आखिर क्यों है मोदी सरकार और RBI में टकराव, जानिए 2 मिनट में 10 बातों से...

Last Updated: सोमवार, 19 नवंबर 2018 (15:09 IST)
और के बीच चल रही पर सोमवार को होने वाली बैठक में विराम लग सकता है। सूत्रों के अनुसार सोमवार को रिजर्व बैंक के की होने वाली बैठक में दोनों पक्ष कुछ मुद्दों पर आपसी सहमति पर पहुंचने के पक्ष में हैं। जानिए मोदी सरकार और में किन बातों पर है टकराव :

1. बैंकिंग सिस्टम में मौजूद एनपीए की समस्या से निपटने के लिए ने सरकारी बैंकों पर कई तरह की सख्ती कर दी है। एनपीए की समस्या से निपटने के लिए आरबीआई ने जिस प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) को तैयार किया है, उसमें उसने कुल 12 बैंकों को रखा हुआ है, जिसमें से 11 सरकारी बैंक हैं। पीसीए में आने के कारण आरबीआई ने इन बैंकों के नए कर्ज देने, नए ब्रांच खोलने और लाभांश वितरण पर रोक लगा दी है। मोदी सरकार इनमें से कुछ नियमों में ढील चाहती है।
2. मोदी सरकार का मानना है कि बैंकों की तरफ से आरबीआई को मिले लाभांश का अधिकांश हिस्सा उसे देना चाहिए। हालांकि आरबीआई ने ऐसा करने से मना कर दिया। आरबीआई का कहना है कि लाभांश में ज्यादा हिस्सेदारी मांग कर सरकार आरबीआई की स्वायत्ता पर प्रहार कर रही है, खासकर ऐसे समय में जब आरबीआई को उसकी बैलेंस शीट को मजबूत करने की आवश्यकता है।

3. RBI ने सरकार की तरफ से गठित उस अंतर मंत्रालयी समिति की सिफारिशों का विरोध किया है, जिसमें एक अलग पेमेंट रेगुलेटर को बनाने की सिफारिश की गई है।

4. आरबीआई का मानना है कि पेमेंट रेगुलेटरी बोर्ड को आरबीआई के अधीन रहना चाहिए, जिसकी कमान आरबीआई गवर्नर के हाथों में ही हो। 19 अक्टूबर को जारी नोट में आरबीआई ने कहा कि पेमेंट रेगुलेटरी बोर्ड का स्वरूप फाइनेंस बिल में बताई गई घोषणा के मुताबिक नहीं है।

5. पिछले कुछ महीनों में महंगाई में कमी आई है और यह मध्यम टर्म में आरबीआई के अनुमान के मुताबिक (4 प्रतिशत) ही रहा है। हालांकि इसके बावजूद बैंक ने ब्याज दरों में कटौती की बजाय उसे बढ़ा दिया। सरकार रिजर्व बैंक से मौद्रिक सख्ती की उम्मीद नहीं कर रही थी लेकिन आरबाई ने अनुमानों को धता बताते हुए उसे बढ़ाने का फैसला लिया।

6. एनपीए को लेकर आरबीआई का नया नियम भी सरकार की परेशानी को बढ़ा रहा है। आरबीआई ने इस साल से नया नियम बनाया है, जिसके तहत अगर कोई भी कंपनी निर्धारित समय से एक दिन बाद भी भुगतान करती है तो उसे डिफॉल्टर घोषित करना होगा।

7. आरबीआई पावर सेक्टर में एनपीए से निपटने की कोशिश रही है। सरकार के अधिकारी इस नियम में ढील देने के लिए लॉबिंग कर रहे हैं लेकिन उन्हें इस दिशा में सफलता नहीं मिल पाई।
8. आरबीआई की इस सख्ती से मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी मुद्रा योजना के दौरान कर्ज बांटने में कमी हो सकती है।

9. सरकार भारतीय रिजर्व बैंक के निर्णय लेने में वृहद भागीदारी चाहती है क्योंकि उसका मानना है कि मौजूदा चलन एक दिन की देरी के चलते ऋण के एनपीए में तब्दील होने जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर उसे अलग रखता है। सरकार का मानना है कि लोगों के प्रतिनिधि होने के नाते उसे आरबीआई के महत्वपूर्ण नीति निर्णयों में शामिल होना चाहिए।

10. आरबीआई बोर्ड में नियुक्तियों को लेकर भी सरकार और केंद्रीय बैंक में खींचतान रही है, लेकिन यह विवाद उस समय गहराया जब मोदी सरकार ने बोर्ड से निदेशक नचिकेत मोर को बिना किसी सूचना के हटा दिया और स्वदेशी जागरण मंच के एस गुरुमूर्ति समेत चार अन्य निदेशकों की नियुक्ति कर दी। नचिकेत मोर सरकार के आरबीआई में दखल के सख्त आलोचक थे। नचिकेत मोर को जिस तरह हटाया गया, उससे आरबीआई का प्रबंधन भी नाराज था।


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