कैमरे के पीछे एक कवि की आँख

इस बार ब्लॉग चर्चा में एक फोटोग्राफर का ब्लॉग

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ब्लॉग की दुनिया में कुछ ब्लॉग ऐसे भी हैं जो विधा-विशेष पर केंद्रित हैं। इनमें कुछ ब्लॉग फोटोग्राफरों के हैं। इसमें एक ब्लॉग है और का-रेम्बलिंग, एंड पिक्चर्स। इस ब्लॉग को देखना सचमुच एक विरल अनुभव है। विरल अनुभव इस अर्थ में कि यहाँ जो फोटो चस्पाँ किए गए हैं वे बताते हैं कि इन्हें कितनी शिद्दत के साथ, कितनी नाजुक कल्पनाशीलता और गहरी समझ के साथ खींचा गया है। ये फोटो यह भी बताते हैं कि अपनी विधागत विशेषता को बरकरार रखते हुए यह फोटोग्राफर अपनी कला से कितना प्यार करता है, उसे इससे कितना लगाव है।


इस ब्लॉग पर अब तक मृणाल ने अपने सवा सौ फोटो पोस्ट किए हैं और इनमें इतनी विविधता है कि सुखद आश्चर्य होता है। यहाँ आपको स्टिल लाइफ मिलेंगें, लैंडस्केप मिलेंगे, पोर्ट्रेट्स मिलेंगे, सेल्फ पोर्ट्रेट्स मिलेंगे, कम्पोजिशंस मिलेंगे और मिलेंगे घरों, शहरों, गलियों के जीवंत-धड़कते, बनते-बिगड़ते, लुभाते-रिझाते रंग।


  उदाहरण के लिए ब्लॉग का पहला ही फोटो दत्तू देखा जा सकता है। यह धूसर-भूरी उजाड़ खेत पर खड़े किसी किसान का फोटो लगता है जिसके हाथ में पानी की खाली बोतल है। इसका टोन गजब है और लगता है इस फोटो पर डार्क रूम में कोई काम किया गया है।      
ये अपनी कलात्मकता में जहाँ आकर्षित करते हैं वही अपनी प्रयोगधर्मिता में ध्यान भी खींचते हैं। इनमें एक खास मूड को पकड़ने का कौशल और धैर्य है तो लैंडस्केप को पूरी खूबसूरती के साथ कैद करने का संयम भी। यहाँ किसी के चेहरे के किसी खास भाव को, किसी मोहक मुद्रा को पकड़ा गया है तो कहीं कहीं किसी पुराने भवनों, महलों, कोठियों, गुंबदों को धूप-छाँव की मोहक माया में बताने-दिखाने की शांत और विनम्र मुद्रा भी है।


लेकिन ये फोटो अपनी सुंदरता और भव्यता में ही नहीं आकर्षित करते बल्कि कहीं कहीं ये जीवन के किसी मर्म और अर्थ को भी अपनी चाक्षुष संवेदना से संप्रेषित करते हैं। जाहिर है कैमरे के पीछे जो निगाह है वह सिर्फ एक औसत फोटोग्राफर की निगाह ही नहीं, इस निगाह के पीछे असल में एक कल्पनाशील और संवेदनशील दिल-दिमाग है जो अपनी कला को कोई ऊचा दर्जा देने का शांत प्रयास करता है।


