है किसकी तस्वीर

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- डॉ. जगदीश व्योम

सोचो और बताओ,
आखिर है किसकी तस्वीर?

नंगा बदन, कमर पर धोती
और हाथ में लाठी
बूढ़ी आँखों पर है ऐनक
कसी हुई कद-काठी
लटक रही है बीच कमर पर
घड़ी बँधी जंजीर।
सोचो और बताओ,
आखिर है किसकी तस्वीर?

उनको चलता हुआ देखकरआँधी शरमाती थी
उन्हें देखकर अँग्रेजों की
नानी मर जाती थी
उनकी बात हुआ करती थी
पत्थर की लकीर।
सोचो और बताओ,
आखिर है किसकी तस्वीर?

वह आश्रम में बैठ
चलाता था पहरों तक तकली
दीनों और गरीबों का था वह शुभचिंतक असली
मन का था वह बादशाह,
पर पहुँचा हुआ फकीर।
सोचो और बताओ,
आखिर है किसकी तस्वीर?

सत्य अहिंसा के पालन में
पूरी उमर बिताई
सत्याग्रह कर करके
जिसने आजादी दिलवाई
सत्य बोलता रहा जनम भरऐसा था वह वीर
सोचो और बताओ,
आखिर है किसकी तस्वीर?

जो अपनी ही प्रिय बकरी का
दूध पिया करता था
लाठी, डंडे, बंदूकों से
जो न कभी डरता था
दो अक्टूबर के दिन
जिसने धारण किया शरीर।
सोचो और बताओ, आखिर है किसकी तस्वीर?

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