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यादों के गलियारों से : दिलीप कुमार का वेतन जब 1250 रुपए प्रतिमाह था, तब राज कपूर को मिलते थे 175 रुपए

यादों के गलियारों से : दिलीप कुमार का वेतन जब 1250 रुपए प्रतिमाह था, तब राज कपूर को मिलते थे 175 रुपए - Story of film actor Dilip Kumar
पुराने फिल्मी सितारों में दिलीप कुमार साहब ने जो काम किया और नाम कमाया, वो अद्‍भुत है। डॉयलाग डिलेवरी से लेकर अदाकारी तक में उनके सामने कोई नहीं टिकता था। दृश्य चाहे रोमांटिक हो या फिर हास्य का, दोनों ही जगह उनका सिक्का खनकता था। आप ताज्जुब करेंगे कि जिस वक्त उनका पहला मेहनताना 1250 रुपए तय हुआ था, उस वक्त राज कपूर को मात्र 175 रुपए ही मिला करते थे...
 
यादों के गलियारे में पहले थोड़ा पीछे चलते हैं...दिलीप कुमार उर्फ मोहम्मद यूसुफ खान का जन्म 11 दिसम्बर 1922 को पेशावर (पाकिस्तान) में हुआ। पाकिस्तान में दिलीप कुमार के पिता का फलों का अच्छा खासा कारोबार हुआ करता था और घर पर पैसों की कोई तंगी नहीं थी। 1947 में देश का बंटवारा हुआ और पूरा परिवार अपनी जमीन जायजाद को छोड़कर हिंदुस्तान आ गया।
 
हिंदुस्तान आते ही उनके परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा क्योंकि यहां पर नए सिरे से जिंदगी को परवान चढ़ाना था। दिलीप कुमार ने बॉम्बे (मुंबई) आने के बाद काफी संघर्ष किया और इस संघर्ष में वो दिन भी आया, जब घर में खुशियों ने दस्तक दी... दिलीप कुमार की मुलाकात डॉ. मसानी से हुई, जो गहरी दोस्ती में बदल गई।
एक बार डॉ. मसानी दिलीप कुमार को लेकर बॉम्बे टॉकिज की मालकिन देविका रानी के पास गए। देविका रानी भी उनसे काफी प्रभावित हुई और मीटिंग के बाद तय हुआ कि उन्हें 1250 रुपए प्रतिमाह का वेतन मिलेगा। जब दिलीप कुमार ने यह बात घर आकर बताई तो घरवालों को विश्वास नहीं हुआ। 
 
घर पर सभी ने कहा कि तुमने गलत सुन लिया होगा...तुम्हें 1250 रुपए प्रतिमाह नहीं बल्कि सालाना मिलेंगे क्योंकि तब राज कपूर का वेतन 175 रुपए प्रतिमाह हुआ करता था। घरवालों के ताने सुनकर दिलीप साहब तुनक पड़े और फिर उन्होंने डॉ. मसानी को फोन लगाकर कहा, वे देविका रानी से पूछे कि मेरा वेतन 1250 रुपए माहवार ही है ना..डॉ. मसानी ने देविका रानी से बात की और फिर दिलीप कुमार को फोन पर कहा कि आपको यह रकम माहवार ही मिलेगी, सालाना नहीं।
 
50 के दशक में 1250 रुपए प्रतिमाह बहुत बड़ी रकम हुआ करती थी, लिहाजा घर में खुशियां मनाई गई। ये खुशी इसलिए भी थी कि दिलीप साहब के पिता का इंतकाल हो गया था। घर में 5 भाई और 6 बहनों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी। सभी जानते हैं कि उन्होंने ये जिम्मेदारी बखूबी निभाई। बहन और भाईयों का घर बसाते-बसाते यह भान ही नहीं रहा कि उन्हें खुद का भी घर बसाना है...
कहते हैं ना खुदा हर इंसान की जोड़ी बनाकर भेजता है, लिहाजा इसमें यह अभिनेता भी शरीक हुआ। उनकी शरीकेहयात बनीं सायरा बानो। जब ये निकाह हुआ, तब दिलीप कुमार की उम्र 40 और सायरा बानो की उम्र 20 साल की थी। सायरा लंदन में जब पढ़ाई करने गई थी, तब उन्होंने फिल्म 'आन' में दिलीप कुमार का अभिनय देखा था और तभी से उनकी दीवानी हो गई थी।
 
लंदन से लौटने के बाद सायरा बानो ने उर्दु और पर्शियन भाषा सीखी। 1966 में निकाह के बाद यह दंपति औलाद की सूरत देखने को तरस गया...1972 में सायरा उम्मीद से थी लेकिन हाई ब्लड प्रेशर के कारण आठवें महीने में गर्भपात हो गया। इसके बाद सायरा कभी मां नहीं बन सकीं। आज दिलीप कुमार 97 बरस के हैं और कई बार हालत गंभीर होने के बाद अस्पतालों में भर्ती हो चुके हैं। इन तमाम मुश्किल भरे हालात में सायरा मजबूती से उनके साथ खड़ी हैं।
मोरारी बापू भी मुरीद : हाल ही में रामकथा वाचक विश्व प्रसिद्ध मोरारी बापू ने बताया कि जब मैं मुंबई में कथा करने गया था, तब मैं दिलीप साहब की तबीयत जानने के लिए उनके निवास पर गया था। दिलीप कुमार और सायरा बानो की अदाकारी का मैं मुरीद था। जब मैंने सायरा को कहा कि मैंने आपकी फिल्में देखी हैं, तो उन्हें आश्चर्य हो रहा था। बोलने लगीं- अरे बापू आप और फिल्म..तब बापू ने कहा, उसमें क्या है, क्या मैं फिल्म नहीं देख सकता। सनद रहे कि मोरारी बापू पहली बार किसी फिल्म अभिनेता के घर गए थे।

दिलीप कुमार के सदाबहार गीत
 
बोल पपीहा बोल (तराना, 1951)
हुए हम जिनके लिए बरबाद (दीदार 1951)
आज मेरे मन में (आन 1952)
टकरा गया तुमसे (आन 1952)
अब आगे तेरी मर्जी (देवदास 1955)
कितना हंसी है मौसम (आजाद 1955)
मांग के साथ तुम्हारा (नया दौर 1957)
आजा रे परदेसी (मधुमति 1958)
मधुबन में राधिका नाचे रे (कोहिनूर 1960) 
खुदा निगेबान हो...(मुगले आजम 1960)
दो सितारों का जमीं पर (कोहीनूर 1960)
कोई सागर दिल को बहलाता नहीं (दिल दिया दर्द लिया 1966)
आज की रात मेरे दिल की सलामी ले ले (राम और श्याम 1967)
मेरे पैरों में घुंघुरु बंधा दे (संघर्ष 1968)