आपने कभी सुनी ऐसी अनोखी शादियां

पुनः संशोधित मंगलवार, 29 अगस्त 2017 (15:52 IST)
नई दिल्ली। विविधताओं भरा देश है और यह विविधताएं विवाह बंधन जैसी सामाजिक प्रथाओं में भी देखे जाते हैं। देश के कई भागों में ऐसे विवाह भी होते हैं जो कि हिन्दू विवाह की प्रचलित आम मान्यातों से अलग होते हैं। इस तरह के विवाहों के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी होती है।

हमारे देश के पूर्वोत्तर में एक राज्य है मेघालय जहां पर महिलाओं को सामाजिक तौर इस बात की छूट हासिल है कि वे कई विवाह कर सकती हैं। भारत में कई जनजातियां हैं जिनमें शादी को लेकर सबकी अपनी-अपनी प्रथाएं हैं। ऐसे में मेघालय की खासी जनजाति में एक अनोखी प्रथा प्रचलित है।

यहां एक महिला जितनी मन चाहे उतनी शादियां कर सकती है। वे चाहें तो अपने शादी के बाद पतियों को ससुराल में ही रख भी सकती हैं। इस समुदाय में पुरुषों का नहीं बल्‍क‍ि महिलाओं का सिक्का चलता है। हालांकि इस प्रथा को बदलने की मांग भी हो रही है, लेकिन यहां पर समाज में बदलाव होने में समय लगेगा क्योंकि यहां लम्बे समय तक मातृसत्ता समाज रहा है।
के किन्नौर जिले में शादी को लेकर एक अलग ही प्रथा है। इस प्रथा को स्थानीय भाषा में घोटुल प्रथा कहते हैं। सदियों पुरानी इस प्रथा के चलते सभी भाई एक साथ एक लड़की से शादी करते हैं। इस रि‍वाज को लेकर पांडवों और द्रौपदी को उदाहरण माना जाता हैं। ऐसी मान्‍यता है कि महाभारत काल के दौरान पांडवों ने द्रौपदी और मां कुंती के साथ अज्ञातवास का कुछ समय किन्नौर जिले की गुफाओं में बि‍ताया था।
देश के आदिवासी बहुल राज्य छत्तीसगढ़ में भी शादी को लेकर कई अनोखी प्रथाएं हैं। यहां पर धुरवा आदिवासी
जनजाति में भाई-बहन आपस में शादी करते हैं। यहां पर ममेरे, फुफेरे भाई बहन के बीच शादी का चलना है। ऐसे में जो लोग शादी का प्रस्‍ताव आने पर मना कर देते हैं, तो उन पर जुर्माना लगाया जाता है। यही कारण है कि आज इस समाज में भी बहुत से लोग शादी करवाने की इस अनोखी परम्परा के खिलाफ हैं।
शादी से पहले ही बच्चा : राजस्थान के उदयपुर, सिरोही और पाली जिलों में और गुजरात में रहने वाले गरासिया जनजाति में शादी की एक अनोखी प्रथा है। गरासिया जनजाति गुजराती, भीली, मेवाड़ी और मारवाड़ी भाषा बोलते हैं। इस समाज में शादी से पहले बच्‍चा पैदा करने का रिवाज है। यहां शादी से पहले लड़के-लड़कियां एक साथ रहते हैं। उसके बाद अगर उन्‍हें बच्‍चा नहीं पैदा होता है तो इस रिश्ते को मान्‍यता नहीं मिलती है।
मामा-भानजी के बीच शादी : दक्षिण भारतीय समाज में सगे मामा-भानजी में शादी बहुत अच्छी मानी जाती है। बड़ी संख्‍या में आज भी यहां पर लोग इसे सबसे पहले वरीयता देते हैं। कई बार मामा-भानजियों न चाहते हुए भी उनका विवाह करा दिया जाता है। इस अनोखी प्रथा के पीछे जमीन-जायदाद मुख्‍य वजह मानी जाती है। कहा जाता है कि बहन मायके में हक न मांगे, इसलि‍ए उसकी बेटी को घर में शादी करके रख लिया जाता है।

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