सेलफोन विकिरण से इंसानों को नुकसान नहीं

पुनः संशोधित रविवार, 4 नवंबर 2018 (14:31 IST)
मैसाचुसेट्स। हाल के अमेरिकी अध्ययन में दावा किया गया है कि सेलफोनों द्वारा उत्सर्जित रेडियो आवृत्ति (आरएफआर) भले ही चूहे में कैंसर का कारक हो लेकिन यह तथ्य मनुष्यों पर लागू नहीं होता।

अध्ययन से पता चला है कि इस बात के स्पष्ट साक्ष्य है कि जब नर चूहे इस तरह के विकिरण के उच्च स्तर के संपर्क में आते हैं, जैसे में होता है, तो उनमें हृदय से जुड़ी कैंसरयुक्त रसौली विकसित हो जाती है।

यूएस नेशनल टॉक्सिकोलॉजी प्रोग्राम (एनटीपी) को 30 मिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत से इस अध्ययन को पूरा करने में 10 साल का समय लगा है। इसमें विकिरण के संपर्क में आए नर चूहों के मस्तिष्क और एड्रेनल ग्रंथि में रसौली के कुछ सुबूत भी सामने आए हैं।
रिपोर्ट के बाद कुछ गैरसरकारी संगठनों और वैज्ञानिकों का प्रस्ताव है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की इंटर एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) को आरएफआर के वर्गीकरण को मौजूदा समूह 2बी (संभावित मानव कैंसरजन) से समूह 1 (मानव कैंसरजन) में उन्नयन करना होगा। लेकिन विशेषज्ञ एजेंसियों ने जोर देकर कहा है कि यह खोज मनुष्यों पर लागू नहीं होती है।

गैरआयनीकरण विकिरण संरक्षण (आईसीएनआईआरपी) पर अंतरराष्ट्रीय आयोग ने स्पष्ट रूप से इस अध्ययन की जानकारी देते हुए एक नोट प्रकाशित किया है कि यह अध्ययन वर्तमान में आरएफआर के लिए मौजूदा सुरक्षा दिशा-निर्देशों को बदलने के लिए कोई कार्रवाई योग्य आगत प्रदान नहीं करता है। आईसीएनआईआरपी की अनुशंसाएं डब्ल्यूएचओ जैसी संस्थाएं और कई देश स्वीकार करते हैं।
यहां उल्लेख किया जा सकता है कि आरएफआर के लिए भारत के सुरक्षा दिशा-निर्देश आईसीएनआईआरपी मानकों में से केवल 10 प्रतिशत ही हैं। (भाषा)


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