बेलारूस की स्वेतलाना को साहित्य का नोबेल पुरस्कार

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- सुरेशचन्द्र शुक्ल
 
साहित्य  में 2015 के नोबेल पुरस्कार के लिए बेलारूस की लेखक और पत्रकार को चुना गया है। इन्हें पूर्व सोवियत यूनियन में लोगों की जिंदगी को अपनी लेखनी के जरिए बेहतरीन ढंग से पेश करने के लिए यह पुरस्कार दिया जाएगा।  
2015 के नोबेल पुरस्कार उनकी पुस्तक 'उसके पॉलीफोनिक लेखन के लिए, हमारे समय में दुख और साहस के लिए एक स्मारक' के लिए दिया जाएगा। 
 
कौन हैं स्वेतलाना?
स्वेतलाना एलिक्सविच का जन्म 31 मई 1948 को सोवियत रूस में हुआ था जो अब उक्रेन में है।  इनकी मां उक्रेन की थीं जबकि इनके पिता बेलारूस के सैनिक थे। रुसी भाषा की वह बेलारूस में पत्रकार थीं। उन्होंने दूसरे विश्वयुद्ध से पीड़ित महिलाओं का साक्षात्कार लिया और उसे साहित्य में बड़ी खूबसूरती से पिरोया। इसके अलावा इन्होंने अफगानिस्तान में युद्ध पर भी समाचार लिखे। वह सरकार की आलोचक रही हैं। वे 'ए प्रेयर फॉर चेर्नोबिल' की लेखक भी हैं। 
 
 
स्वेतलाना ने 'वॉइसेज ऑफ उटोपिया' पुस्तक सीरीज लिखी है। यह सीरीज पूर्व सोवियत यूनियन में लोगों की स्थिति के साथ ही 1986 में चेर्नोबिल में हुए न्यूक्लियर हादसे के नतीजों का ब्योरा बताती है। इसमें अफगानिस्तान में युद्ध  का भी जिक्र है। उन्होंने आम आदमी को अपने साहित्य में स्वर दिया है। दूसरे विश्व युद्ध में लाल सेना में महिलाओं की भूमिका की आलोचनात्मक पुस्तक सोवियत रूस में प्रतिबंधित हुई और स्वेतलाना चर्चा में आईं। 
 
साहित्य में नोबेल के लिए चुनी गईं 14वीं महिला
 
नार्वेजीय टीवी में उन्हें पुरस्कार के पूर्व ही पसंदीदा सूची में सबसे ऊपर रखा था। इस होड़ में एक नार्वेजीय लेखक यून फोसे भी थे।  स्वेतलाना साहित्य में नोबेल पुरस्कार  के लिए चुनी गईं 14वीं महिला हैं। उनसे पहले 2013 में कनाडा की एलिस मुनरो ने साहित्य  के लिए नोबल पुरस्कार जीता था। स्कॉटहोम ने पुरस्कार के लिए उनके नाम की घोषणा करते हुए स्वीडिश एकेडमी की अध्यक्ष सारा डैनियस ने कहा, 'उनका काम हमारे दौर के दुख और बहादुरी को दिखाता है।' 
 
 
नार्वे की अनेक यात्रा कर चुकी स्वेतलाना की कई पुस्तकें नार्वे और स्वीडन में प्रकाशित हो चुकी हैं।  > >


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