नमाज़ का असल मकसद

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रमज़ान अल्लाह तबारक व तआला की तरफ से ईनाम लेने का महीना है। के पांच बुनियादी अरकान बताए गए हैं। कलिमा-ए-तयैबा, नमाज, रोजा, जकाम और हज।

इस्लाम मज़हब में पांच वक्त की नमाज़ फर्ज़ है, याने पढ़ना जरूरी है। नमाज़ इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है। नमाज़ जिंदगी में परहेज़गारी लाती है, याने नामज़ पढ़ने वाला कभी भी ग़लत और हराम काम नहीं कर सकता।
कुरआन में अल्लाह फरमाता है, जिसका महफूम है कि बेशक नमाज रोकती है, बेहयाई और गुनाह से। नमाज अल्लाह से अपनी जरूरतें पूरी कराने का उससे मांगने का जरिया है। नमाज के मुताल्लिक उलैमा इकराम लिखते हैं कि हर नमाज ऐसे अदा करो गोया यह तुम्हारी आखिरी नमाज है।


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