हाई रिटर्न के लिए सोने में कब और कैसे निवेश करें

'सोना' दुनिया की सबसे कीमती धातुओं में से एक है। भले ही इसका अब मुद्रा के रूप में उपयोग नहीं किया जाता है, लेकिन फिर भी यह धातु कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। दीर्घकालिक विकल्प के रूप में सोना काफी लोकप्रिय है और इसे निवेश पोर्टफोलियो में एक अतिरिक्त विकल्प माना जाता है। एक अन्य कारण इसकी उच्च तरलता है। इसके अलावा, यह मुद्रास्फीति और अन्य बाजार जोखिमों को मात देने के लिए सही वस्तु है। आखिर सोने में निवेश क्यों करना चाहिए? तो आइए जानते हैं कि आपको सोने में कब और कैसे निवेश करना चाहिए।
सोने में कैसे निवेश करें : आप कई तरह से सोने में निवेश कर सकते हैं और विभिन्न प्रकार के निवेश उद्देश्यों को हासिल करने के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं। कुछ खास तरीके, जिनके माध्यम से आप सोने में निवेश कर सकते हैं। सोने में निवेश करने के कुछ तरीके इस प्रकार हैं :-

: सोने के आभूषण सोने में निवेश करने के पारंपरिक तरीकों में से एक है। इसमें आप आभूषण विक्रेता के पास जाते हैं और अपनी पसंद के सोने के आभूषण खरीदते हैं। लेकिन, यदि आप अपने निवेश में अच्छा रिटर्न चाहते हैं तो निवेश के इस विकल्प से आपको बचना चाहिए। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इसकी निवेश लागत में न केवल सोने की कीमत, बल्कि ज्वैलरी मेकिंग एवं अन्य शुल्क भी शामिल होते हैं। फिर से बेचते समय इनकी पूरी राशि आपको नहीं मिलती। इस प्रकार, आप लाभ के बजाय नुकसान में चले जाते हैं। सरकार ने भी सोने के गहने रखने की एक सीमा तय की है , जिसके बारे में भी आपको जानकारी होनी चाहिए।
और सोने के सिक्के : ऐसे लोग जो भौतिक सोने, गोल्ड बार और सोने के सिक्कों में निवेश करने के इच्छुक हैं, उनके लिए यह सोने के गहनों की तुलना में बेहतर विकल्प हैं क्योंकि मेकिंग समेत अन्य शुल्क शामिल नहीं होते। इसके अलावा, सोने के आभूषण 18 कैरेट से 22 कैरेट सोने के बने होते हैं, लेकिन सोने के सिक्के और गोल्ड बार 24 कैरेट सोने के होते हैं। आप सोने के सिक्के और गोल्ड बार बैंकों या ज्वैलर्स से खरीद सकते हैं। लेकिन उन्हें फिर से बेचते समय बैंक इसे वापस नहीं खरीदते हैं जबकि ज्वैलर्स अपने ग्राहकों से सोना खरीद लेते हैं।
गोल्ड माइनिंग कंपनियों के शेयर खरीदना : गोल्ड माइनिंग कंपनियों के शेयर खरीदना भारत में सोने में निवेश करने का एक और बेहतर विकल्प है। भारत में 500 से अधिक सोने की खनन कंपनियां हैं, जिनमें निवेश किया जा सकता है। इन कंपनियों के शेयर की कीमतें भारत में सोने की कीमतों पर निर्भर हैं। सोने की दरों के अलावा, उत्पादन लागत जैसे अन्य कारक भी रिटर्न को प्रभावित करते हैं।

