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टीआरपी बढ़ाने की जुगाड़ में टीवी चैनल
इन दिनों छोटे परदे पर रियलिटी-शो का तमाशा जारी है। इसमें नामचीन सेलीब्रिटी के साथ आम आदमी को जोड़कर चैनल वाले अपनी टीआरपी बढ़ाने की जुगाड़ में हैं।

छोटे परदे की लोकप्रियता के शुरुआती दौर में दुनिया ने नए-नए सितारों को ग्लैमर के आकाश पर चमकते और उभरते देखा। ये टेलीस्टार बड़े परदे से होड़ लेते भी नजर आए, क्योंकि आम दर्शक की सहानुभूति इनके साथ थी। फिर इन सितारों की शोहरत इतनी बढ़ी कि बाजार का अर्थशास्त्र इनके आसपास मँडराता दिखाई दिया है।

इस बीच पश्चिम से प्रेरणा लेकर भारतीय टेलीविजन पर रियलिटी-शो की शुरुआत हुई। पहले-पहल इन यथार्थपरक कार्यक्रमों में आम आदमी को स्टारडम की मंजिल की ओर बढ़ते दिखाया गया। सारेगामा/ फेम गुरुकुल/ इंडियन आइडल/ केबीसी ऐसे ही कार्यक्रम थे। अब छोटे परदे ने नई रणनीति के तहत चर्चित चेहरों या सेलीब्रिटी और आम आदमी को करीब लाने के उद्देश्य से रियलिटी आधारित टीवी प्रस्तुतियों में कुछ बदलाव किया है। इसके अंर्तगत अब रियलिटी-शो में मशहूर हस्तियों और साधारण दर्शक के बीच रिश्ते को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

पश्चिम में इस प्रकार का प्रयास पहले द सिम्पल लाइफ, द न्यूली वेड्स, द रियल वर्ल्ड, बिग-ब्रदर, सर्वाइवर जैसे रियलिटी-शो के जरिए किया जा चुका है। भारत में पिछले दिनों शुरू हुए बिग-बॉस, नच बलिए, झलक दिखला जा, फेम एक्स, लॉफ्टर शो जैसे रियलिटी-शो के कर्ताधर्ता इसी सूत्र पर अमल कर रहे हैं। इस नई रणनीति से न केवल इन कार्यक्रमों की लोकप्रियता (टीआरपी) में उछाल आया है, बल्कि दर्शकों के लिए ग्लैमर जगत पहले की अपेक्षा अधिक यथार्थपरक बना है। आजकल ज्यादातर रियलिटी कार्यक्रमों की कोशिश है कि चर्चित हस्तियों और आम आदमी के बीच फासले को कम किया जाए। इसी कोशिश का नतीजा है कि सोनी टीवी के नृत्य आधारित कार्यक्रम 'बूगी-वूगी' में पिछले दिनों उम्रदराज महिलाओं और टेलीविजन के मशहूर कलाकारों को साथ-साथ नाचते -थिरकते दर्शाया गया।

स्टार-वन का लोकप्रिय शो 'लॉफ्टर चैलेंज' एक हफ्ते किसी न किसी चर्चित हस्ती को सेट पर आमंत्रित रहता है। इस शो पर समीरा रेड्डी, दीया मिर्जा, प्रियंका चोपड़ा, सतीश शाह, गुलशन ग्रोवर, रितिक रोशन जैसे नामचीन सितारे बतौर निर्णायक आ चुके हैं। पिछले दिनों इस शो पर आए सोहेल खान तथा उनके भाई सलमान के संबंध में हास्य कलाकारों ने चुटीली टिप्पणियाँ की।

मसलन दोनों भाइयों में यह फर्क है कि सलमान बगैर कमीज के घूमते हैं और सोहेल कमीज पहनकर। इसी तरह शेखर सुमन और नवजोत सिद्धू जैसे लोकप्रिय सितारों के साथ भी सामान्य कलाकारों की चुहलबाजी चलती रहती है। कोई इसका बुरा नहीं मानता। इसे सेलीब्रिटी और आम दर्शक के बीच बढ़ती गर्मजोशी का आधार समझा जाता है।

सोनी टीवी का 'बिग बॉस' जैसा कार्यक्रम रवि किशन, दीपक तिजोरी, राहुल रॉय जैसे चर्चित कलाकारों को रागिनी और केरॉल जैसी अपेक्षाकृत कम जानी-पहचानी सूरतों के साथ आम आदमी की तरह दिनचर्या में मशगूल दर्शा रहा है। इसी चैनल पर प्रसारित 'झलक दिखला जा' में श्वेता साल्वे, मोना सिंह, अजय जडेजा, संजीव कपूर जैसी जानी-मानी हस्तियाँ साधारण आदमी की तरह गुमनाम नृत्य निर्देशकों के साथ नाचती नजर आई थीं। स्टार-वन के 'नच बलिए' में भी यह सिलसिला जारी रहा। जब इस शो से मानव गोहिल और श्वेता क्वात्रा की विदाई हुई तो निर्णायक मंडली में मलाइका अरोरा की आँखें नम हो गईं। वे आम इंसान की तरह इस जोड़ी के शो से बाहर होने पर आँसू बहाते नजर आईं। इसी तरह जी टीवी के लोकप्रिय कार्यक्रम 'लिटिल चैम्प्स' में निर्णायक अभिजीत अपने चुटीले अंदाज के साथ प्रतिभागी बच्चों के माता-पिता के साथ बतियाते और बहस करते नजर आते थे।

फेम-एक्स, नच बलिए, बिग बॉस जैसे कार्यक्रमों में विजेता का फैसला जनता पर छोड़ देने का असली मकसद भी आम दर्शक से सीधा रिश्ता जोड़ना है। इस जज्बाती रस्सी से टीवी शो निर्माता लोकप्रियता की बुलंदी का किला फतह करना चाहते हैं। इस मीना बाजार में सेलीब्रिटी और आम आदमी साथ-साथ खरीददारी कर रहा है।
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