महिलाओं की उपलब्धियों पर जश्न मनाना चाहिए : मनोज वाजपेई

मेरे घर मेरी बेटी की ही तानाशाही चलती है। वह 6 साल की है। वह मुझे पापा, तो कभी डैड, तो कभी कुछ कहकर पुकारती है और अगर उसे गुस्सा आ जाए तो पता नहीं क्या कहकर बुला लेगी। आवा नायला बाजपेई नाम है उनका। वो अब बड़ी होती जा रही है। नए-नए करतब दिखाती जाती है। बड़ी मूडी है वो। वो हमारी जिंदगी को काबू में किए हुए है। अच्छे अभिनेता होने के साथ-साथ इन दिनों अच्छे पापा भी बनने की कोशिश कर रहे हैं। यूं तो मनोज की फिल्में सालभर आती ही रहेंगी लेकिन फिलहाल वे 'नाम शबाना' का प्रोमोशन कर रहे हैं। उनसे बातचीत की 'वेबदुनिया' संवाददाता रूना आशीष ने। 
 
'शबाना' नाम से आपका ताल्लुक बहुत पुराना है?
हां वो शबाना मेरे घर पर बैठी हैं। वह एक बड़ी ही खूबसूरत अभिनेत्री हैं। इन दिनों मेरी पत्नी और मां का रोल निभा रही है और हमारी बेटी की देखरेख कर रही है। हमारे घर वाले यानी मेरे और शबाना के मां-पिता मुंबई में हमारे साथ नहीं रहते हैं, तो बच्चे की देखभाल अभी शबाना ही कर रही हैं। सब कुछ जब कंट्रोल में जाएगा तो वो भी बाहर निकल पड़ेगी। शायद एक या दो साल में वह भी लौट आएं पर्दे पर या फिर जब लगने लगे कि बच्चे को 5-6 दिन अपने साथ शूट पर रख लेंगी तो काम भी शुरू हो जाएगा। 
 
चलिए फिल्म 'नाम शबाना' की बातें करते हैं। 
फिल्म में एक महिला किरदार है जिसे मैं ढूंढकर इंटेलीजेंस सिखाता हूं, बढ़ाता हूं। लेकिन मैं अगर सोच लूं कि इसकी बढ़ने की दिशा ठीक नहीं जा रही है तो मैं ही उसे टीम से बाहर भी फेंक दूं, मेरा किरदार कुछ ऐसा कोल्ड ब्लडेड इंसान का है। मेरे लिए मेरा देश का हित पहले है, बाद में बाकी सब। 
 
इन दिनों कई महिला प्रधान फिल्में बन रही हैं, कैसा महसूस करते हैं आप इस बारे में?
बहुत अच्छा है अगर ऐसी फिल्में बन रही हैं तो, क्योंकि कोई प्रगतिशील देश हो या विकसित देश हो तो वहां महिलाओं की बातें होनी ही चाहिए। महिलाओं की उपलब्धियों पर जश्न मनाना चाहिए। ये तो बहुत अच्छा बात है। 'नाम शबाना' में भी शबाना सेंट्रल किरदार में है और हम सब उसे सपोर्ट कर रहे हैं।
 
लेकिन फिर भी मेहनताने अलग-अलग ही हैं?
ऐसा उन फिल्मों में होता है जिनके बड़े-बड़े बजट होते हैं और मैंने बड़े बजट की फिल्में जरा कम ही की हैं। कम बजट के हिसाब से मुझे कम वाला ही मेहनताना मिलता है तो मैं इस बारे में कोई राय नहीं दे सकता हूं, क्योंकि मैं ऐसे सेटअप का कभी हिस्सा बना ही नहीं हूं।
 
आप किसान के बेटे रहे हैं वो भी बिहार के पटना के पास के गांव से। वहां से मुंबई आए। तो ये सफर कैसा रहा है?
मैं किस्मत में बहुत यकीन करता हूं। भगवान ने एक क्षमता दी है और उसका इस्तेमाल हम अपनी किस्मत के अनुसार करते जाते हैं। हम ज्यादा सोच भी नहीं पाते हैं लेकिन होता वही है जो 'राम रचीं राखा'। हम चाहें भी कि आराम से बैठ जाएं तो वो हो नहीं सकता है। तो अपनी क्षमता का इस्तेमाल, अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल हम अगले 20 साल तक तो कर ही लेंगे।
 
आपकी अगली फिल्म 'सरकार 3' के ट्रेलर लॉन्च में आप क्यों नजर नहीं आए?
मैं उस समय मुंबई में नहीं, अपने गांव में था, जहां से मुंबई पहुंचने में बहुत लंबा समय लगता है। मुंबई से पटना तो फ्लाइट है लेकिन पटना एयरपोर्ट से गांव का भी तो सफर है ना! रामू का फोन आया था कि अमिताभजी की डेट मिल गई है तो आपको आना होगा। लेकिन मैं पहुंच नहीं पाता तो इवेंट पर नहीं आ सका। वैसे फिल्म में मैं कैमियो किरदार में हूं, जो ईमानदार नेता है और बेईमानी से लड़ता रहता है।
 
इसके अलावा किस फिल्म में नजर आने वाले हैं आप? 
मैं जल्द ही 'रुख' में नजर आने वाला हूं। एक अंतरराष्ट्रीय फिल्म 'लव सोनिया' है, जो भारत में महिलाओं की ट्रैफिकिंग पर बनी है जिसमें मैं नकारात्मक भूमिका में हूं। फिर तब्बू के साथ फिल्म कर रहा हूं 'मिसिंग', जो साइकोलॉजिकल थ्रिलर है। तो इस साल इतनी फिल्में हैं।

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