भारी न पड़ जाए भाजपा को प्रांजल यादव का विरोध

बनारस| WD| पुनः संशोधित गुरुवार, 8 मई 2014 (11:48 IST)
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बनारस। केसरिया टोपी लगाए भाजपा के सैकड़ों कार्यकर्ता हिन्दू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) के सामने डटे हुए हैं। वे वाराणसी के कलेक्टर और निर्वा‍चन अधिकारी को हटाने की मांग कर रहे हैं। दरअसल, यादव ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी को बेनियाबाग में रैली करने की अनुमति नहीं दी।

इसी से भाजपा का पारा चढ़ा हुआ है। बुधवार को भाजपा नेता अरुण जेटली ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कलेक्टर यादव पर पक्षपात का आरोप लगाया था। हालांकि इस पूरे मामले का दूसरा पहलू भी है, स्थानीय लोग प्रांजल यादव को काफी पसंद करते हैं। इतना ही नहीं वे उन्हें अपना हीरो भी मानते हैं क्योंकि उन्होंने बनारस क व्यवस्थित बनाने के लिए काफी काम किया है।
इसी के चलते लोगों को भाजपा का यह विरोध रास नहीं आ रहा है। लोग मानते हैं कि भाजपा को ऐसा नहीं करना चाहिए। एसएमएस के माध्यम से कई व्यक्तियों ने कहा है कि वे भाजपा समर्थक हैं, लेकिन डीएम के विरोध को सही नहीं मानते। वे मानते हैं कि प्रांजल यादव का विरोध भाजपा को भारी पड़ सकता है।

कुछ लोग पक्षपात की बात को स्वीकार करते हैं, लेकिन धरने को जायज नहीं मानते। उनका कहना है कि बनारस काफी संवेदनशील क्षेत्र है, यहां की गलियां काफी सकड़ी हैं। ऐसी स्थिति में जिला कलेक्टर की सबसे अहम जिम्मेदारी वहां की जनता के प्रति होती है। अत: वे ऐसी किसी भी बात की अनुमति नहीं दे सकते जिसके चलते यहां की शांति व्यवस्था भंग होने की तनिक भी आशंका हो।
हालांकि कुछ यह भी मानते हैं कि जब पिछले दिनों केजरीवाल को बेनियाबाग में रैली की अनुमति दे दी गई तो फिर मोदी से परहेज क्यों? इस बीच आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अरविन्द केजरीवाल ने भी मोदी को रैली की अनुमति नहीं देने के फैसले को उचित ठहराया है।

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