विश्व पुस्तक मेला : मन्नू भंडारी और शिवरतन थानवी की पुस्तक का लोकार्पण



संतोष कुमार

राजकमल प्रकाशन पर 4 पुस्तकों का मन्नू भंडारी की 'बंदी' और शिवरतन थानवी की 'जग दर्शन का मेला' का लोकार्पण। शरद जोशी के व्यंग्य संग्रह 'और शरद जोशी' और 'शरद परिक्रमा' का लोकार्पण।
नई दिल्ली। गुरुवार को विश्व पुस्तक मेले में राजकमल प्रकाशन के स्टॉल पर हिन्दी की सुप्रसिद्ध कहानीकार मन्नू भंडारी अपने नए कहानी संग्रह 'बंदी' के लोकार्पण के लिए मौजूद थीं जिसका लोकार्पण कवि और आलोचक अशोक वाजपेयी द्वारा किया गया।

इसके बाद शिवरतन थानवी की नई किताब 'जग दर्शन का मेला' का लोकार्पण डॉ. पुरुषोत्तम अग्रवाल द्वारा किया गया जिसमें अपूर्वानंद, बनवारी, अशोक वाजपेयी, मंगलेश डबराल तथा लेखक के पुत्र ओम थानवी भी मौजूद थे। इस किताब में उनकी डायरी के चुनिंदा पन्ने हैं। किताब की भूमिका कविवर केदारनाथ सिंह ने लिखी है।

गुरुवार को ही शरद जोशी के व्यंग्य संग्रह 'और शरद जोशी' और 'शरद परिक्रमा' का लोकार्पण पत्रकार राहुल देव द्वारा किया गया। गुरुवार के अंतिम सत्र में लेखक क्षितिज रॉय से उनकी पुस्तक 'गंदी बात' पर उर्मिला गुप्ता ने बातचीत की। इस किताब में अन्ना आंदोलन के दौरान एक-दूसरे के संपर्क में आने वाले 2 युवाओं को लेकर मॉडर्न समय की कहानी लिखी गई है।

'मन्नू भंडारी ने अपने विराट साहित्य में अपने जीवन के विविध अनुभवों के आधार पर नारी जाति के जीवन में आने वाली विविध समस्याओं को उठाया है। जिस समस्या का समाधान हो सकता था, उसका किया है। जिसका कोई समाधान नहीं, उसे वहीं तक लाकर छोड़ा है। वे पाठकों से अपेक्षा करती हैं कि वे उस समस्या का हल ढूंढें', यह उनकी पुत्री रचना यादव ने लोकार्पण के बाद बताया।

शिवरतन थानवी के पुत्र ओम थानवी ने पुस्तक के बारे में बताते हुए कहा- 'हमें नहीं मालूम था कि वे 1950 से डायरी लिखते आ रहे हैं। घर-परिवार और मित्रों की बात ही नहीं, राहुल सांकृत्यायन, क़ाज़ी नज़रुल इस्लाम, गिजूभाई, गोर्की, जॉन होल्ट, 'अज्ञेय', नामवर सिंह, पाउलो फ़्रेरे, इवान इलिच, कुमार गंधर्व, बाल मुरलीकृष्णन, अजय चक्रवर्ती। शिक्षा के साथ साहित्य, संगीत, पर्यावरण, मनोविज्ञान, मानवशास्त्र आदि पर उनके अनुभवों का फलक इतना विशद है कि लगा कि इसका एक संचयन सामने आना चाहिए।'

क्षितिज रॉय ने अपनी पुस्तक गंदी बात के बारे में बताया- 'यह नए दौर की युवा धड़कनों की कहानी है।' 24 वर्ष के युवा लेखक क्षितिज रॉय ने अन्ना आंदोलन के दौरान एक-दूसरे के संपर्क में आने वाले 2 युवाओं को लेकर एक मॉडर्न समय की कहानी लिखी है जिनके रोमांस में महानगर दिल्ली विलेन की भूमिका में दिखाई देती है, तो भाषा और परिवेश के देसीपन के साथ पटना का रोमांस जोर मारता दिखाई देता है।

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