गोल्ड फंड्स ऑफ फंड्स (FoFs) : गोल्ड फंड ऑफ फंड्‍स, जिसे गोल्ड म्यूचुअल फंड भी कहा जाता है, ओपन एंडेड फंड हैं जो गोल्ड ईटीएफ में निवेश करते हैं। वे खनन, भंडारण और सोने के वितरण में शामिल शेयरों के एक पोर्टफोलियो के रूप में आते हैं। भले ही यह बाजार से जुड़ा हुआ सोने का निवेश विकल्प हो, लेकिन इसके लिए आपको DEMAT खाता खोलने की आवश्यकता नहीं है। यहां तक ​​कि यदि आपके पास सोने के बारे में पर्याप्त ज्ञान नहीं है, तो भी आप इसे हैंडल कर सकते हैं। यदि आप इस निवेश के विकल्प को चुनते हैं, तो आपको ईटीएफ यूनिट्‍स की खरीदी-बिक्री नाममात्र का ब्रोकरेज शुल्क देना होगा।
गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Gold ETFs) : यदि आप गोल्ड म्यूचुअल फंड से अच्छी तरह वाकिफ हैं तो गोल्ड ईटीएफ को समझना भी आपके लिए मुश्किल नहीं होगा क्योंकि गोल्ड म्यूचुअल फंड और गोल्ड ईटीएफ दोनों म्यूचुअल फंड निवेश हैं। गोल्ड ईटीएफ सूचीबद्ध होते हैं और स्टॉक एक्सचेंज में कारोबार करते हैं। इसलिए इसके लिए DEMAT अकाउंट जरूरी है। निवेश के इस विकल्प में ब्रोकरेज शुल्क शामिल होगा, जो कि गोल्ड ईटीएफ की यूनिट्‍स को खरीदने और बेचने के लिए नाममात्र का शुल्क है।
उच्च रिटर्न पाने के लिए सोने में निवेश कब करें? : सोने में कब निवेश करना चाहिए या सोने में निवेश कब सबसे अच्छा रिटर्न देता है, नए निवेशकों के लिए यह महत्वपूर्ण प्रश्न है, जो कि सही भी है। लेकिन सच कहा जाए तो सोने में निवेश करने या उच्च रिटर्न पाने का कोई निश्चित समय नहीं है। इसका कारण यह है कि सोना एक आदर्श दीर्घकालिक निवेश विकल्प है, जिसका अर्थ है कि आपको उच्च लाभ की संभावना बढ़ाने के लिए कम से कम 5 साल तक इसमें निवेश करना चाहिए। इस लंबी अवधि में बाजार में बहुत सारे बदलाव भी होते हैं। क्योंकि भारत में सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारक हैं, इसलिए 5 साल बाद की बाजार की स्थिति का अनुमान लगाना भी कठिन है।
यदि आप पहले से सकारात्मक संकेतों को पढ़ने और समझने में सक्षम हैं तो आप इस दिशा में सही कदम उठा सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप बाजार में मुद्रास्फीति का पता लगाने में सक्षम हैं, तो उस पर जल्द से जल्द कार्रवाई करें। जितनी तेजी से आप इन संकेतों को समझने में सक्षम होंगे, उतना ही आप सोने में निवेश पर लाभ कमा सकते हैं।
शेयरों में गिरावट या राजनीतिक उथल-पुथल मुद्रास्फीति या मुद्रा के अवमूल्यन का एक मजबूत संकेत हो सकता है। यदि आप ऐसे संकेतों को समझने में सक्षम हैं तो सोने में निवेश कर सकते हैं। इतना ही नहीं आरबीआई द्वारा अधिक करेंसी जारी करने की अधिसूचनाएं भी पीली धातु में निवेश करने का एक अच्छा समय बता सकती हैं।
आपके लिए या किसी अन्य साधारण स्वर्ण निवेशक के लिए खरीद और निवेश को रोककर रखने की रणनीति सबसे अच्छी हो सकती है। चूंकि अर्थव्यवस्थाएं चक्रीय हैं, अत: सोने की कीमतें कम होने पर सोना खरीदें, इसके लिए, सोने की कीमतों पर नियमित नजर रखें। अगर आप इस तरह से सोने में निवेश करते हैं, तो आपको सोना खरीदते समय चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।
निवेश विकल्प के रूप में सोना उस समय काफी लाभदायक हो सकता है, खासकर जब अन्य निवेश विकल्प विफल हो जाते हैं। सोने के निवेश उत्पाद में अलग-अलग जोखिम और रिटर्न-प्रोफाइल, तरलता विशेषता और शुल्क होते हैं। अत: सोने में निवेश करने से पहले, बाजार में उपलब्ध सभी विकल्पों पर विचार करें और अपने निवेश उद्देश्यों के अनुसार चयन करें। किन परिस्थितियों में सोने में निवेश का विकल्प सबसे बेहतर होगा, इस पर गहन शोध करें। इसके अलावा पेशेवरों की सलाह पर भी ध्यान दें। यह समझने की भी कोशिश करें कि स्वर्ण निवेश उत्पाद अन्य परिसंपत्तियों के साथ कैसा प्रदर्शन करते हैं।


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