नोटबंदी के बाद की सबसे बड़ी तेजी, सोना 32 हजार के पार

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पुनः संशोधित बुधवार, 3 अक्टूबर 2018 (14:54 IST)
नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर पीली धातु के 1200 डॉलर प्रति औंस को पार कर जाने और घरेलू स्तर पर डॉलर की तुलना में रुपए के ऐतिहासिक निचले स्तर पर उतरने से बुधवार को दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 555 रुपए की छलांग लगाकर 32,030 रुपए प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया। चांदी 450 रुपए चमककर दो महीने से ज्यादा के उच्चतम स्तर 39,400 रुपए प्रति किलोग्राम पर रही।

पीली धातु में यह नोटबंदी के बाद की सबसे बड़ी तेजी है। नोटबंदी की घोषणा 8 नवंबर 2016 की रात को की गई थी और अगले दिन 9 नवंबर 2016 को सोने की कीमत 900 रुपए प्रति दस ग्राम बढ़ गई थी। इस साल 15 जून के बाद यह पहला मौका है, जब घरेलू बाजार में पीली धातु 32 हजार रुपए के पार निकली है।

कारोबारियों का कहना है कि रुपए के 73 रुपए प्रति डॉलर से भी ज्यादा कमजोर हो जाने से पीली धातु के दाम बढ़े हैं। कारोबार के दौरान एक समय भारतीय मुद्रा 73.41 रुपए प्रति डॉलर तक लुढ़क गई थी। देश में सोना मुख्य रूप से आयात किया जाता है और इसलिए डॉलर के महंगा होने से इसके दाम बढ़ जाते हैं।

इसके अलावा मंगलवार को विदेशों में सोने में डेढ़ फीसदी से ज्यादा की तेजी का असर भी आज स्थानीय बाजार पर दिखा। मंगलवार को गांधी जयंती के मौके पर स्थानीय बाजार बंद था। वैश्विक स्तर पर मंगलवार की बड़ी मजबूती के बाद बुधवार को सोना हाजिर 1.40 डॉलर की मामूली गिरावट में 1,202.95 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।

दिसंबर का अमेरिकी सोना वायदा भी 0.50 डॉलर टूटकर 1,206.50 डॉलर प्रति औंस बोला गया। चांदी हाजिर 0.02 डॉलर की बढ़त में 14.71 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। स्थानीय बाजार में सोना स्टैंडर्ड 555 रुपए की छलांग लगाकर 32,030 रुपए प्रति दस ग्राम पर और सोना बिटुर इतनी ही तेजी के साथ 31,880 रुपए प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया।

कारोबारियों का कहना है कि त्योहारी मांग आने के कारण आने वाले समय में भी सोने में मजबूती कायम रहने की उम्मीद है। आठ ग्राम वाली गिन्नी भी 100 रुपए की बढ़त में 24,600 रुपए पर रही। चांदी हाजिर 450 रुपए चढ़कर 26 जुलाई के बाद के उच्चतम स्तर 39,400 रुपए प्रति किलोग्राम और चांदी वायदा 460 रुपए चमककर 38,980 रुपए प्रति किलोग्राम के भाव बिकी। सिक्का लिवाली और बिकवाली भी एक-एक हजार रुपए बढ़त में क्रमश: 73 हजार और 74 हजार रुपए प्रति सैकड़ा पर पहुंच गए। (वार्ता)


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