'जियो' से उपभोक्ताओं को हुई 10 अरब डॉलर की वार्षिक बचत

पुनः संशोधित शुक्रवार, 6 अप्रैल 2018 (19:32 IST)
नई दिल्ली। रिलायंस जियो के सितंबर, 2016 में भारतीय बाजार में उतरने और कम दामों पर सेवाएं देने से उपभोक्ताओं को सालाना 10 अरब डॉलर की बचत हुई है। यही नहीं इससे देश का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 5.65 प्रतिशत बढ़ा है। एक रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है।

जियो ने डेटा को सस्ता और लोगों की पहुंच में लाने में भूमिका निभाई है। प्रति जीबी डेटा की औसत कीमत इससे 152 रुपए से घटकर 10 रुपए पर आ गई। इससे देश की बड़ी आबादी तक इंटरनेट की पहुंच सुलभ हुई। डेटा कीमतों में इतनी भारी गिरावट से समाज के नए वर्ग ने भी पहली बार इसका अनुभव लिया। जियो मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली का दूरसंचार उपक्रम है।

इंस्टिट्यूट ऑफ कम्पेटिटिवनेस (आईएफसी) की रिपोर्ट में कहा गया है, हमारी गणना के अनुसार, अगर बहुत कम कर भी आकलन किया जाए, जियो के प्रवेश से उपभाक्ताओं को सालाना 10 अरब डॉलर की बचत हुई है। इसमें कहा गया है कि अर्थमितीय विश्लेषण से पता चलता है कि यदि अन्य चीजें स्थिर रहती हैं, तो व्यापक नेटवर्क की वजह से जियो के प्रवेश ने देश के सकल घरेलू उत्पाद में 5.65 प्रतिशत का योगदान दिया है।

इंटरनेट पहुंच बढ़ने से जीडीपी वृद्धि का प्रभाव सिर्फ दूरसंचार क्षेत्र में योगदान तक सीमित नहीं है, बल्कि इंटरनेट अर्थव्यवस्था की वजह से अन्य दूसरी चीजों में भी इसका योगदान रहा है। आईएफसी ने जियो के प्रवेश का आकलन आर्थिक वृद्धि में इंटरनेट की पहुंच के आधार पर किया है।

इस मॉडल में 2004-14 से 18 राज्यों के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। इसके अनुसार, यदि अन्य चीजें स्थिर रहती हैं और इंटरनेट की पहुंच 10 प्रतिशत बढ़ती है तो इससे प्रति व्यक्ति जीडीपी में 3.9 प्रतिशत का इजाफा होगा। (भाषा)

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