हरिद्वार के संतों की चुप्पी से प्रत्याशी परेशान

हरिद्वार| भाषा| पुनः संशोधित रविवार, 27 अप्रैल 2014 (14:05 IST)
हरिद्वार। संसदीय चुनाव को लेकर धर्मनगरी के संत हर बार निर्णायक भूमिका अदा करते रहे हैं, लेकिन इस बार संतों की चुप्पी से प्रत्याशियों में बेचैनी का भाव देखा जा रहा है।

संतों की चुप्पी के पीछे क्या रहस्य है, यह तो संत लोग भी बताने को तैयार नहीं हैं लेकिन पवित्र नगरी हरिद्वार में हजारों की संख्या में संत मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं और प्रत्येक चुनाव में इनकी एक अहम भूमिका होती है।

जगद्गुरु रामानंदाचार्य पीठ के संचालक स्वामी महंत भगवान दास ने इस सिलसिले में कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश पर कोई छाप छोड़ी हो, ऐसा तो कुछ रहा नहीं लेकिन सोनिया गांधी मेहनत कर रही हैं। मनमोहन के प्रति लोगों में आक्रोश तो है ही।
उन्होंने कहा कि जहां तक मोदी की हवा की बात है तो हरिद्वार में मोदी के नाम पर भाजपा प्रत्याशी और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का शायद बेड़ा पार हो जाए लेकिन निशंक की छवि पर तो कुछ बोलना उचित नहीं है, हरिद्वार वाले बेहतर जानते हैं।

उन्होंने कहा कांग्रेस सिमट गई हो ऐसा भी नहीं है और रही सपा-बसपा की बात तो, यह सब भारत का दुर्भाग्य है और लोकतंत्र की संपूर्णता को बहुत बड़ा घाव है।
उन्होंने कहा कि मेरा निवेदन है देश के युवाओं से भी कि वे कांग्रेस और भाजपा दोनों में से किसी एक को ही वोट दें ताकि लोकतांत्रिक मजबूत सरकार देश में आनी चाहिए। चाहे वह किसी की भी हो। रही हरिद्वार की बात तो हरिद्वार में कांग्रेस, भाजपा के बीच मुकाबला है। तीसरे स्थान पर सपा और उसके बाद 'आप' का नाम आता है।

वैष्णव संत मंडल के अध्यक्ष महंत विष्णुदास ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर संत क्या महसूस करें? राष्ट्र की उन्नति की तरफ न तो किसी का ध्यान है और न कोई भूमिका। केवल राजनीतिज्ञों को पद-लोलुपता ही ध्यान में आती है। यह मन में खिन्नता पैदा करती है।
उन्होंने कहा कि कोई खिलाड़ी बाहर जाता है तो देश के नाम पर खेलता है लेकिन राजनेता देश में बैठकर देश को बदनाम कर रहे हैं, अपने स्वार्थ के लिए एक-दूसरे पर लांछन लगाना अब यही राजधर्म रह गया है।

मोदी लहर के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि मुझे तो ऐसी कोई हवा महसूस नहीं हो रही। जो चुनाव में मतदाताओं को लुभा लेगा, वही जीत जाएगा।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत के नजदीकी रहे उत्तराखंड कांग्रेस के कोषाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रहमचारी से बातचीत के दौरान पार्टी स्तर पर उनकी खिन्नता नजर आई।

उन्होंने कहा कि कमर दर्द की तकलीफ के बावजूद मैं चुनाव प्रचार में हूं। दरअसल चुनाव मैनेजमेंट को लेकर मन खिन्न है। पार्टी स्तर पर विधिवत दायित्व नहीं दिए गए हैं, जो नुकसानदायक है।
कांग्रेस प्रत्याशी तथा हरीश रावत की पत्नी रेणुका रावत के चुनाव में सक्रिय चेतन ज्योति आश्रम के महंत संजय महाराज ने कहा कि वर्तमान में रेणुका की सामाजिक सेवा को भुलाया नहीं जा सकता। रही हरीश रावत की बात तो पूरे प्रदेश में उनका प्रभाव एक माह के कार्यकाल में ही उभरकर नजर आने लगा है और मुझे तो उम्मीद है कि उत्तराखंड की पांचों सीटें हरीश रावत कांग्रेस की झोली में डालेंगे।
संत समाज के मुखर प्रवक्ता संत बाबा हठयोगी ने चुनाव पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मुझे कुछ भी नहीं कहना है। (भाषा)

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