायटी फॉर प्रेस क्लब एवं विश्व संवाद केंद्र की नगर इकाई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में
कर्णिक ने कहा कि आज मीडिया एक अलग ही दिशा में भाग रहा है। पत्रकारिता के जुनून को कैसे कायम रखा जाए, यह एक
चुनौती है जो पत्रकारों के सामने खड़ी है। एक ओर पत्रकार की कलम कहीं न कहीं अंकुश लगने के कारण रुकती है, वहीं दूसरीओर मीडिया हाउस व्यवसायियों के हाथों में जाते जा रहे हैं। फिर भी पत्रकार दबाव और झुकाव को नकारते हुए अपनी
कलम चला रहे हैं तथा समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को कायम रखे हुए हैं। पत्रकारिता की दुनिया संघर्षमय है। पत्रकार घर
से जब निकलता है तो उसे पता नहीं रहता है कि वह वापस कब घर लौटेगा। उसका परिवार उसके लिए होता है लेकिन वह
अपने परिवार को समय नहीं देने का कष्ट मन में ही भोगता है, कह नहीं पाता।
कर्णिक ने कहा कि समाज के प्रति पत्रकार के इस योगदान का मूल्यांकन समाज उस रूप में नहीं कर पाता। पत्रकार को
जीवनयापन जितना पारिश्रमिक मिलना चाहिए, यह अपेक्षा उसकी अपने मालिक से होती है। यह भी कड़वा सच है कि मालिक
उसे लिए गए काम के बदले उतना पैसा नहीं देते हैं, जिससे घर चल सके। ऐसी स्थिति में पत्रकार के समक्ष जीविकोपार्जन के
अन्य रास्तों पर चलना मजबूरी हो जाता है। सच तो यह है कि पत्रकार जीविकोपार्जन के लिए नेक रास्ते पर ही चलता है। फर्क इतना है कि कुछ लोगों के गलत रास्तों पर जाने को सभी के लिए समझ लिया जाता है।

कर्णिक ने कहा कि समाज को पत्रकारों को ऐसी दृष्टि से देखने से पूर्व तुलनात्मक मूल्यांकन करना होगा। जो गलत लोग हैं, वे
समूह बनाकर काम करते हैं ताकि अपने दुश्मनों से समूह के बीच रहकर बचाव कर सकें। सच्चा पत्रकार हमेशा अकेला रहता है
और उसे इस बात की चिंता नहीं रहती कि आधी रात को घर जाते वक्त उस पर कोई हमला कर देगा। यह इसलिए होता क्योंकि न तो उसने किसी की जमीन दबाई है और न ही उसने किसी का जमीर तोड़ा है। यह फर्क पत्रकार की कलम से निकले समाचार
में भी देखने को मिलता है। सही पत्रकारिता वही है, जिसमें समाचार न तो किसी के झुकाव में लिखा हो और न ही दबाव में।
जो देखा उसे पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करना ही पत्रकारिता है।

कर्णिक ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए देवर्षि नारद द्वारा उस जमाने में संवाददाता की भूमिका को निभाने के उदाहरण भी रखे। उन्होंने कहा कि त्रेता-द्वापर और सतयुग में नारदजी सक्रिय रहे। उनकी पहुंच देवलोक, असुर लोक और मृत्युलोक तक थी।
पत्रकार को भी अपने जीवनकाल में सभी प्रकार के लोगों के बीच समाचार के लिए जाना पड़ता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा
कि ओसामा बिन लादेन और दाउद का साक्षात्कार यदि कोई पत्रकार लेता है तो उसके पीछे सोच यह रहती है कि वे समाज के
प्रति क्या सोचते हैं। यह बात समाचार के रूप में समाज तक जाए। ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि संबंधित पत्रकार गलत लोगों से मिला हुआ है और उनकी बात रख रहा है।

कर्णिक ने कहा कि आज भारत में पत्रकारिता के मायने बदल गए हैं। मीडिया हाउस व्यवसायियों ने खरीद लिए हैं। वे कलम को
अपने अनुसार चलने पर मजबूर करते हैं। आजादी के पूर्व भारत में पत्रकारों का मूल उद्देश्य राष्ट्रभक्ति था। आजादी के बाद
पत्रकारों ने देश के नेतृत्व को विभिन्न दिशाएं अपने आलेखों के माध्यम से दीं। अब वह समय निकल गया। अब सोशल मीडिया हमारे सामने है। सोशल मीडिया के माध्यम से हर व्यक्ति अपनी अभिव्यक्ति दे रहा है। ऐसे में आने वाला समय अभिव्यक्ति
की पूर्ण आजादी के रूप में सोशल मीडिया पर देखने को मिलेगा। कर्णिक ने कहा कि पत्रकारिता के नए आयाम आने वाले समय
में देश की दशा और दशा बदलने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रेस क्लब अध्यक्ष विशाल सिंह हाड़ा ने कहा कि आज की पत्रकारिता अधिक ज्वलंत होकर समाज के सामने विभिन्न दृष्टिकोण के रूप में आ रही है। समाज में व्याप्त समस्या हो या भ्रष्टाचार या फिर समाज हित के कार्य, इन
सभी को पत्रकार समाज के दृष्टिकोण से समाज के बीच रखकर अलख जगा रहे हैं। कार्यक्रम में पत्रकारों ने कर्णिक से प्रश्न किए और जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार सुनील जैन ने कहा कि अब प्रिंट मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बाद वेब पोर्टल भी पत्रकारिता के नए आयाम के रूप में समाज के बीच पहुंच गए हैं। अब पत्रकारों को सोशल मीडिया पर भी ध्यान देना होगा, ताकि
पत्रकारिता समग्रता प्राप्त कर ले। कार्यक्रम के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन जयदीप कर्णिक, सुनील जैन, विशाल सिंह हाड़ा, डॉ.
रत्नदीप निगम, ललित ज्वेल, शैलेष त्रिपाठी ने किया। संचालन दीपक उपाध्याय ने किया। आभार ललित ज्वेल ने माना।

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