वह तो हरे रंग की जादूगरनी है !

संगत में बारिश की एक याद और प्रेरित कलाकृति

संगत-रवीन्द्र व्यास
Ravindra VyasWD
वह जब भी करीब आती है, लगता करीब आ रही है। उसके भीतर हमेशा बारिश मचलती रहती है। मैं जब भी उसके करीब खड़ा होता हूँ तो मुझे बारिश का सुनाई देता है। उसका आलाप सुनाई देता है। उसकी विलंबित लय सुनाई देती है। फिर द्रुत में बारिश की आवाज सुनाई देती है। वह हमेशा राग बारिश में भीगती दिखाई देती है। उसका बदन एक आबशार की तरह हवा में उड़ता हुआ एक अजब सी लय में तैरता महसूस होता है।

मैं जब भी उसकी आँखों में झाँकता हूँ, उसकी फुहारों से भीग जाता हूँ। वह मेरे भीतर फैलते उजाड़ को एक मुलायम में बदल देती है। उसे काला जादू नहीं आता। वह तो की जादूगरनी है। उसके आते ही चारों तरफ हरा रंग फैल जाता है। पेड़ और ज्यादा हरे दिखाई देते हैं। पत्ता-पत्ता रहे रंग की रोशनी में नहा उठता है। घास और हरी दिखाई देती है।

मैं उससे कहता हूँ -अपनी आँखें बंद कर लो।

वह कहती है- क्यों?

मैं कहता हूँ तुम मुझे एक हरे रंग में बदल दोगी। जब भी मैं तुम्हारी आँखों में झाँकता हूँ भीग जाता हूँ। और धीरे धीरे मुझमें एक हरा रंग फैलने लगता है।

वह एक खास अदा से मुस्कुराती है। मैं धीरे से उसे चुमता हूँ तो उसकी आँखों का रंग बदल जाता है। अब उसकी आँखों में रहा उजाला है। वह इसी उजाले में अपने हरे होते ख्वाबों को देखती है। उसे देखकर मुझे एक स्पैनिश कवि जुआन रामोव जुमिएनेझ की कविता याद आती है....

हरी थी कुवाँरी, हरी, हरी !
हरी थी आँखें उसकी, हरे थे बाल
हरे जंगल में जंगली उसके गुलाब
न थे लाल न थे सफ़ेद, हरे बल्कि
हवा से हरी आई वह
लिए उसके गई बदल हरे में धरा सकल
चमकते वस्त्रों का उसका पैमाना
न था नीला न था सफ़ेद, हरा बल्कि
हरे समन्दर ऊपर आई वह
और आकाश तक हरे में तब गया बदल
सदा रखेगा खुला छोड़ जीवन मेरा
छोटा एक दरवाजा अंदर उसके आने को।

वह सचमुच हरी थी अपनी आँखों में एक रहा ख्वाब लिए। मैंने उसका हाथ थामकर कहा कि तुम्हारी आँखें भी हरी हो गई हैं। उसने कहा कि जब तुमने मुझे चूमा तो मेरी आँखें हरी हो गई हैं। मैं जहाँ देखती हूँ मुझे हरा नजर आता है। मेरे ख्वाब भी हरे हैं। उसने मुझसे कहा कि मेरा बदन एक लचकती हरी शाख में बदल गया है जिस पर हमारे स्वप्न का हरा फूल खिलेगा। हम दोनों मिलकर उसे साथ-साथ देखेंगे।

जब वह मुझसे अपने स्वप्न के बारे में यह बात कह रही थी तब मुझे बारिश की आवाज सुनाई दे रही थी। वह खामोश थी और और उसके बदन से बारिश के जलतरंग की धुन सुनाई दे रही थी।

मैं हमेशा उसके लिए एक खुला दरवाजा हूँ कि वह आए और मुझे भीगा जाए और मैं भीतर से हरा हो जाऊँ। मेरे चारों ओर बारिश थी। हर कहीं बारिश थी। और यह पृथ्वी हर कोने से हरी होती जा रही थी।

रवींद्र व्यास|
वह सचमुच हरे रंग की जादूगरनी है !!

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