जर्मन सेना को क्यों चाहिए इस्राएली ड्रोन

पुनः संशोधित शुक्रवार, 1 जून 2018 (15:35 IST)
सांकेतिक चित्र जर्मन सेना अपने बेड़े में इस्राएली हैरोन टीपी ड्रोन विमानों को शामिल करने का इरादा कर चुकी है. पहली बार बुंडेसवेयर के पास हथियार ले जाने में सक्षम ड्रोन होंगे। लेकिन उसे इनकी जरूरत क्या है?

जर्मन सेना लंबे समय से हथियार ले जाने में सक्षम ड्रोन हासिल करना चाहती थी. लगता है अब उसकी यह इच्छा पूरी होने जा रही है। इसके लिए रकम मुहैया कराने के लिए चांसलर अंगेला मैर्केल की सरकार को लगभग राजी कर लिया गया है।


जर्मन अखबार ज्यूडडॉयचे साइटुंग को मिली लीक जानकारी के मुताबिक जर्मन सेना ने सरकार से 90 करोड़ यूरो मांगे हैं ताकि वह अगले नौ साल के लिए इस्राएल से पांच हैरोन टीपी ड्रोन लीज पर ले सके. अभी जर्मन सेना निगरानी के लिए हैरोन 1 ड्रोन इस्तेमाल करती है। हैरोन टीपी ड्रोन इससे ज्यादा सक्षम और आधुनिक हैं। जिन हथियारों को हैरोन टीपी ले जाने में सक्षम हैं, वे इस डील का हिस्सा नहीं होंगे।


हैरोन टीपी मानव रहित विमानों की हैरोन श्रृंखला में अत्याधुनिक ड्रोन विमान हैं जिन्हें इस्राएल की सरकारी कंपनी इस्राएल एयरोस्पेस इंडस्ट्री (आईएआई) ने तैयार किया है। 14 मीटर लंबे और 26 मीटर चौड़े ये विमान लगातार 36 घंटे की उड़ान भरने में सक्षम हैं और ये 12,500 फुट की ऊंचाई तक जा सकते हैं। इनमें 1,200 हॉर्सपावर का इंजन लगा है।


यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (ईसीएफआर) में ड्रोन मामलों की विशेषज्ञ उलरिके फ्रांके का कहना है, "क्षमता के मामले में यह ड्रोन प्रीडेटर या रीपर ड्रोनों के बराबर है, जिनका इस्तेमाल अमेरिका करता है।" उनके मुताबिक, "लेकिन प्रीडेटर ड्रोन इसके मुकाबले पुराने हैं और जर्मन इंजीनियर उनकी आलोचना करते हैं क्योंकि उनका सिस्टम उतना अत्याधुनिक नहीं है।"

दुनिया में कई देशों की सेनाएं और पुलिस हैरोन ड्रोनों का इस्तेमाल कर रही हैं जिनमें भारत, ब्राजील, कनाडा, ग्रीस, तुर्की और अमेरिकी नौसेना शामिल हैं।


हैरोन टीपी ड्रोन हथियार ले जाने में सक्षम हैं, इसीलिए जर्मन सेना कई साल से उन्हें अपने बेड़े में शामिल करना चाहती थी. हालांकि सरकार की तरफ से इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि किस तरह की मिसाइलों से इन ड्रोन विमानों को लैस किया जाएगा।

निगरानी और टोह लेने की जर्मन सेना की जरूरतों को हैरोन 1 बखूबी पूरी करता है, तो फिर हैरोन टीपी ड्रोनों की क्या जरूरत है? फ्रांके का कहना है कि ड्रोन पायलटों की लंबे समय से शिकायत रही है कि जमीन पर मौजूद सैनिकों पर हमला होने की स्थिति में वे उन्हें बचाने में सक्षम नहीं हैं।


वह बताती हैं, "मैंने कई जर्मन हैरोन 1 के पायलटों से बात की है और उन्होंने बताया कि वे कितने हताश होते हैं जब वे जमीन पर मौजूद सैनिकों के ऊपर हवा में होते हैं, तो उन्हें बता रहे होते हैं कि क्या हो रहा है, लेकिन जब इन सैनिकों पर हमला होता है तो वे सिर्फ इतना ही बताने की स्थिति में होते हैं कि उन पर हमला कहां से हुआ है।"

उन्होंने डॉ़यचे वेले से बातचीत में कहा, "मुझे उम्मीद है कि अमेरिका की तरह जर्मन सेना इन ड्रोनों का इस्तेमाल आधिकारिक युद्धक्षेत्र से बाहर टारगेट किलिंग के लिए नहीं करेगी।"


फिलहाल जर्मन सेना माली और अफगानिस्तान में इन ड्रोनों का इस्तेमाल कर सकती है जहां उसके सैनिक तैनात हैं. एक सवाल यह भी है कि एक हैरोन टीपी ड्रोन की कीमत एक करोड़ यूरो है तो फिर इनके लिए 90 करोड़ यूरो किसलिए चाहिए?

मार्च में आई जर्मन रक्षा मंत्रालय की एक रिपोर्ट कहती है कि 72 करोड़ यूरो में से ज्यादातर रकम हैरोन टीपी विमानों को जर्मन जरूरतों के मुताबिक ढालने, निश्चित उड़ान घंटों के लिए विमानों को लीज पर लेने, ट्रेनिंग और दूसरी सेवाओं पर खर्च की जाएगी। बाकी 18 करोड़ की रकम जर्मन सेना और इस्राएल के बीच अन्य डीलों पर खर्च होगी।


इस बीच जर्मन सरकार को यह भी चिंता है कि इस्राएल से अत्याधुनिक ड्रोनों को लीज पर लेने के कारण उसे आलोचना का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि ड्रोन हमलों में आम लोगों की मौतों को लेकर दुनिया में अमेरिका की खूब बदनामी होती रही है।

चांसलर मैर्केल की सीडीयू और एसपीडी पार्टी के बीच के पिछले दो गठबंधन समझौतों में कहा गया है कि सरकार ड्रोन समेत अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हुए होने वाले मौतों को खारिज करती है. यही वजह है कि पिछली सरकार में एसपीडी ने ऐन वक्त पर हैरोन टीपी से जुड़े प्रस्ताव को रोक दिया था।


इस बीच जर्मन रक्षा मंत्रालय ड्रोनों के इस्तेमाल को बढ़ाना चाहता है। अप्रैल में जर्मन रक्षा मंत्री उर्सुला फॉन डेय लाएन ने फ्रांस और यूरोपीय साझीदारों के साथ मिल कर ड्रोन और नए सैन्य विमान विकसित करने की योजना पेश की है।

रिपोर्ट बेन नाइट


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