संस्था 'रंजन कलश' द्वारा इन्द्रधनुषी रचनाओं का संकलन लोकार्पित

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'रंजन कलश' अभिव्यक्ति का ऐसा मंच है, जहां स्थापित रचनाकारों के साथ-साथ नव शब्द शिल्पियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा को नया आयाम दिया है। इस बार 'रंजन कलश' ने एक नवीन सार्थक प्रयास किया है जिसने 'इन्द्रधनुष' पुस्तक रूप में आकार लिया है। 
 
'इन्द्रधनुष' में सभी रचनाकारों ने अपनी लेखन प्रतिभा का परिचय विभिन्न विधाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया है। इसमें रसभीनी, रसपगी कविताएं हैं, खूबसूरत गजलें हैं और हैं लघु आकार के हाइकू। कविताओं में भावनाएं सागर की लहरों की तरह कल-कल बह रही हैं, वहीं गजलों में जिंदगी के अनुभवों को नाजुक शब्दों में बयां किया गया है। हाइकू में भावना को गागर में सागर की तरह प्रस्तुत किया गया है। फिर उसके साथ समसामयिक विचारोत्तेजक लेख हैं जिनमें सामाजिक मूल्यों को नए नजरिए के साथ प्रस्तुत किया गया है, साथ ही बच्चों से जुड़ी समस्याओं के सार्थक समाधान देने का प्रयास किया गया है। 
 
'रंजन कलश' की विशेषता है कि सभी रचनाकार विभिन्न पृष्ठभूमि से होते हुए भी लेखन के क्षेत्र में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दे रहे हैं। यहां रचनाकार डॉक्टर हैं, इंजीनियर हैं, शिक्षक हैं और हैं गृहिणियां। 
 
'इन्द्रधनुष' की रचनाएं आसमां में छलकते विभिन्न विधाओं के रंग हैं, जो अपनी विशेष प्रस्तुति से मन को आकर्षित करते हैं।  'इन्द्रधनुष' पुस्तक विमोचन मध्यभारत साहित्य समिति के अध्यक्ष राकेश शर्मा, साहित्यकार चंद्रसेन विराट, श्री महेन्द्र सांघी व रंजना फतेहपुरकर ने किया तथा इस अवसर पर शरद पगारे, मृणालिनी घुले, भावना दामले, रोशनी वर्मा, नियति सप्रे सहित शहर की कई साहित्य विभूतियां उपस्थित रहीं।     
 
जानकारी 'रंजन कलश' इंदौर के सचिव पं. संतोष मिश्र 'राज' ने दी।
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