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लड़का-लड़की के भेद को गलत मानती हैं मेघना मलिक
समय ताम्रकर
Meghna
PR
‘ना आना इस देस लाडो’ में रुढि़वादी, क्रूर और दबंग महिला का किरदार निभाने वाली मेघना मलिक रीयल लाइफ में भी उतनी ही दबंग हैं। फर्क इतना है कि वे रुढि़वादी विचारों की नहीं हैं और लड़का-लड़की में कोई फर्क नहीं मानती हैं। भारत के कई पिछड़े इलाकों में लड़कियों के साथ किए जाने वाले इस भेदभाव को वे अमानवीय कृत्य मानती हैं।

यूँ तो मेघना ने ‘मिस्ड कॉल’, ‘तारे जमीं पर’, ‘चलते-चलते’ जैसी फिल्मों और ‘राधा की बेटियाँ’, हर घर कुछ कहता है’, ‘सलाम जिंदगी’ जैसे टीवी धारावाहिकों में अपने अभिनय के जौहर दिखाए हैं, लेकिन जो लोकप्रियता उन्हें ‘अम्माजी’ के किरदार को निभाकर मिली है, उसका कोई मुकाबला नहीं है।

अपनी इस लोकप्रियता के बारे में वे कहती हैं ‘मुझे लगता था कि लोग मुझसे नफरत करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं है। जहाँ मैं जाती हूँ लोग मुझसे प्यार से मिलते हैं। मेरे किरदार के बारे में पूछते हैं। मुझे यह देख खुशी मिलती है कि लोग अब अम्माजी और मेघना के फर्क को समझते हैं। मैं कठोर व क्रूर औरत के चरित्र को निभाने वाली उन सौभाग्यशाली औरतों में से एक हूँ जिसे आज तक किसी ने नहीं पूछा कि आप इतनी निर्दयी और क्रूर क्यों हैं? क्योंकि सभी जानते हैं कि मैं केवल परदे पर कठोर औरत के किरदार को अभिनीत कर रही हूँ।‘

मेघना आधुनिक विचारों वाली महिला हैं और कन्या भ्रूण हत्या जैसे दुष्कृत्य से बेहद दु:खी हैं। उन्हें इस बात का दु:ख है कि सरकार के कठोर नियम भी इसे रोकने में नाकाफी रहे हैं। थिएटर से फिल्म और टीवी की दुनिया में आई मेघना को इस बात की खुशी है कि वे ऐसे धारावाहिक से जुड़ी हैं जो मनोरंजन के साथ-साथ लोगों को जागरुक भी कर रहा है। ‘कहने को तो हम आधुनिक दौर में हैं, लेकिन हमारे देश में कई राज्य ऐसे हैं, जहाँ आज भी लोग लड़की की बजाय लड़कों को तवज्जो देते हैं। लड़कियों का घटता लिंगानुपात चिंता का विषय है। मुझे खुशी है कि मैं ऐसे शो का हिस्सा हूँ जहाँ कई लोगों तक पहुँचकर उन्हें सही-गलत के बारे में बता सकती हूँ।‘

अपने शो की कामयाबी से मेघना खुश है, लेकिन उन्हें ये बात ज्यादा राहत देती है कि उनका धारावाहिक लोगों को जागरुक भी बना रहा है। ‘एकदम तो सारी तस्वीर बदल नहीं सकती, लेकिन हमें सकारात्मक फीडबैक मिल रहे हैं। बड़े शहरों में रहने वाली युवा पीढ़ी ने यह धारावाहिक देखकर मुझसे पूछा कि क्या हमारे देश में ऐसा भी होता है? दूसरी ओर हमें ये भी पता चला है कि कुछ जगह शादी के दौरान आठवाँ फेरा भी लिया जा रहा है और लड़का ये वचन देता है कि वह कन्या भ्रूण हत्या नहीं करेगा और न ही लड़कियों से किसी किस्म का भेदभाव करेगा।‘

अपने उम्दा अभिनय के बारे में मेघना का कहना है कि वे हरियाणा की रहने वाली हैं और वहाँ के माहौल से अच्छी तरह परिचित हैं। शायद इसीलिए वे अम्माजी का किरदार इतने उम्दा तरीके से निभा पा रही हैं।
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