जुड़वा 2 : फिल्म समीक्षा

अपने गुरु मनमोहन देसाई की तर्ज पर ही अपनी फिल्म शुरू करते हैं जब दो जुड़वा भाई पैदा होते ही बिछड़ जाते हैं। जुड़वा भाई या बहन पर भी में एक फॉर्मूला है कि एक तेज-तर्रार होगा तो दूसरा सीधा और सादा। 'राम और श्याम' से ये फॉर्मूला चला आ रहा है और फॉर्मूला प्रेमी डेविड धवन इसी फॉर्मूले को यहां भी दिखाते हैं। लंदन का प्रेम सीधा-सादा है। सीधा दिखाना है तो उसकी आंखों पर चश्मा चढ़ा दो। लंदन में पला-बढ़ा राजा 'चालू' है। गणपति बप्पा मोरिया, परेशान करे मुझे छोरियां गाकर वह भगवान की प्रार्थना करता है।

फिल्म के शुरू में ही स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि दोनों भाई पास-पास हुए तो एक रोएगा तो दूसरा भी रोएगा। दूसरा हंसेगा तो पहला भी हंसेगा। लंदन और मुंबई में हजारों किलोमीटर का फासला है इसलिए ये कनेक्शन काम नहीं करता, लेकिन जब राजा लंदन जा पहुंचता है तो यह कनेक्शन काम करने लगता है। एक अपनी गर्लफ्रेंड को चूमता है तो दूसरा भी चूम लेता है। एक की पिटाई होती है तो दूसरे को भी दर्द होने लगता है।


ये कनेक्शन कब काम करेगा और कब नहीं, ये निर्देशक और लेखक की मर्जी पर निर्भर है। राजा और प्रेम एक जैसे दिखते भी हैं इसलिए थोड़ा कन्फ्यूजन भी रखा गया है। रोमांस के लिए दो लड़कियां भी हैं समायरा (तापसी पन्नू) और अलिष्का (जैकलीन फर्नांडीस)। अलिष्का तो राजा पर इसीलिए फिदा हो जाती है कि उसने एक मिनट के लिए उसे किस किया। इन दोनों हीरोइनों का काम यही है। 'ब्यूटी विद ब्रेन' वाली बात उन पर लागू नहीं होती।

इन फॉर्मूलों के अलावा विलेन वाला ट्रेक भी डाला गया है। जो शुरुआती मिनटों में नजर आता है और फिर क्लाइमैक्स में क्योंकि फिल्म के अंत में मारा-मारी जरूरी है।

इस देखी-दिखाई कहानी के बीच का शो डाला गया है। वे कॉमेडी करते हैं, डांस करते हैं, मारामारी करते हैं, इमोशनल भी हो जाते हैं, गुंडों को जोरदार किक्स लगाते हैं, हीरोइनों को किस करते हैं। उनके ये सारे कारनामे अच्छे लगते हैं क्योंकि वे भरपूर एनर्जी इन दृश्यों में डालते हैं, लेकिन जब-जब कहानी को आगे बढ़ाने की कोशिश की जाती है फिल्म कमजोर पड़ जाती है। वरुण धवन को छोड़ कर दूसरे किरदारों पर कोई मेहनत नहीं की गई है, उन्हें उभरने का अवसर नहीं दिया गया है, जबकि डेविड धवन की फिल्मों में साइड कैरेक्टर को दमदार रोल दिए जाते रहे हैं।

यहां पर अनुपम खेर, पवन मल्होत्रा, तापसी पन्नू, सचिन खेडेकर, जाकिर हुसैन जैसे दमदार कलाकार फिल्म में हैं, लेकिन सबके रोल दबे हुए हैं। उनके पास करने को ज्यादा कुछ नहीं है।

