एक जरूरी कोना-किताबी कोना

इस बार ब्लॉग चर्चा में हिन्दी किताबों का ब्लॉग

रवींद्र व्यास|
हमारा ज्ञान अंतरिक्ष के बारे में भी खासा बढ़ गया था और यूरी गगारिन, वैलेंतीना तेरेश्कोवा जैसे नाम हमारी ज़बान पर चढ़ गए थे। ये किताब शायद उस दौर में लिखी गई थी जब सोवियत संघ और अमेरिका में दौड़ चल रही थी, अंतरिक्ष में पहली घुसपैठ किसकी हो, स्पूतनिक और अपोलो, चाँद और पहली अंतरिक्ष यात्रा? वोस्तोक और सोयूज़, जेमिनी और अपोलो।

पठनीयता और प्रवाह कसाथ अस्ट्रोनोमी और विज्ञान का ऐसा अद्भुत संसार इस किताब ने खोला कि हम हैरानसाइंस फिक्शन पढ़ने का चस्का इसी किताब की देन है

हैं ना किताबों को याद करने का आत्मीय ढंग। इसी तरह चंद्रभूषण ने लंबी दाढ़ी किताब के बहाने लेखक जीपी श्रीवास्तव को याद किया है। गाँधीजी की संक्षिप्त आत्मकथा किताब का एक मार्मिक अंश भी दिया गया है जिसमें बीड़ी पीने और आत्महत्या करने की कोशिश का वर्णन है। बारह आने की यह किताब अब दुर्लभ होगी और इसकी असल कीमत क्या है हम जानते हैं।
इसके लेखक मथुरादास विक्रमजी और अनुवादक काशीनाथ त्रिवेदी हैं। पढ़ने के अलावा यहाँ सुनने का मजा भी लिया जा सकता है। टॉलस्टॉय ने अपने बेटे को अपनी किताब समर्पित की थी- निकिता का बचपन। इसके एक अंश को यहाँ सुना भी जा सकता है। यहाँ किताबीलाल ने अपनी फेवरिट किताबों की लिस्ट भी दी है जिसमें यशपाल के झूठा सच से लेकर मंजूर एहतेशाम के सूखा बरगद और चंद्रभूषण व आर. चेतनक्रांति के कविता संग्रहों क्रमशः इतनी रात गए और शोकनाच का जिक्र है।
किताबीलाल के इस ब्लॉग के नौ तोपची हैं। इनमें v9y, मैथिली गुप्त, चंद्रभूषण, प्रमोद सिंह, इरफान, प्रियंकर, प्रत्यक्षा, अभय तिवारी, यूनुस और काकेश शामिल हैं। इनमें से कुछ की ही पोस्ट हैं। बाकी अभी खामोश हैं।

अंत में इस ब्लॉग पर आए चर्चित युवा-कवि कथाकार गीत चतुर्वेदी के इस कमेंट से यह चर्चा खत्म करते हैं कि जिन गिने-चुने ब्लॉग्स पर मेरा आना-जाना है, उनमें से एक है ये किताबी कोना पअक्सर ख़ाली हाथ लौट जाना होता है यहाँ से। किताबीलालजी (मुझे पता नहीं, कौन हैं और प्रोफ़ाइल में कोई मेल आईडी भी नहीं, वरना अलग से आपको मेल करता), आपसगुज़ारिश है कि इस बंदप्राय अवस्था को समाप्त करें और इसे रेगुलर चलाएँ/चलवाएँ। भले इसके फॉर्मेट में थोड़ा बदलाव कर लें (यानी हिन्दी-अँग्रेजी दोनों ही हों)।
इस ब्लॉग का पता है-
http://kitabikona.blogspot.com

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