सीक्रेट सुपरस्टार : फिल्म समीक्षा

ने पिछले एक दशक में ऐसी प्रतिष्ठा हासिल कर ली है कि यदि उनका नाम किसी फिल्म से जुड़ा हो तो वो अच्छी फिल्म गारंटी होता है। उनके बैनर की ताजा फिल्म 'सीक्रेट सुपरस्टार' इस बात को और आगे ले जाती है और दर्शाती है कि आमिर खान बहुत ही सूझबूझ के साथ अपनी फिल्मों को चुनते हैं।

एक ऐसी लड़की की कहानी है जिसका एक सपना है। अपने सपनों में वह रंग भरना चाहती है, लेकिन उसकी राह में ढेर सारी अड़चने हैं। अपने सपने को पूरा करने की उसकी जो यात्रा फिल्म में दिखाई गई है वो आपको भावुक कर देती है। मंजिल सभी को पता है, लेकिन उस तक जाने का जो सफर है वो फिल्म को यादगार बनाता है।

वडोदरा में रहने वाली इंसिया की उम्र है 15 वर्ष। वह टीवी पर आने वाला सिंगिंग रियलिटी शो देखती है और उसकी तमन्ना भी जाग जाती है कि वह गायकी के क्षेत्र में अपना नाम कमाए। उसके पिता बेहद क्रूर हैं। इंसिया की मां के साथ वे खराब व्यवहार तो करते ही हैं, साथ ही इंसिया का गाने के प्रति लगाव भी उन्हें सख्त नापसंद है।

सोशल मीडिया उन लोगों को प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता है जो कुछ करना चाहते हैं। चूंकि इंसिया के पिता दकियानुसी हैं, इसलिए उसकी राह और भी मुश्किल है। उसकी मदद करती है उसकी मां। मां उसको जितनी आजादी दे सकती थी, देती है, लेकिन पिता तो इंसिया को सपना देखने की आजादी भी नहीं देते।

इंसिया बुरका पहने यू-ट्यूब पर अपने गाने लोड करती है जो बेहद प्रसिद्ध होते हैं। उसकी फैन फॉलोइंग बढ़ती जाती है। शक्ति कुमार नामक बददिमाग संगीतकार इंसिया के लिए फरिश्ता बन कर आता है और इंसिया का सपना पूरा करने में मदद करता है।

इस फिल्म को अद्वैत चंदन ने लिखा और निर्देशित किया है। रूढ़िवादी परंपराएं और आधुनिक तकनीक को उन्होंने बारीकी से जोड़ा है। एक लेखक के रूप में उनका काम शानदार है। इंसिया की पृष्ठभूमि, उसके सपने, मां, भाई और दोस्त के साथ उसके
रिश्ते को बड़ी सफाई के साथ लिखा गया है।

स्क्रिप्ट में इतनी कसावट है कि शुरू से आखिरी तक यह आपको बांध कर रखती है। फिल्म में ऐसे कई इमोशनल सीन आते हैं जब कई लोगों को आंसू रोक पाना मुश्किल होगा। इंसिया का अपनी मां को बुद्धू समझना और बाद में यह जानना कि उसकी मां ने उसके लिए कितना कुछ किया है, फिल्म का मास्टर स्ट्रोक है।

फिल्म दो ट्रैक पर चलाती है। एक फैमिली ड्रामा है और दूसरा इंसिया का सपना। इस कारण दो धमाकेदार क्लाइमैक्स देखने को मिलते हैं। जिस तरह से इंसिया की मां अपने पति से रिश्ता तोड़ती है, उसके लिए जो सिचुएशन बनाई गई है वो जबरदस्त है। इसके तुरंत बात इंसिया अपनी पहचान को छिपाने वाला बुरका निकाल कर फेंक देती है वो सीन भी शानदार है।

जहां तक कमियों का सवाल है तो इंसिया जिस तेजी से सफलता हासिल करती है, उसको लेकर कुछ लोगों को आपत्ति हो सकती है। इसी तरह कहीं-कहीं फिल्म में मेलोड्रामा कुछ ज्यादा ही हावी हो गया है, फिल्म की लंबाई भी थोड़ी अखरती है, लेकिन फिल्म का कंटेंट शानदार होने के कारण छोटी-मोटी कमियों को इग्नोर किया जा सकता है।

अच्‍छी बात यह है कि फिल्म आपको कई जगह हंसाती भी है। इंसिया और उसके दोस्त चिंतन के कई ऐसे दृश्य हैं। आमिर खान का हर सीन लाजवाब है। उन्होंने अपनी बॉडी लैंग्वेज और चेहरे के भावों से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया है।

निर्देशक के रूप भी अद्वैत प्रभावित करते हैं। उनके काम में परिपक्वता झलकती है। दृश्यों को उन्होंने गहराई के साथ फिल्माया है और अपनी स्टारकास्ट से बहुत अच्छा काम लिया है।

ने कमाल का अभिनय किया है। इस 'दंगल गर्ल' ने दिखा दिया कि उसमें बहुत दम है। ज़ायरा के चेहरे पर पल-पल बदलते जो भाव हैं वो देखने लायक हैं। पूरी फिल्म को उन्होंने अपने कंधे पर उठा कर रखा है और हर सीन में वे अपनी छाप छोड़ती हैं।

मां के रोल में मेहेर विज का अभिनय लाजवाब है। पति से डरने वाली, लेकिन बच्चों के लिए किसी भी हद तक गुजरने वाली स्त्री के किरदार में उन्होंने जान डाल दी है।

आमिर खान पर फिल्म को सफल बनाने का किसी तरह का दबाव नहीं था, इसलिए उन्होंने उन्मुक्त अभिनय किया है। अपने किरदार को उन्होंने लाउड रखा है, लेकिन कैरीकेचर नहीं बनने दिया। वे जब-जब स्क्रीन पर आते हैं चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।

इंसिया के पिता के रूप में राज अरुण, भाई के रूप में कबीर साजिद, और चिंतन का रोल निभाने वाले तीर्थ शर्मा का का काम भी उल्लेखनीय है।

कौसर मुनीर ने बेहतरीन गीत लिखे हैं और अमित त्रिवेदी का संगीत भी अच्छा है। 'मैं कौन हूं' के साथ-साथ 'मेरी प्यारी अम्मी', 'गुदगुदी' और 'आई मिस यू' भी सुनने लायक हैं।

'सीक्रेट सुपरस्टार' को जरूर देखा जाना चाहिए।

बैनर : आमिर खान प्रोडक्शन्स, ज़ी स्टुडियो
निर्माता : आमिर खान, किरण राव, आकाश चावला
निर्देशक : अद्वैत चंदन
संगीत : अमित त्रिवेदी
कलाकार : ज़ायरा वसीम, आमिर खान, राज अरुण, मेहर विज़, राज अरुण, तीर्थ शर्मा, कबीर साजिद
2 घंटे 30 मिनट
रेटिंग : 3.5/5

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