डेविड धवन की फिल्मों में लॉजिक की बात व्यर्थ है। लॉजिक को साइड में भी रखा जाए तो फिल्म पूरी तरह मनोरंजन नहीं करती। कुछ सीन जरूर ऐसे हैं जहां पर हंसी आती है, लेकिन इनकी संख्या कम है। 'तोतले' और 'काले' लोगों की हंसी उड़ाने को कॉमेडी तो नहीं कहा जा सकता।

फिल्म की लंबाई भी अखरती है। पहले हाफ में यह जितना मनोरंजन करती है दूसरे हाफ में यह मनोरंजन का यह झरना सूख जाता है क्योंकि बार-बार वही बातें दोहराई जाती हैं, जैसे राजा का हर किसी को अपनी दु:ख भरी कहानी सुनाना और सभी का उस पर विश्वास कर लेना। फिल्म में कहीं-कहीं छिछोरी हरकतें भी हैं।

निर्देशक डेविड धवन ने फिल्म की गति को तेज रखा है। दृश्यों में खूब कट लगाए हैं, लाउड बैकग्राउंड म्युजिक रखा है, गाने, फाइट और कॉमेडी को थोड़े-थोड़े अंतराल में पेश किया है, ताकि दर्शक ज्यादा सोच नहीं पाए और इसमें वे कामयाब भी रहे हैं, लेकिन कहानी में दम न होने के कारण फिल्म एक जगह जाकर हांफने लगती है और ऐसा महसूस होने लगता है कि बात को खींचा जा रहा है।
डेविड ने कुछ नया करने की बजाय चिर-परिचित फॉर्मूलों पर ही चलना पसंद किया है।

कहानी में दम नहीं हो तो संवाद पर खासी मेहनत की जाती है, लेकिन 'जुड़वा 2' के संवाद बेदम है। 'दूर से देखा तो आलिया भट्ट थी, पास जाकर देखा तो महेश भट्ट था', 'जो समझ में आता है वो बोल देता हूं और जो समझ में नहीं आता वो व्हाट्स एप कर देता हूं' जैसे संवाद लगातार फिल्म में सुनने को मिलते हैं। अब इस पर ठहाके तो नहीं लगाए जा सकते।

वरुण धवन ने पूरी फिल्म को कंधे पर बखूबी उठाया है। राजा के किरदार में वे ज्यादा जमे। कॉमेडी, एक्शन, इमोशन, रोमांस, डांस में उन्होंने अपना सौ प्रतिशत दिया। फिल्म की कमियों को अपने अभिनय से कई बार वे ढंक लेते हैं। फिल्म में हीरोइनों के लिए कुछ नहीं था। जैकलीन फर्नांडीस ग्लैमरस लगी, जबकि तापसी पन्नू के अभिनय में असहजता नजर आई। वरुण धवन के दोस्त के किरदार में राजपाल यादव उम्रदराज लगे। बाकी कलाकारों के लिए करने को ज्यादा कुछ नहीं था। फिल्म के आखिर में सलमान खान भी आ जाते हैं। एक नहीं दो-दो, और वे अपने आपको ओरिजन जुड़वा बताते हैं।

संगीत के मामले में पुराने गीत 'चलती है क्या 9 से 12' और 'ऊंची है बिल्डिंग' ही बेहतर रहे हैं। फिल्म की सिनेमाटोग्राफी शानदार है।

कुल मिलाकर एक टाइमपास मूवी है। डेविड और वरुण धवन से डबल धमाल की उम्मीद थी, वो पूरी नहीं हो पाती।

बैनर : नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट, फॉक्स स्टार स्टूडियोज़
निर्माता : साजिद नाडियाडवाला
निर्देशक : डेविड धवन
संगीत: साजिद-वाजिद, मीत ब्रदर्स, संदीप शिरोडकर, अनु मलिक
कलाकार : वरुण धवन, जैकलीन फर्नांडीस, तापसी पन्नू, अनुपम खेर, पवन मल्होत्रा, विवान भटेना, राजपाल यादव, सलमान खान
सेंसर सर्टिफिकेट : यूए * 2 घंटे 29 मिनट 46 सेकंड
रेटिंग : 2.5/5

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