विकास के परचम तले खेती हुई लापता : अनुपम मिश्र

<a class=पर्यावरणविद् अनुपम मिश्र से संपादक की मुलाकात" border="0" class="wdp_img" hspace="4" src="/hi/articles/1309/23/images/img1130923069_1_1.jpg" vspace="4" />
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पर्यावरणविद् मिश्र से वेबदुनिया की खास मुलाकात पर्यावरण महज प्राकृतिक संसाधनों से मिलकर नहीं निर्मित होता बल्कि सुखद पर्यावरण बनता है मानव और प्रकृति के बीच परस्पर सहज संबंध से। इसी संबध की नई परिभाषा रच रहे हैं प्रख्यात पर्यावरणविद् अनुपम मिश्र। वेबदुनिया से संक्षिप्त मुलाकात में अनुपम मिश्र ने बेबाकी से स्वीकारा है कि 'विकास' शब्द को राजनेताओं ने निहित स्वार्थों के तहत् इस्तेमाल किया है। >
 
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> प्रस्तुत है, उज्जवल पर्यावरण की नई सोच को तराशने वाले, परंपरागत दृष्टि को नवीन दिशा देने वाले, पर्यावरण के सिपाही के रूप में पहचाने जाने वाले सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद् अनुपम मिश्र से वेबदुनिया के संपादक जयदीप कर्णिक की विशेष मुलाकात के संपादित अंश-

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