धनतेरस : यश,सुख और ऐश्वर्य चाहिए तो आज खरीदें हाथी

पर पर हाथी की पूजा करने का भी विधान है। कथा आती है कि एक राजा की दो रानियां थीं। बड़ी रानी के अनेक पुत्र थे, लेकिन छोटी रानी को एक ही पु‍त्र था। एक दिन बड़ी रानी ने मिट्टी का हाथी बनाकर पूजन किया, पर छोटी रानी पूजन से वंचित हो गई। इससे वह उदास हो गई। उसके पुत्र से अपनी माता का दु:ख देखा नहीं गया। वह इंद्र से ऐरावत हाथी ले आया। उसने माता से कहा कि तुम इसकी पूजा करो। रानी ने उसकी पूजा की, बाद में उसका पुत्र बहुत यशस्वी हुआ। तभी से इस दिन सजे-धजे सोने, चांदी, तांबे, पीतल, कांसे या मिट्टी  के हाथी को पूजने की परंपरा आरंभ हुई।
 
*सुबह-सवेरे जल्दी उठकर 16 बार हाथ-मुंह धोएं। इसके बाद स्नान एवं अन्य नित्य कर्म करें।
 
* चंदन, चांदी, सोना, पीतल, कांसा, तांबा या मिट्टी आदि से बनी भगवती श्रीमहालक्ष्मी और हाथी की प्रतिमा स्थापित करें।
 
* 16 सेत्र के धागे में 16 ही गठान लगाएं और हर गांठ का पूजन 'महालक्ष्म्यै नम:' मंत्र के साथ करें।
 
* महालक्ष्मी का षोडशोपचार पूजन करें। पूजा के बाद 16 गांठों वाला पू‍जित सूत्र दाएं हाथ की कलाई में बांधें। 16वें दिन इसे खोलकर लक्ष्मीजी के पास रखते हैं। 
 
* 16 दूर्वा और 16 अक्षत लेकर कथा सुनें। 
 
* आटे के 16 दीपक बनाकर दक्षिणा के साथ ब्राह्मण को दान करें। 
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