बाल गीत : तरबूज है गर्मी का दुश्मन...


 
 
अगर बनना चाहो मजबूत। 
यारों खूब खाओ तरबूज॥ 
लाल-लाल ललाई उसकी, 
प्रेम-प्यार की गागर है ये॥ 
देवों में है ये अवधूत। यारों....
खनिजों का भंडार है ये, 
विटामिनों का आगार है ये। 
अपनी मां  का प्यार है ये॥ 
मौसम का है ये सपूत। यारों.... 
 
- परमानंद शर्मा 'अमन' 

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