स्वर्ग तुल्य होता है संस्कारवान परिवार...

संतानोत्पत्ति का रहस्य क्या है?

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मनुष्य को द्वारा सब तरह की दी जाती है। माता, पिता और आचार्य बच्चे के ज्ञान का मार्ग प्रशस्त करते हैं, उसे शिक्षित और दीक्षित करते हैं। इसी प्रक्रिया में संस्कारवान परिवार परवरिश पाता है।
कहता है-

अनुव्रतः पितुः पुत्रो मात्रा भवतु सम्मनाः।
जाया पत्ये मधुमतीं वाचं वदतु शंतिवाम्‌

इस मंत्र में शिक्षा दी गई है कि पुत्र को माता-पिता की सेवा करनी चाहिए और उनकी आज्ञा का पालन करना चाहिए।

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