होली पर हंसी-ठिठोली की चंद क्षणिकाएं...


एमके सांघी|
देश के प्रमुख त्योहारों में होली बहुत ही विशेष है। चूंकि इसे मनाने में गांठ में पैसे होना जरूरी नहीं है अत: इसे देश का गरीब से गरीब आदमी भी मना सकता है। यदि यह भी कहा जाए कि 'ऊंचे लोग, ऊंची पसंद, भूलते जा रहे, होली के रंग' तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।
 
होली और हास्य-मस्ती का चोली-दामन का साथ है। आइए आपको हंसाने के लिए चंद क्षणिकाओं से रूबरू करवाता हूं।  
 
मुफ्त पिचकारी
 
मुफ्त पिचकारी का आफर पाकर
बच्चे और मां-बाप दौड़े चले आए।
विक्रेता ने दी मुफ्त पिचकारी और कहा
कृपया इसमें भरे पानी की कीमत चुकाएं।
 
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