झुरमुट में प्रतीक्षा करती गेंद

कवि अशोक वाजपेयी का गद्यांश और प्रेरित कलाकृति

संगत-रवीन्द्र व्यास
Ravindra VyasWD
खेले कितने ही बरस हो गए। अभी जब दूबी टूरी के साथ गेंद खेलती है तो कभी-कभी याद आता है कि हम भी कभी गेंद खेलते थे। दूसरों के साथ और कभी-कभी अकेले। यों बचपन बहुत याद नहीं आता-अपने आप। उस समय कैसा लगता था यह कोशिश करो तो भी ख्याल में नहीं आता।

  जैसे प्रेम में वैसे ही स्मृति में हम नहीं चाहते कि किसी और के पास वैसी ही छवियाँ हों। उस बेंच पर जिस पर बैठकर हम खोंचे की चाट खाते थे या कि उस कमरे में जिसमें हमने स्वयं अपने शरीर की ऐंद्रिकता पहचानने की शुरूआत की ...      
अलबत्ता कुछ घटनाएँ और चीजें पटल पर जरूर उभरती हैं। कविताओं में भी बचपन को अक्सर ऐसी ही छवियों के माध्यम से ही पुनर्जीवित किया है। वैसे भी बचपन में चीजों का बहुत गहरा और स्पष्ट प्रभाव पड़ता है मानों बचपन में अपने अबोधपन में हम किसी चीज को बहुत तीक्ष्णता के साथ देखते थे।

ऐसी चीजें औऱ चेहरे मकानों की सीढि़याँ और खिड़कियाँ, स्कूल के अहाते में लगे इमली के पेड़, खेल के मैदान के पास की पुरानी बावड़ी आदि बस बहुत साफ याद आती हैं। उनमें से अब कई अस्तित्व में ही नहीं रह गई होंगी पर हमारे मन में उनकी छवि स्थायी और अमिट हो जाती है जैसे वे अपने भौतिक अस्तित्व से मुक्त होकर हमारे जीवन के स्पेस में अपनी सत्ता हासिल कर लेती है, जब तक हम रहेंगे, वे छवियाँ भी रहेंगी इस तरह कि उनका होना ही हमारा जीवन हो।

जैसे प्रेम में वैसे ही स्मृति में हम नहीं चाहते कि किसी और के पास वैसी ही छवियाँ हों। उस बेंच पर जिस पर बैठकर हम खोंचे की चाट खाते थे या कि उस कमरे में जिसमें हमने स्वयं अपने शरीर की ऐंद्रिकता पहचानने की शुरूआत की, हम नहीं चाहते कि कम से कम अब कोई बैठे या जाए।

स्मृति में हम कई चीजों को छवियों को पवित्र करते चलते हैं। शायद स्मृति ही पवित्रता का मौलिक कारक है। कुछ भी पवित्र इसलिए हो पाता है कि उसे हम याद करते हैं और उसे उसकी निपट भौतिकता से मुक्त कर पाते हैं।

हमारे घर के पीछे जो कम्पनी बाग था वही हमारे लिए बगीचा और जंगल था। उसी में हम अंडा-डावरी का खेल खेलते थे और लुकाछिपी का भी। वहीं झुरमुट भी थे जिनमें अकस्मात् कुछ अप्रत्याशित सा मिल जाता था या हम ही छुपाकर रख आते थे। सब कुछ ऐसा हुआ था या नहीं पर ऐसे ही किसी झुरमुट में रखी गेंद इस समय याद आ रही है। जीवन के उस अधेड़ झुरमुट में बचपन अब गेंद की तरह ही रखा हुआ है। अब खेल नहीं सकते, सिर्फ महसूस भर कर सकते हैं।

रवींद्र व्यास|
(पत्रिका समास से साभार)

वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।



और भी पढ़ें :

इसलिए जरूरी है बच्चों का मुंडन संस्कार, पढ़ें 5 जरूरी बातें

इसलिए जरूरी है बच्चों का मुंडन संस्कार, पढ़ें 5 जरूरी बातें
मुंडन संस्कार के बारे में मान्यता है कि इससे शिशु का मस्तिष्क और बुद्धि दोनों ही पुष्ट ...

दूध नहीं पीते हैं मोटे होने के डर से तो यह 4 स्वादिष्ट ...

दूध नहीं पीते हैं मोटे होने के डर से तो यह 4 स्वादिष्ट विकल्प हैं आपके लिए
अगर आप वजन को बढ़ने से रोकना चाहते हैं और हेल्थ से किसी तरह के समझौते को तैयार नहीं तो ...

हमारे देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मानते हैं मोर ...

हमारे देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मानते हैं मोर पंखों को शुभ, पढ़ें 10 चौंकाने वाली बातें
मोर, मयूर, पिकॉक कितने खूबसूरत नाम है इस सुंदर से पक्षी के। जितना खूबसूरत यह दिखता है ...

अजी अंडा छोड़िए, इन 5 शाकाहारी चीजों में है भरपूर प्रोटीन

अजी अंडा छोड़िए, इन 5 शाकाहारी चीजों में है भरपूर प्रोटीन
हाल ही में पोलैंड की पशु चिकित्सा सेवा ने करीब 40 लाख अंडों को बाजार से हटा लिया है। ये ...

तुरंत फेंक दे अपना पुराना लूफाह वर्ना संक्रमण का है खतरा

तुरंत फेंक दे अपना पुराना लूफाह वर्ना संक्रमण का है खतरा
नहाते हुए अपने शरीर की वह त्वचा व हिस्सा, जो केवल साबुन से साफ नहीं हो पाता, उसकी सफाई के ...

4 टिप्स से जानें आपकी त्‍वचा के लिए कितने एसपीएफ वाला ...

4 टिप्स से जानें आपकी त्‍वचा के लिए कितने एसपीएफ वाला सनस्क्रीन सही होगा?
आमतौर पर आपने दूसरों से सुना होगा कि जितना ज्यादा एसपीएफ वाला सनस्क्रीन लगाएंगे उतना ही ...

हाथों में मेहंदी का रंग गहरा करने के 10 टिप्स

हाथों में मेहंदी का रंग गहरा करने के 10 टिप्स
मेहंदी से रचे हाथ किसे अच्छे नहीं लगते! जिनके हाथों में मेहंदी लगती है वे उसके रंग को ...

अचानक धन मिल जाए तो बात बन जाए.. अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो ...

अचानक धन मिल जाए तो बात बन जाए.. अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो यह 6 उपाय आजमाएं
परिश्रम से बड़ा कोई धन नहीं। लेकिन सांसारिक सुखों को हासिल करने के लिए जो धन चाहिए वह अगर ...

धूमावती जयंती 2018 : मनोवांछित फल पाना है तो ऐसे करें पूजन, ...

धूमावती जयंती 2018 : मनोवांछित फल पाना है तो ऐसे करें पूजन, पढ़ें ये विशेष मंत्र...
वर्ष 2018 में 20 जून, बुधवार को धूमावती जयंती है। इस विशेष अवसर पर ब्रह्म मुहूर्त में ...

देवी धूमावती की उत्पत्ति कैसे हुई, यह विचित्र कथा पढ़कर हो ...

देवी धूमावती की उत्पत्ति कैसे हुई, यह विचित्र कथा पढ़कर हो जाएंगे हैरान
पुराणों के अनुसार एक बार मां पार्वती को बहुत तेज भूख लगी होती है किंतु कैलाश पर उस समय ...