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यह है शाहरुख़ के ​परिवार की खूबसूरती का राज...

Last Updated: शुक्रवार, 14 जुलाई 2017 (22:38 IST)
जालंधर। पंजाबी के निर्माण की इच्छा जताते हुए हिंदी फिल्मों के अभिनेता शाहरुख़ खान ने कहा है कि उनके घर में भी अदा की जाती है और पूजा भी होती है और उनके बच्चे यह दोनों सीख रहे हैं और यही मेरे ​की खूबसूरती भी है।
 
अपनी आगामी फिल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’ का प्रचार करने कल रात जालंधर आए शाहरुख़ खान ने कहा, मेरा परिवार अपने आप में एक हिंदुस्तान है। जैसा धर्मनिरपेक्ष माहौल देश में है, वैसा ही मेरे घर में भी है। मेरे परिवार की सबसे बडी खूबसूरती यही है कि घर में पूजा भी होती है और नमाज भी पढ़ी जाती है।’ 
 
बॉलीवुड में बादशाह के नाम से चर्चित शाहरुख़ ने कहा, दोनों एक साथ होता है। मैं नमाज सिखाता हूं और पूजा पत्नी गौरी सिखाती हैं। बच्चों को दोनों सीखनी पड़ती है। हालांकि, हमारी विचारधारा एक है और इसको लेकर कभी किसी प्रकार का कोई मतभेद नहीं हुआ है।
यह पूछने पर कि आप सिने क्षेत्र में बुलंदियों पर हैं तो आपको लगता है कि अभी भी कुछ काम करना बाकी रह गया है? शाहरुख़ ने कहा, दुनिया भर में पंजाबी फिल्मों की लोकप्रियता बढ रही है और मुझे लगता है कि मौका मिलने पर मुझे भी पंजाबी सिनेमा जरूर बनाना चाहिए। बनाने की तमन्ना है और मैं ऐसा जरूर करूंगा लकिन कब यह अभी नहीं कह सकता हूं।
 
उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय फिल्मों की कहानी संस्कृति के ज्यादा निकट होती है। जड़ से जुड़ी हुई होती है जबकि बालीवुड में तकनीक अधिक होता है।
किंग खान शाहरुख़ ने कहा, मैं तकनीक का इस्तेमाल करके फिल्म बनाना चाहता हूं। हमारी फिल्मों में तकनीक की बहुत कमी है और यदि ऐसा ही रहा तो हम अपने युवा दर्शकों को खो देंगे। फिल्मों का स्तर मैं अंतरराष्ट्रीय करना चाहता हूं और यह मेरी दिली ख्वाहिश है। 
 
यह पूछे जाने पर कि बच्चे जब बडे़ हो गए थे तब अबराम का परिवार में आना चुनौती नहीं लगा? इस पर शाहरुख़ ने हंसते हुए कहा, बच्चे बड़े हो गए। पढ़ाई करने के लिए बाहर चले गए। परिवार सूना हो गया तो इसके बाद हमने अबराम को परिवार में लाने की सोची। यह कोई चुनौती नहीं है। 
 
आर्यन के बारे में उन्होंने कहा कि उसकी रूचि फिल्म में काम करने की बजाए ​फिल्म निर्माण में अधिक है। बेटी अभिनय करना चाहती है लेकिन इसके लिए वह अभी छोटी है।
 
अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले की निंदा करते हुए शाहरुख़ ने कहा कि इसकी जितनी निंदा की जाए कम है। यह दु:खदाई घटना है और मैंने इस बारे में ट्वीट करके भी अपना दु:ख जताया था। मुझे खुशी है कि आतंकवादियों के नापाक मंसूबों को दरकिनार कर लोगों ने यात्रा जारी रखी। धर्म से जो विश्वास पैदा होता है, उसे कोई भी बुराई या फिर कोई भी आतंकवादी हमला डिगा नहीं सकता है।
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