हिन्दी कविता : हर पल बदल रही तस्वीर...


वीरभूमि पड़ेगी ऐसी गफलत में, किसी ने सोचा नहीं था ख्वाब में।
झेलम का जल यों दूषित होगा, जहरीले ड्रग सैलाब में।
(जबकि प्रांत की अर्थव्यवस्था थी उच्चतम शबाब में।)
देश है चिंतित और सभी हम मांग रहे भगवान से,
हो पूर्ण सफल ड्रग माफिया पर का प्रहार में।।1।।

तीन हठ सुने थे हमने बाल, त्रिया और जोगी हठ।
ऊपर से जोगी गर खुद हो उद्देश्यनिष्ठ, दबंग, कर्मठ।
दस वर्षों के शिथिल शासन की उबासियां सब दूर हुईं,
जिद से एक योगी की यूपी लेने लगा झटपट करवट।।2।।
शंका थी उन्हें नोटबंदी पर, शंका स्ट्राइक सर्जिकल पर।
शंका मोदी की डिग्री पर, जीडीपी की ग्रोथ गुणनफल पर।
सारे दावे फेल हुए जब, जारी है अब महारुदन,
ईवीएम के ऑपरेशन में छुपे हुए किसी छल पर।।3।।

दो ब्रेकों (बेटों) के कारण नीतीश को मिली न मनचाही रफ्तार।
खबर गर्म है, होने लगा है अंदर-अंदर पुनर्विचार।
मोदी/योगी की नवपरिभाषित राष्ट्रवाद की धारा में,
जुड़ जाने को आतुर अब खुद ही होने लगा बिहार।।4।।
छब्बे बनने गए चौबेजी हाल हुआ बेहाल।
बुझा दी थी पंजाब ने पहले ही शिखर के अरमानों की मशाल।
मोदी से आगे निकल जाने के सारे सपने चकनाचूर हुए,
ऊपर से करोड़ों के जुर्माने में फंस गए केजरीवाल।।5।।


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