  ब्लॉग की दुनिया में कुछ ब्लॉग ऐसे भी हैं जो विधा-विशेष पर केंद्रित हैं। इनमें कुछ ब्लॉग फोटोग्राफरों के हैं। इसमें एक ब्लॉग है फोटोग्राफर और फिल्ममेकर मृणाल देसाई का-रेम्बलिंग, रम्बलिंग एंड पिक्चर्स। इस ब्लॉग को देखना सचमुच एक विरल अनुभव है।      
उदाहरण के लिए ब्लॉग का पहला ही फोटो दत्तू देखा जा सकता है। यह धूसर-भूरी उजाड़ खेत पर खड़े किसी किसान का फोटो लगता है जिसके हाथ में पानी की खाली बोतल है। इसका टोन गजब है और लगता है इस फोटो पर डार्क रूम में कोई काम किया गया है। यह अपनी धोखादेह सरलता में एक फोटो ही लगता है लेकिन ध्यान से देखने पर इसकी दूसरी सतहों का भी अहसास होने लगता है। करनाल फोर्ट शीर्षक के तहत पेड़ों से लिपटी ऐसी शाखाएँ हैं कि लगता है कोई सर्प लिपटा हुआ है।


स्कॉटिश पहाड़ मुनरो के मोहक फोटो भी वे यहाँ पोस्ट करते हैं और इस पहाड़ों के बारे में संक्षिप्त जानकारियाँ भी देते हैं। आन द समिट, पेप आफ ग्लेन कोर में तो फोटो इतने सुंदर हैं कि वे एक उजली सुबह में धरती की हरीतिमा और नीले आसमान की खूबसूरती को और भी मोहक बना देते हैं। कुछ सेल्फ पोर्ट्रेट्स तो कमाल के हैं। इसमें एक है आर्थोस्कोपी का जिसमें वे अपने दाएँ पैर का फोटो देते हैं और साथ ही इसकी रिपोर्ट में काव्यात्मकता ढूँढ़ लेते हैं। एक है लाँग शेडो जिसमें कुछ सूदिंग कलर्स के साथ रेलिंग के खास पैटर्न में अपने ही लंबी होती छाया को सुंदरता से पकड़ा गया है।


कोलकाता, मुंबई, अहमदाबाद के फोटो अपनी कलात्मकता के साथ ही रोशनी और उनकी कुछ दर्शनीय स्थलों की वास्तुकला को खूबी से कैप्चर करते हैं। ताज महल की किसी नाजुक बनावट हो या अहमदाबाद की पुरातात्विक धरोहरें ये अपने फोटो के खास टोन और एँगल की वजह चमत्कारिक प्रभाव छोड़ते हैं। ओबान एट डस्क, ओबान गोइंग टु नाइट, वॉकिंग अराउंड ओबान सिरीज के फोटो में एक शहर की लय को खूबसूरती को पकड़ा गया है।


इसमें स्पेस का कल्पनाशील इस्तेमाल है। स्कॉटिश हार्स का दिलकश फोटो है जिसमें वह घोड़ा किसी भी फैशन मॉडल से कम खूबसूरत नहीं दिखता। स्टोन सर्किल, रेड, राक्स, ब्लू सी, ब्राउन शूज फोटो तो किसी पेंटिंग का मजा देते हैं। बटरमेअर लेक और वैली उनकी कला के बेहतरीन साक्ष्य बन पड़े हैं। रेवेनग्लास, अनादर काइंड आफ बर्ड्स भी दर्शनीय हैं। फीलिंग रेस्टलेस में निखरी धूप में सूखते रंगीन कपड़ों का फोटो भी दिलचस्प है औऱ ट्रैफिक फ्राम कैलकेटा तो कमाल का फोटो है जिसमें एक बस, एक टैक्सी और दो पहिया पर सवाल लोगों का फोटो है।


लाइफ इज ए बीच पर आसमान, शांत समुद्र और फोरग्राउंड में औंधेमुंह पड़ी मरी मछली का फोटो तो बेहद मार्मिक बन पड़ा है। ओल्ड टकीला बॉटल में धूप में निखरे हरेपऔर काँचपन का बिम्ब दिलकश है।


इस ब्लॉग को जरूर देखा जाना चाहिए। वस्तुतः इस फोटोग्राफर की निगाह के पीछे एक चित्रकार, एक कवि, एक प्रेमी की को देखा जा सकता है।

ये रहा उसका पता-

रवींद्र व्यास|
http://mrinaldesai.blogspot.com

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