बाल कविता : दादाजी ने मजा उड़ाया...


 
 
 
गुल्ली-टुल्ली लगीं झगड़ने,
पहले हम बैठेंगे।
पर ऑनलाइन हम,
कार्टून देखेंगे।
 
गुल्ली-टुल्ली लगीं झगड़ने,
पहले हम जाएंगे।
चन्द्रयान पर बैठ चांद को, 
हम छूकर आएंगे।
 
गुल्ली-टुल्ली लगीं झगड़ने,
पिज्जा-बर्गर लेंगे।
केशलेस पेमेंट नेट पर,
हम ही पहले देंगे।
 
इस झगड़े का दादाजी ने, 
पूरा मजा उड़ाया।
एक पत्रिका में सुन्दर-सा,
बालगीत भिजवाया।
 

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